24 अगस्त 2026
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नकली-मिलावटी दवाओं पर योगी सरकार का बड़ा फैसला: लाइसेंस से सप्लाई चेन तक होगी कड़ी निगरानी

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नकली-मिलावटी दवाओं पर योगी सरकार का बड़ा फैसला: लाइसेंस से सप्लाई चेन तक होगी कड़ी निगरानी

सारांश

योगी सरकार ने नकली-मिलावटी दवाओं के खिलाफ अब तक की सबसे व्यापक SOP जारी की है — लाइसेंस से लेकर बिलिंग सॉफ्टवेयर, बैंक ट्रांजेक्शन और कोल्ड चेन तक हर कड़ी की जाँच होगी। गंभीर मामलों में BNS और NDPS के तहत भी FIR दर्ज होगी।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने 24 अगस्त 2026 को नकली, मिलावटी और नशीली दवाओं पर अंकुश के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए।
रोशन जैकब की ओर से जारी SOP में औषधि निरीक्षकों और अनुज्ञापन प्राधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई।
नए थोक लाइसेंस के लिए आवेदक की पृष्ठभूमि की गहन जाँच होगी; पूर्व दोषियों के परिजनों या डमी व्यक्तियों के नाम पर लाइसेंस नहीं मिलेगा।
कोडीन सिरप , पेन किलर , कैंसर ड्रग्स और NDPS श्रेणी की दवाओं पर विशेष निगरानी; बिलिंग सॉफ्टवेयर और बैंक ट्रांजेक्शन की भी जाँच होगी।
काउंटरफीट दवा की पुष्टि पर अधिकतम एक कार्य दिवस में लाइसेंस निलंबन; गंभीर मामलों में BNS, 2023 और NDPS के तहत संयुक्त FIR।
इंसुलिन और वैक्सीन जैसे कोल्ड चेन उत्पाद 2–8°C से बाहर मिले तो तत्काल अभिरक्षा में लिए जाएँगे।

उत्तर प्रदेश में नकली, अधोमानक, मिलावटी और नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 24 अगस्त 2026 को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब औषधि लाइसेंस जारी करने से लेकर दवाओं के भंडारण, बिलिंग और पूरी सप्लाई चेन तक कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि मरीजों तक केवल सुरक्षित और गुणवत्तापरक दवाएँ पहुँच सकें। गंभीर मामलों में कार्रवाई केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट तक सीमित न रहकर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और एनडीपीएस की सुसंगत धाराओं के तहत भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

एसओपी और जिम्मेदारियाँ

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में औषधि निरीक्षकों और अनुज्ञापन प्राधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय की गई है। नई व्यवस्था के तहत कोडीन सिरप, पेन किलर, फास्ट मूविंग एवं हाई वैल्यू दवाओं के साथ-साथ एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं पर विशेष नज़र रखी जाएगी। संदिग्ध दवाओं के मामलों में खरीद-बिक्री की पूरी शृंखला के साथ बैंक लेनदेन और डिजिटल अभिलेखों की भी बैक-ट्रैकिंग की जाएगी।

लाइसेंस प्रक्रिया में सख्ती

नए थोक औषधि लाइसेंस के लिए आवेदक और फर्म की पृष्ठभूमि का गहन सत्यापन अनिवार्य होगा। पूर्व में अवैध दवा कारोबार में संलिप्त रहे व्यक्तियों को पति-पत्नी, भाई-बहन, माता-पिता, अन्य सगे-संबंधियों या किसी डमी व्यक्ति के नाम पर नया लाइसेंस प्राप्त करने से रोका जाएगा। गंभीर उल्लंघनकर्ताओं को लाइसेंस प्राप्त करने से डिबार किया जाएगा और उनके व्यावसायिक साझेदारों की भूमिका की भी जाँच होगी।

आवासीय क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठानों को औषधि विक्रय लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। भौतिक निरीक्षण में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लाइसेंस माँगे गए स्थान का उपयोग वास्तव में व्यावसायिक गतिविधि के लिए हो रहा है। यदि लाइसेंस किसी महिला या अन्य व्यक्ति के नाम पर लेकर कारोबार कोई और चला रहा हो, तो लाइसेंस के निलंबन, निरस्तीकरण और अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी।

स्टॉक और बिलिंग की जाँच

डायबिटीज, हाइपरटेंशन, एंटीबायोटिक्स, कैंसर ड्रग्स और पेन किलर जैसी फास्ट मूविंग व हाई वैल्यू दवाओं के लेजर स्टॉक और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया जाएगा। एक ही फर्म से माल खरीदकर उसी को वापस बेचने, असामान्य रूप से कम कीमत पर दवा बेचने, क्रॉस बिलिंग या केवल कागजों पर स्टॉक एडजस्टमेंट जैसी गतिविधियाँ मिलने पर जाँच निर्माता स्तर तक पहुँचेगी। दूसरे राज्यों से आने वाली संदिग्ध दवाओं के मामले में संबंधित राज्य के औषधि निरीक्षकों के माध्यम से निर्माता और सप्लायर का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा।

