कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने ताज़ा आँकड़ों सहित स्टेटस रिपोर्ट माँगी, एक सप्ताह बाद अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के जल बँटवारे पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों से ताज़ा आँकड़ों के साथ स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद निर्धारित की है। यह मामला दशकों पुराने अंतर-राज्यीय जल विवाद की नई कड़ी है, जो इस वर्ष कमज़ोर मानसून के कारण और गहरा गया है।
याचिका में क्या माँगा गया
तमिलनाडु सरकार और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि कर्नाटक को तत्काल कावेरी नदी का पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ने का निर्देश दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि कम मानसून और वर्षा की कमी के चलते तमिलनाडु को उसके निर्धारित हिस्से का पानी नहीं मिल रहा। इसके साथ ही तमिलनाडु सरकार ने कर्नाटक पर कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के निर्देशों का पालन न करने का आरोप लगाया है।
दोनों राज्यों के तर्क
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु की ओर से अदालत को बताया गया कि कर्नाटक ने सिंचाई के लिए पानी छोड़ना शुरू किया है, फिर भी तमिलनाडु को अभी तक पानी नहीं पहुँचा है। दूसरी ओर, कर्नाटक सरकार के वकील ने तर्क दिया कि राज्य की स्थिति को सही परिप्रेक्ष्य में नहीं रखा जा रहा। उन्होंने अदालत को बताया कि बुधवार सुबह तक पानी की आपूर्ति 12,000 क्यूसेक से अधिक हो चुकी है और यह जारी रहेगी। कावेरी बेसिन में गंभीर जल संकट की स्थिति बनी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में ताज़ा जल-प्रवाह आँकड़ों के साथ विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के कई जलाशयों में जलस्तर सामान्य से काफी नीचे है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार का बयान
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'तमिलनाडु के लिए 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश आया है। मैं लगातार हमारे जलाशयों में पानी के बहाव पर नज़र रख रहा हूँ। हम बाँधों में पानी की उपलब्धता के आधार पर फैसला लेंगे।' उन्होंने किसानों से धैर्य और शांति बनाए रखने की अपील की तथा आश्वासन दिया कि सरकार न्यायालय के आदेशों का सम्मान करेगी और कर्नाटक के किसानों की फसलों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।
आगे क्या होगा
अगली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय दोनों राज्यों की स्टेटस रिपोर्ट और ताज़ा जल-प्रवाह आँकड़ों की समीक्षा करेगा। CWMA के आदेशों के अनुपालन पर अदालत की नज़र रहेगी। गौरतलब है कि कावेरी जल विवाद वर्षों से दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और कानूनी तनाव का केंद्र रहा है, और इस वर्ष का सूखा इसे और जटिल बना रहा है।