25 जुलाई 2026
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कावेरी विवाद: स्टालिन ने CM विजय की कर्नाटक यात्रा रद्द करने की माँग की, सर्वदलीय बैठक का आग्रह

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कावेरी विवाद: स्टालिन ने CM विजय की कर्नाटक यात्रा रद्द करने की माँग की, सर्वदलीय बैठक का आग्रह

सारांश

DMK अध्यक्ष स्टालिन ने CM विजय की कर्नाटक यात्रा को 'दिखावटी कवायद' बताकर खारिज किया। उनका तर्क है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से स्थापित अधिकारों को द्विपक्षीय वार्ता से कमज़ोर किया जा सकता है। कावेरी डेल्टा के किसान भी इस निर्णय से नाराज़ बताए जा रहे हैं।

मुख्य बातें

स्टालिन ने 25 जुलाई को मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय की प्रस्तावित कर्नाटक यात्रा को 'गलत निर्णय' बताते हुए रद्द करने की माँग की।
स्टालिन ने कावेरी पर किसी भी पहल से पहले सर्वदलीय बैठक और किसान संगठनों से परामर्श की शर्त रखी।
उनके अनुसार, द्विपक्षीय वार्ता सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम फैसले से मिली तमिलनाडु की कानूनी स्थिति को कमज़ोर कर सकती है।
मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना को स्टालिन ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का उल्लंघन बताया।
कावेरी डेल्टा के किसान प्रत्यक्ष वार्ता के निर्णय से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने शनिवार, 25 जुलाई को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की कावेरी जल विवाद पर चर्चा के लिए प्रस्तावित कर्नाटक यात्रा को 'गलत निर्णय' करार देते हुए तत्काल रद्द करने की माँग की। स्टालिन ने स्पष्ट किया कि नदी जल से जुड़ी किसी भी पहल से पहले सभी राजनीतिक दलों और किसान संगठनों की सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए।

स्टालिन की मुख्य आपत्तियाँ

एक विस्तृत बयान में स्टालिन ने तर्क दिया कि कावेरी पर तमिलनाडु के अधिकार न्यायिक प्रक्रिया के ज़रिये पहले ही सुदृढ़ रूप से स्थापित हो चुके हैं। उनके अनुसार, द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से इस मुद्दे को फिर से खोलने का कोई भी प्रयास राज्य की कानूनी स्थिति को कमज़ोर कर सकता है।

स्टालिन ने आरोप लगाया कि कर्नाटक द्वारा तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़ने से लगातार इनकार करना सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम फैसले की अवमानना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि मेकेदातु संतुलन जलाशय निर्माण का प्रस्ताव उसी फैसले का उल्लंघन है।

यात्रा के उद्देश्य पर सवाल

DMK नेता ने प्रस्तावित यात्रा की उपयोगिता पर भी संदेह जताया और इसे 'दिखावटी कवायद' बताया। उन्होंने इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) तमिलनाडु में सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी है। उनके अनुसार, इस यात्रा से राज्य सरकार केवल यह दावा कर पाएगी कि उसने सीधी बातचीत का प्रयास किया, जबकि तमिलनाडु को कोई ठोस लाभ नहीं मिलेगा।

किसानों की नाराज़गी और DMK का पुराना रुख

स्टालिन ने कहा कि कावेरी डेल्टा के किसान इस प्रत्यक्ष वार्ता के निर्णय से बेहद असंतुष्ट हैं। उन्होंने याद दिलाया कि उनकी पिछली DMK सरकार ने कर्नाटक के साथ द्विपक्षीय वार्ता का लगातार विरोध किया था, क्योंकि बार-बार की गई बातचीत से कोई परिणाम नहीं निकला — पड़ोसी राज्य ने अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया।

स्टालिन ने तमिलनाडु सरकार पर 'कर्नाटक के जाल' में फँसने का आरोप लगाया और कहा कि पड़ोसी राज्य का असली उद्देश्य कावेरी जल पर तमिलनाडु के स्थापित अधिकारों को कमज़ोर करना है।

