20 अगस्त 2026
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मेकेदातु परियोजना से तमिलनाडु-पुडुचेरी के किसानों को फायदा: डीके शिवकुमार का महाबलीपुरम में दावा

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मेकेदातु परियोजना से तमिलनाडु-पुडुचेरी के किसानों को फायदा: डीके शिवकुमार का महाबलीपुरम में दावा

सारांश

महाबलीपुरम में दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में कर्नाटक CM डीके शिवकुमार ने मेकेदातु परियोजना को कावेरी विवाद का हल नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग का अवसर बताया — साथ ही परिसीमन, वित्तीय हिस्सेदारी और महिला आरक्षण पर दक्षिण भारत के हितों की कड़ी पैरवी की।

मुख्य बातें

कर्नाटक CM डीके शिवकुमार ने 20 अगस्त को महाबलीपुरम में दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में मेकेदातु परियोजना के फायदे गिनाए।
उन्होंने कहा कि मेकेदातु से जुड़ा पानी तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों के लिए लाभकारी होगा।
आंध्र प्रदेश के CM एन.
चंद्रबाबू नायडू ने बैठक से पहले शिवकुमार से बात कर कावेरी विवाद जल्द सुलझाने पर जोर दिया।
दक्षिण भारत के 5 राज्य देश की जीडीपी में 33% योगदान देते हैं; अकेले कर्नाटक का हिस्सा 9% , जनसंख्या केवल 5.5% ।
15वें वित्त आयोग में कर्नाटक की हिस्सेदारी 4.7% से घटकर 3.6% हुई, जिससे ₹65,000 करोड़ का अनुमानित नुकसान।
शिवकुमार ने बेंगलुरु-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर , रायचूर एम्स और परिसीमन में दक्षिण के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा की माँग की।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 20 अगस्त को महाबलीपुरम में आयोजित दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में मेकेदातु जलाशय परियोजना को क्षेत्रीय सहयोग का एक अहम अवसर बताया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस परियोजना से जुड़ी पानी की हर बूंद मुख्य रूप से तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों के काम आएगी।

मेकेदातु परियोजना को बताया सहयोग का माध्यम

शिवकुमार ने मेकेदातु परियोजना के प्रस्ताव को विवाद का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग का माध्यम बताया। उन्होंने कहा, 'आप हमारी मदद करें तो फिर हम आपकी भी मदद करेंगे।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नदियाँ राजनीतिक सीमाओं को नहीं पहचानतीं और इसीलिए दक्षिण भारत के राज्यों को आपसी संवाद, पारदर्शिता और सहयोग के ज़रिये जल बंटवारे के विवाद सुलझाने चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बैठक से पूर्व उनसे बातचीत की और इस बात पर जोर दिया कि कर्नाटकतमिलनाडु को कावेरी जल विवाद जल्द-से-जल्द सुलझाना चाहिए।

कावेरी विवाद खत्म करने की अपील

बैठक में अपना संबोधन समाप्त करते हुए शिवकुमार ने लंबे समय से चले आ रहे कावेरी जल बंटवारे के विवाद को समाप्त करने की अपील की। उन्होंने परिषद को बताया कि कर्नाटक कृष्णा, अपर भद्रा, मेकेदातु और नदी-जोड़ो परियोजनाओं पर अपना विस्तृत पक्ष रखेगा।

परिसीमन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर चिंता

शिवकुमार ने भविष्य में होने वाले किसी भी परिसीमन के संदर्भ में दक्षिण भारत के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए कड़ी पैरवी की। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने परिषद से आग्रह किया कि लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या बरकरार रखी जाए और इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किसी भी रूप में कम न हो।

उन्होंने महिला आरक्षण को बिना देरी लागू करने की भी माँग की और कहा कि संसद की मौजूदा संरचना को देखते हुए इसे जनसंख्या नियंत्रण या परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

जीडीपी योगदान और वित्तीय हिस्सेदारी का मुद्दा

शिवकुमार ने आँकड़ों के हवाले से बताया कि दक्षिण भारत के पाँच राज्य देश की जीडीपी में 33 प्रतिशत योगदान देते हैं। अकेले कर्नाटक का जीडीपी में हिस्सा लगभग 9 प्रतिशत है, जबकि राज्य की जनसंख्या केवल 5.5 प्रतिशत है।

उन्होंने यह भी बताया कि 15वें वित्त आयोग के तहत बंटने योग्य कर-पूल में कर्नाटक की हिस्सेदारी 4.7 प्रतिशत से घटकर 3.6 प्रतिशत रह गई, जिससे छह वर्षों में अनुमानित ₹65,000 करोड़ का नुकसान हुआ। हालाँकि 16वें वित्त आयोग ने इसे बढ़ाकर 4.131 प्रतिशत कर दिया है।

बुनियादी ढाँचे और अन्य माँगें

शिवकुमार ने परिषद के सामने बेंगलुरु-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, रायचूर में एम्स और कल्याणा कर्नाटक के लिए एक विशेष पैकेज की माँग रखी। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, तटीय कटाव, किसान कल्याण, ग्रामीण बैंक, खनिज कराधान अधिकार और ड्रग्स तस्करी जैसे मुद्दों पर भी केंद्र व राज्य सरकारों से सहयोग की अपील की।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण भारत के राज्य परिसीमन और वित्तीय संसाधनों के बँटवारे को लेकर केंद्र सरकार के साथ अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो वर्षों से इस परियोजना को अपने जल अधिकारों पर अतिक्रमण मानता रहा है। लेकिन असली पेचीदगी यह है कि कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बाद भी अनसुलझा है, और क्षेत्रीय परिषद की बैठक में दिए गए भाषण से ज़मीनी स्थिति नहीं बदलती। परिसीमन और वित्तीय हिस्सेदारी पर उनकी चिंताएँ दक्षिण के राज्यों की साझा राजनीतिक भावना को दर्शाती हैं, लेकिन इन माँगों का भविष्य केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेकेदातु परियोजना क्या है और इसका विवाद क्यों है?
मेकेदातु कर्नाटक की एक प्रस्तावित जलाशय परियोजना है जो कावेरी नदी पर बनाई जानी है। तमिलनाडु इस परियोजना का विरोध करता रहा है, यह मानते हुए कि इससे उसके हिस्से का कावेरी जल प्रभावित होगा।
डीके शिवकुमार ने मेकेदातु को तमिलनाडु के लिए फायदेमंद कैसे बताया?
शिवकुमार ने कहा कि मेकेदातु परियोजना से जुड़ी पानी की हर बूंद तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों के काम आएगी। उन्होंने इसे विवाद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग का माध्यम बताया।
दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में और कौन-से मुद्दे उठाए गए?
बैठक में परिसीमन में दक्षिण भारत के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा, महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने, वित्त आयोग में कर्नाटक की हिस्सेदारी, बेंगलुरु-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और रायचूर में एम्स की माँगें भी उठाई गईं।
15वें वित्त आयोग में कर्नाटक को कितना नुकसान हुआ?
शिवकुमार के अनुसार, 15वें वित्त आयोग के तहत कर्नाटक की हिस्सेदारी 4.7% से घटकर 3.6% हो गई, जिससे छह वर्षों में अनुमानित ₹65,000 करोड़ का नुकसान हुआ। 16वें वित्त आयोग ने इसे बढ़ाकर 4.131% कर दिया है।
चंद्रबाबू नायडू की इस बैठक में क्या भूमिका रही?
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बैठक से पहले शिवकुमार से बातचीत की और कर्नाटक व तमिलनाडु से कावेरी जल विवाद जल्द सुलझाने पर जोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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