डीके शिवकुमार ने जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से मांगी मेकेदातु समेत कई परियोजनाओं की मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार, 12 जून 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से मुलाकात कर राज्य की सिंचाई और पेयजल ज़रूरतों से जुड़ी कई लंबित जल संसाधन परियोजनाओं — सर्वाधिक चर्चित मेकेदातु बैलेंसिंग रिज़र्वायर परियोजना सहित — को शीघ्र मंजूरी दिलाने का आग्रह किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब कर्नाटक के कई ज़िले सूखे की मार झेल रहे हैं और किसान सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की माँग कर रहे हैं।
मेकेदातु परियोजना पर केंद्र से आग्रह
शिवकुमार ने केंद्र सरकार से मेकेदातु बैलेंसिंग रिज़र्वायर परियोजना को तत्काल अनुमति देने की माँग की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के विरुद्ध तमिलनाडु की आपत्तियाँ और पुनर्विचार याचिका सर्वोच्च न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है। अब अनुमति का निर्णय कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और केंद्रीय जल आयोग (CWC) के स्तर पर लंबित है। मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि न्यायिक बाधा समाप्त हो चुकी है, इसलिए प्रशासनिक स्वीकृति में और देरी उचित नहीं।
कृष्णा जल विवाद और अपर भद्रा परियोजना
शिवकुमार ने कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-2 (KWDT-2) के फैसले को जल्द राजपत्र में प्रकाशित करने की भी माँग रखी। उन्होंने बताया कि फैसला आए एक दशक से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी अधिसूचना जारी न होने के कारण अपर कृष्णा परियोजना (स्टेज-3) और राज्य के जल हिस्से के उपयोग में बाधा बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक राजस्थान के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा शुष्क भूमि वाला राज्य है, जहाँ कृषि-सिंचाई की माँग निरंतर बढ़ रही है।
इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय बजट 2023-24 में अपर भद्रा परियोजना के लिए घोषित ₹5,300 करोड़ की सहायता राशि शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया। शिवकुमार के अनुसार यह परियोजना मध्य कर्नाटक के सूखा-प्रभावित क्षेत्रों के लाखों किसानों के लिए जीवनरेखा साबित हो सकती है।
महादयी बेसिन और पर्यावरण मंजूरी का अटका मामला
मुख्यमंत्री ने महादयी बेसिन की कलसा और बंडूरा नाला परियोजनाओं के लिए वन एवं वन्यजीव संबंधी मंजूरियाँ जल्द जारी करने की माँग की। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2022 में जल शक्ति मंत्रालय की स्वीकृति मिलने के बावजूद पर्यावरण संबंधी अनुमति अब तक लंबित है। इन परियोजनाओं से हुबली-धारवाड़ क्षेत्र की पेयजल आवश्यकताएँ पूरी होने की उम्मीद है।
अन्य योजनाओं पर माँगें
शिवकुमार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) और बाढ़ प्रबंधन एवं सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम (FMBAP) के तहत भेजे गए प्रस्तावों को शीघ्र मंजूरी देने तथा राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी की नदी जोड़ो परियोजनाओं में कर्नाटक को उसका उचित हिस्सा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और गृह मंत्री से भी मुलाकात
इससे पहले मुख्यमंत्री शिवकुमार ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिष्टाचार भेंट की — मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी यह पहली ऐसी मुलाकात थी। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार दोनों के बीच विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से भी शिष्टाचार भेंट की। दिन में बाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात का कार्यक्रम निर्धारित बताया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व से एक ही दिन में इतनी बैठकें कर्नाटक सरकार की केंद्र से लंबित माँगों को प्राथमिकता दिलाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं।
शिवकुमार ने कहा कि इन परियोजनाओं को समय पर मंजूरी मिलने से राज्य के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और किसानों के कल्याण को बल मिलेगा। अब सबकी नज़रें इस पर टिकी हैं कि CWMA और CWC मेकेदातु पर अपना निर्णय कब तक सुनाते हैं।