बिदादी टाउनशिप विवाद: शिवकुमार ने कुमारस्वामी की बहस-चुनौती स्वीकारी, 3 दिन में देंगे जवाब
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 20 मई 2026 को केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी की विवादास्पद बिदादी टाउनशिप परियोजना पर सार्वजनिक बहस की चुनौती स्वीकार कर ली। बेंगलुरु स्थित अपने कुमार पार्क आवास पर किसानों से मुलाकात के बाद शिवकुमार ने कहा कि वह तीन दिनों के भीतर बहस के लिए तैयार हैं और कुमारस्वामी से तारीख, स्थान व समय तय करने को कहा।
मुख्य घटनाक्रम
शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि बिदादी टाउनशिप परियोजना की नींव उनके नहीं, बल्कि एचडी कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान रखी गई थी। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में भूमि अधिग्रहण की अधिसूचनाएँ पहले ही जारी की जा चुकी थीं और प्रभावित किसानों को 8,000 वर्ग फुट विकसित भूमि आवंटित करने का निर्णय भी तभी लिया गया था।
शिवकुमार ने यह भी बताया कि परियोजना शुरुआत में डीएलएफ कंपनी को सौंपी गई थी, जिसने बाद में इसे अव्यवहार्य बताते हुए वापस कर दिया। इसके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्रियों जगदीश शेट्टार और बसवराज बोम्मई के कार्यकाल में कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (KIADB) ने इसी क्षेत्र में लगभग 1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था, जिस पर तब कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी।
किसानों को मुआवज़े का आश्वासन
उपमुख्यमंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि टाउनशिप परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवज़ा जून के पहले सप्ताह से वितरित होना शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने चरणबद्ध तरीके से ग्रामवार अंतिम अधिसूचना जारी करने का निर्णय लिया है।
शिवकुमार के अनुसार, क्षेत्र के लगभग 80 प्रतिशत किसान परियोजना के पक्ष में सहमति दे चुके हैं और मुआवज़े के शीघ्र वितरण की माँग कर रहे हैं। यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों में असंतोष बना हुआ है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
शिवकुमार ने जनता दल (सेकुलर) के नेतृत्व पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जिस परियोजना में उनकी खुद की भागीदारी रही है, उसी का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा का भी नाम लेते हुए कहा कि इस विवाद को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
गौरतलब है कि यह विवाद कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी जनता दल (सेकुलर) के बीच चल रही राजनीतिक तनातनी का हिस्सा है, जो आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले और तीखी होती जा रही है।
आगे क्या होगा
अब सबकी नज़रें इस पर हैं कि कुमारस्वामी शिवकुमार की बहस-स्वीकृति पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और सार्वजनिक बहस के लिए तारीख तय होती है या नहीं। मुआवज़ा वितरण की प्रक्रिया जून के पहले सप्ताह से शुरू होने की बात कही गई है, जिस पर किसान संगठनों की कड़ी नज़र रहेगी।