24 अगस्त 2026
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कावेरी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को CWMA के पास जाने की अनुमति दी, 31 अगस्त को अगली सुनवाई

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कावेरी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को CWMA के पास जाने की अनुमति दी, 31 अगस्त को अगली सुनवाई

सारांश

कावेरी जल विवाद एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय के दरवाज़े पर है। तमिलनाडु का आरोप है कि कर्नाटक के जलाशयों में 78 टीएमसी पानी होने के बावजूद उसे निर्धारित 26.954 टीएमसी हिस्सा नहीं मिल रहा। अब CWMA की बैठक और 31 अगस्त की सुनवाई तय करेगी कि इस पुराने विवाद में राहत मिलेगी या नहीं।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 24 अगस्त 2026 को तमिलनाडु को CWMA के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की अनुमति दी।
तमिलनाडु ने कर्नाटक पर 26.954 टीएमसी कावेरी जल न छोड़ने का आरोप लगाया है।
कर्नाटक के कावेरी जलाशयों में इस समय लगभग 78 टीएमसी जल उपलब्ध है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अगली सुनवाई 31 अगस्त के लिए निर्धारित की।
CWRC की 139वीं बैठक (28 जुलाई) में कर्नाटक को बिलिगुंड्लु में 3,500 क्यूसेक प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने 24 अगस्त 2026 को तमिलनाडु को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी। तमिलनाडु का आरोप है कि कर्नाटक कावेरी नदी का उसका निर्धारित जल-हिस्सा नहीं छोड़ रहा है। न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त के लिए निर्धारित की है।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ तमिलनाडु की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कर्नाटक को 26.954 टीएमसी कावेरी जल छोड़ने का निर्देश देने की माँग की गई है। तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने बताया कि राज्य को सोमवार सुबह तक CWMA के निर्देशानुसार पानी मिल गया था।

हालाँकि, वैद्यनाथन ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु की मूल शिकायत यह है कि CWMA ने कर्नाटक को पानी की उस तय मात्रा में हुई कमी की भरपाई करने का निर्देश नहीं दिया, जो राज्य को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मिलनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, 'हमें पानी की एक तय मात्रा मिलनी चाहिए, जो दुर्भाग्य से नहीं मिल रही है।'

CWMA बैठक और तमिलनाडु की रणनीति

वरिष्ठ अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि CWMA की बैठक सोमवार और मंगलवार को निर्धारित है और तमिलनाडु प्राधिकरण के समक्ष अपनी शिकायत औपचारिक रूप से रखेगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कर्नाटक के कावेरी जलाशयों में इस समय लगभग 78 टीएमसी जल उपलब्ध है, इसलिए तमिलनाडु का निर्धारित हिस्सा देने में कोई तकनीकी बाधा नहीं है।

यह ऐसे समय में आया है जब कावेरी बेसिन में जल-बँटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच तनाव पुराना और गहरा है। गौरतलब है कि यह याचिका कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की 28 जुलाई को हुई 139वीं बैठक के निर्णय के बाद दायर की गई थी।

पृष्ठभूमि: CWRC और CWMA के निर्देश

CWRC की 139वीं बैठक में कावेरी बेसिन की हाइड्रोलॉजिकल और मौसम संबंधी स्थितियों की समीक्षा के बाद कर्नाटक को 29 जुलाई से 12 अगस्त तक 15 दिनों के लिए बिलिगुंड्लु में 3,500 क्यूसेक जल-प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। समिति ने कृष्णराज सागर (KRS) और काबिनी जलाशयों से जल-विसर्जन को नियंत्रित करने का भी आदेश दिया था।

इसके बाद CWMA ने 30 जुलाई को अपनी 54वीं आपातकालीन बैठक में बेसिन की स्थितियों की जाँच की और CWRC की सिफारिश का समर्थन किया। तमिलनाडु का कहना है कि इन निर्देशों के बावजूद कर्नाटक ने निर्धारित मात्रा में जल नहीं छोड़ा और हुई कमी की भरपाई भी नहीं की।

न्यायालय का आदेश और आगे की राह

सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की अगली तारीख 31 अगस्त निर्धारित की और स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष उस तिथि तक जल-विसर्जन की नवीनतम स्थिति न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। अब सभी की निगाहें CWMA की बैठक के परिणाम और 31 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि दोनों राज्यों के बीच इस सदाबहार विवाद में अगला कदम क्या होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक न्यायालय की भूमिका मध्यस्थ से आगे नहीं बढ़ पाएगी।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कावेरी जल विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त को क्या फैसला दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत करने की अनुमति दी और मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त के लिए निर्धारित की। दोनों पक्ष उस तिथि तक जल-विसर्जन की नवीनतम स्थिति न्यायालय को बताएंगे।
तमिलनाडु की कर्नाटक से क्या शिकायत है?
तमिलनाडु का आरोप है कि कर्नाटक CWRC और CWMA के निर्देशों के बावजूद 26.954 टीएमसी कावेरी जल नहीं छोड़ रहा और पहले हुई कमी की भरपाई भी नहीं की गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने यह भी तर्क दिया कि कर्नाटक के जलाशयों में 78 टीएमसी पानी उपलब्ध है, इसलिए जल-विसर्जन में कोई तकनीकी बाधा नहीं है।
CWRC ने कर्नाटक को क्या निर्देश दिए थे?
कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) ने 28 जुलाई की 139वीं बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से 12 अगस्त तक 15 दिनों के लिए बिलिगुंड्लु में 3,500 क्यूसेक जल-प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। KRS और काबिनी जलाशयों से जल-विसर्जन को नियंत्रित करने का आदेश भी दिया गया था।
CWMA क्या है और इस विवाद में इसकी भूमिका क्या है?
कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) वह केंद्रीय निकाय है जो सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के आदेश के बाद कावेरी जल-बँटवारे की निगरानी करता है। CWMA ने 30 जुलाई को अपनी 54वीं आपातकालीन बैठक में CWRC की सिफारिशों का समर्थन किया था और अब तमिलनाडु इसी प्राधिकरण के समक्ष अपनी शिकायत रखेगा।
इस मामले में आगे क्या होगा?
CWMA की सोमवार-मंगलवार की बैठक में तमिलनाडु अपनी शिकायत रखेगा। इसके बाद 31 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होगी, जहाँ दोनों पक्ष जल-विसर्जन की ताज़ा स्थिति प्रस्तुत करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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