मेकेदातु परियोजना: विवाद की जड़

स्टालिन के अनुसार, मेकेदातु परियोजना के लिए कर्नाटक का निरंतर दबाव इस बात का प्रमाण है कि वह कावेरी पर तमिलनाडु के वैध अधिकारों को मान्यता देने से इनकार करता है। यह DMK के उस दीर्घकालिक रुख की पुष्टि करता है कि इस मुद्दे पर प्रत्यक्ष वार्ता से कोई लाभ नहीं।

आगे क्या

स्टालिन की माँग के बाद अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री विजय कर्नाटक यात्रा की अपनी योजना पर पुनर्विचार करते हैं या नहीं। कावेरी जल विवाद दशकों पुराना है और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद दोनों राज्यों के बीच तनाव बना हुआ है। सर्वदलीय बैठक की माँग यह भी संकेत देती है कि तमिलनाडु में विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट मोर्चे की अपेक्षा रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक वास्तविक तर्क भी है — कावेरी पर बार-बार की गई वार्ताओं का इतिहास बताता है कि बिना कानूनी ढाँचे के बातचीत से तमिलनाडु को कुछ हासिल नहीं हुआ। विडंबना यह है कि कर्नाटक में कांग्रेस और तमिलनाडु में उसके सहयोगियों की सत्ता होने के बावजूद जल विवाद जस का तस है — जो यह सवाल उठाता है कि गठबंधन की राजनीति राज्यों के जल अधिकारों पर कितनी असरदार है। CM विजय की यात्रा यदि ठोस एजेंडे के बिना होती है, तो स्टालिन का 'दिखावटी कवायद' वाला आरोप निराधार नहीं होगा।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्टालिन ने CM विजय की कर्नाटक यात्रा का विरोध क्यों किया?
स्टालिन का कहना है कि कावेरी पर तमिलनाडु के अधिकार सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पहले ही सुनिश्चित हैं और द्विपक्षीय वार्ता इस कानूनी स्थिति को कमज़ोर कर सकती है। उन्होंने यात्रा को 'दिखावटी कवायद' बताया जिससे राज्य को कोई ठोस लाभ नहीं मिलेगा।
कावेरी जल विवाद में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला क्या कहता है?
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अंतिम फैसले में तमिलनाडु को कावेरी जल का एक निश्चित हिस्सा देने का निर्देश कर्नाटक को दिया है। स्टालिन के अनुसार, कर्नाटक द्वारा पानी छोड़ने से इनकार और मेकेदातु परियोजना का प्रस्ताव इसी फैसले की अवमानना और उल्लंघन है।
मेकेदातु परियोजना क्या है और इसका विरोध क्यों हो रहा है?
मेकेदातु कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी पर प्रस्तावित एक संतुलन जलाशय परियोजना है। तमिलनाडु और DMK इसका विरोध इस आधार पर करते हैं कि यह सर्वोच्च न्यायालय के कावेरी जल बँटवारे के फैसले का उल्लंघन करती है और तमिलनाडु को मिलने वाले पानी को प्रभावित कर सकती है।
स्टालिन ने सर्वदलीय बैठक की माँग क्यों की?
स्टालिन का मानना है कि कावेरी जल जैसा संवेदनशील मुद्दा राजनीतिक प्रतीकात्मकता या अनौपचारिक बातचीत से नहीं सुलझाया जा सकता। इसलिए उन्होंने माँग की कि कोई भी कदम उठाने से पहले सभी राजनीतिक दलों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से परामर्श किया जाए।
कावेरी विवाद में कावेरी डेल्टा के किसानों की क्या भूमिका है?
कावेरी डेल्टा के किसान सिंचाई के लिए कावेरी जल पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं और पानी की कमी से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। स्टालिन ने कहा कि ये किसान CM विजय की प्रत्यक्ष वार्ता के निर्णय से बेहद असंतुष्ट हैं।
राष्ट्र प्रेस
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