2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार का DMK पर बड़ा आरोप, शिवकुमार से मिलकर अड़चनें डालने का दावा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार का DMK पर बड़ा आरोप, शिवकुमार से मिलकर अड़चनें डालने का दावा

सारांश

तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार ने DMK पर सीधा हमला बोला — आरोप है कि विपक्ष, कर्नाटक के CM शिवकुमार के साथ मिलकर कावेरी जल आवंटन में जानबूझकर रोड़े अटका रहा है, ताकि CM विजय को इस मुद्दे पर जनता की सहानुभूति न मिले। कावेरी विवाद एक बार फिर तमिलनाडु की राजनीति का केंद्र बन गया है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार ने 2 अगस्त 2026 को चेन्नई में DMK पर कावेरी जल आवंटन में बाधा डालने का आरोप लगाया।
आरोप है कि DMK , कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार के साथ मिलकर CM विजय को राजनीतिक श्रेय मिलने से रोक रही है।
मंत्री ने AIADMK पर भी सवाल उठाए कि उसने विधानसभा में विरोध के बजाय अदालत का रास्ता क्यों चुना।
निर्मल कुमार के अनुसार, शिवकुमार कांग्रेस आलाकमान की बजाय DMK अध्यक्ष स्टालिन की बात सुनने को अधिक तैयार हैं।
मंत्री ने कावेरी विवाद पर सर्वदलीय बैठक और राजनीतिक एकता की अपील की।

तमिलनाडु सरकार में मंत्री निर्मल कुमार ने 2 अगस्त 2026 को चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि DMK, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ मिलकर तमिलनाडु को कावेरी नदी का उसका न्यायसंगत हिस्सा दिलाने में जानबूझकर बाधाएँ उत्पन्न कर रही है। निर्मल कुमार के अनुसार, इन कथित अड़चनों के पीछे राजनीतिक मकसद है — विपक्ष नहीं चाहता कि मुख्यमंत्री विजय को इस दीर्घकालिक अंतर-राज्यीय जल विवाद को सुलझाने का श्रेय मिले।

मुख्य आरोप और बयान

निर्मल कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'DMK नहीं चाहती कि मुख्यमंत्री विजय को जनता के बीच अच्छी छवि मिले। इसीलिए वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ मिलकर कावेरी मुद्दे पर अड़चनें पैदा कर रही है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि DMK की यह रणनीति राजनीतिक प्रेरित है और इसका सीधा नुकसान तमिलनाडु के किसानों और आम जनता को उठाना पड़ रहा है।

मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार, कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों की बजाय DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन की बात सुनने को अधिक इच्छुक हैं। उनके अनुसार, इससे जल-बँटवारे की प्रक्रिया और जटिल हो गई है।

AIADMK की रणनीति पर सवाल

निर्मल कुमार ने अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि AIADMK ने तमिलनाडु विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने के बजाय अदालत का रास्ता क्यों चुना। उनके अनुसार, विधानसभा में एकजुट विरोध कावेरी जल अधिकारों की लड़ाई को अधिक प्रभावशाली बना सकता था।

राजनीतिक एकता की अपील

मंत्री ने सर्वदलीय बैठक की माँग का उल्लेख करते हुए कहा कि कावेरी जल अधिकारों के मुद्दे पर तमिलनाडु में राजनीतिक एकता का अभाव है। उन्होंने जोर दिया कि दलगत मतभेदों को राज्य के जायज पानी के हिस्से की लड़ाई को कमजोर नहीं करने देना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब कावेरी जल विवाद एक बार फिर तमिलनाडु की राजनीति में केंद्रीय मुद्दा बन गया है।

स्टालिन के बयान पर पलटवार

DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने हाल ही में दावा किया था कि मुख्यमंत्री विजय राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए हैं। इस पर निर्मल कुमार ने कहा कि इस तरह के बयानों का तमिलनाडु या वहाँ के लोगों के हितों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्षी आलोचना के बावजूद सरकार राज्य के जल अधिकारों के लिए प्रयास जारी रखेगी।

आगे की राह

गौरतलब है कि कावेरी जल विवाद दशकों पुराना है और इसमें सर्वोच्च न्यायालय तक के हस्तक्षेप के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। मंत्री निर्मल कुमार के ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब सत्ताधारी और विपक्षी दल एक-दूसरे पर तमिलनाडु के हितों को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगा रहे हैं। राज्य में राजनीतिक दलों के बीच कावेरी पर आम सहमति बनाना आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे हर दल अपने हित के अनुसार भुनाता आया है। असली सवाल यह है कि जब सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देश मौजूद हैं, तो राजनीतिक दल अदालती और संस्थागत रास्तों के बजाय आरोप-प्रत्यारोप को प्राथमिकता क्यों दे रहे हैं। DMK और AIADMK दोनों पर लगाए गए सवाल यह भी उजागर करते हैं कि तमिलनाडु में विपक्ष एकजुट मोर्चा बनाने में विफल रहा है। जब तक राजनीतिक एकता नहीं बनती, कावेरी के पानी की लड़ाई कमरे में नहीं, बल्कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में लड़ी जाती रहेगी।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु मंत्री निर्मल कुमार ने DMK पर क्या आरोप लगाया?
निर्मल कुमार ने आरोप लगाया कि DMK, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ मिलकर तमिलनाडु को कावेरी का न्यायसंगत जल हिस्सा दिलाने में जानबूझकर बाधाएँ डाल रही है। उनके अनुसार, विपक्ष नहीं चाहता कि मुख्यमंत्री विजय को इस मुद्दे पर राजनीतिक श्रेय मिले।
कावेरी जल विवाद में DMK की कथित भूमिका क्या है?
मंत्री निर्मल कुमार के अनुसार, DMK राजनीतिक कारणों से विजय सरकार की कावेरी जल प्रयासों को कमजोर कर रही है। उनका दावा है कि कर्नाटक के CM शिवकुमार, कांग्रेस आलाकमान की बजाय DMK अध्यक्ष स्टालिन के प्रभाव में अधिक हैं।
AIADMK की रणनीति पर क्या सवाल उठाए गए?
निर्मल कुमार ने AIADMK से पूछा कि उसने तमिलनाडु विधानसभा में कावेरी मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने के बजाय अदालत जाने का रास्ता क्यों चुना। उनके अनुसार, विधानसभा में एकजुट विरोध अधिक प्रभावशाली होता।
कावेरी विवाद पर तमिलनाडु में राजनीतिक एकता की स्थिति क्या है?
मंत्री निर्मल कुमार ने स्वीकार किया कि कावेरी मुद्दे पर तमिलनाडु में राजनीतिक एकता का अभाव है। उन्होंने सर्वदलीय बैठक की माँग का समर्थन करते हुए कहा कि दलगत मतभेद राज्य के जल अधिकारों की लड़ाई को कमजोर नहीं करने चाहिए।
DMK अध्यक्ष स्टालिन के बयान पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया रही?
स्टालिन के इस दावे पर कि CM विजय राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए हैं, निर्मल कुमार ने कहा कि ऐसे बयानों का तमिलनाडु या वहाँ के लोगों के हितों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार राज्य के जल अधिकारों के लिए प्रयास जारी रखेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 16 घंटे पहले
  2. कल
  3. कल
  4. 2 दिन पहले
  5. 3 दिन पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 3 सप्ताह पहले