बिलिंग सॉफ्टवेयर की भी जाँच होगी — माइनस स्टॉक, बैक-डेटेड बिलिंग, डेटा डिलीट करने, दोहरे खाते रखने या वास्तविक स्टॉक छिपाने जैसी गतिविधियों को गंभीरता से लिया जाएगा।

छापेमारी और साक्ष्य संग्रह

छापेमारी के दौरान सीसीटीवी डीवीआर, ई-वे बिल, ट्रांसपोर्ट रसीद, ब्लिस्टर पैक पर दर्ज बैच और मुहर की तस्वीरें, संबंधित लोगों के बयान तथा अन्य डिजिटल अभिलेखों को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित करना अनिवार्य होगा। इंसुलिन और वैक्सीन जैसे कोल्ड चेन उत्पाद यदि निर्धारित 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान के बजाय सामान्य तापमान पर रखे मिले तो उन्हें भी अभिरक्षा में लेकर कार्रवाई होगी।

काउंटरफीट या स्प्यूरियस दवा की पुष्टि होने पर उसकी बिक्री और वितरण तत्काल रोका जाएगा तथा स्टॉक सीज करने के साथ लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण की कार्रवाई होगी। यह आदेश अधिकतम एक कार्य दिवस में लाइसेंसी को तामील कराना होगा। FSDA ने सभी औषधि निरीक्षकों को SOP के प्रत्येक बिंदु का अक्षरशः पालन करने और जाँच में अनावश्यक विलंब न करने के निर्देश दिए हैं।

आगे क्या होगा

नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल संदिग्ध स्टॉक पकड़ना नहीं, बल्कि नकली और अवैध दवाओं की पूरी सप्लाई चेन और उसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका उजागर करना है। यदि जाँच में संगठित नेटवर्क या अपराध की पुष्टि होती है तो BNS, 2023 और NDPS की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इस कदम से उत्तर प्रदेश में दवा उद्योग की पारदर्शिता और जवाबदेही में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — राज्य में औषधि निरीक्षकों की संख्या और कार्यभार को देखते हुए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मौजूदा जनशक्ति इतने विस्तृत सत्यापन के लिए पर्याप्त है। BNS और NDPS धाराओं को जोड़ना एक सख्त संकेत है, लेकिन पिछले वर्षों में भी ऐसी घोषणाएँ होती रही हैं जिनका अनुसरण छिटपुट छापेमारी तक सिमट गया। डमी लाइसेंस और क्रॉस बिलिंग नेटवर्क पर फोकस सराहनीय है, परंतु बिना स्वतंत्र ऑडिट और सार्वजनिक डेटा प्रकाशन के, जवाबदेही की कमी बनी रहेगी।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगी सरकार ने नकली दवाओं पर क्या नई व्यवस्था लागू की है?
योगी सरकार ने 24 अगस्त 2026 को FSDA के माध्यम से एक विस्तृत SOP जारी की है, जिसमें औषधि लाइसेंस जारी करने से लेकर भंडारण, बिलिंग और पूरी सप्लाई चेन तक कड़ी निगरानी का प्रावधान है। गंभीर मामलों में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के साथ BNS, 2023 और NDPS की धाराओं में भी FIR दर्ज होगी।
नए औषधि लाइसेंस के लिए क्या सख्त नियम बनाए गए हैं?
नए थोक औषधि लाइसेंस के लिए आवेदक और फर्म की पृष्ठभूमि का गहन सत्यापन अनिवार्य होगा। पूर्व में अवैध दवा कारोबार में संलिप्त रहे व्यक्तियों के परिजनों या डमी व्यक्तियों के नाम पर लाइसेंस नहीं मिलेगा, और आवासीय क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठानों को भी लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।
काउंटरफीट दवा पकड़े जाने पर क्या कार्रवाई होगी?
काउंटरफीट या स्प्यूरियस दवा की पुष्टि होने पर उसकी बिक्री तत्काल रोकी जाएगी और स्टॉक सीज किया जाएगा। लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण का आदेश अधिकतम एक कार्य दिवस में तामील कराना होगा, और राजकीय विश्लेषक की रिपोर्ट से पुष्टि होने पर BNS व NDPS की धाराओं में संयुक्त FIR दर्ज होगी।
किन दवाओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी?
कोडीन सिरप, पेन किलर, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, एंटीबायोटिक्स, कैंसर ड्रग्स और NDPS श्रेणी की दवाओं पर विशेष नज़र रखी जाएगी। इंसुलिन और वैक्सीन जैसे कोल्ड चेन उत्पाद यदि निर्धारित 2 से 8 डिग्री सेल्सियस से बाहर मिले तो उन्हें भी तत्काल अभिरक्षा में लिया जाएगा।
सप्लाई चेन में गड़बड़ी पकड़ने के लिए क्या तरीके अपनाए जाएँगे?
छापेमारी के दौरान CCTV DVR, ई-वे बिल, ट्रांसपोर्ट रसीद, बिलिंग सॉफ्टवेयर और बैंक ट्रांजेक्शन की बैक-ट्रैकिंग की जाएगी। क्रॉस बिलिंग, माइनस स्टॉक या बैक-डेटेड बिलिंग जैसी गतिविधियाँ मिलने पर जाँच निर्माता स्तर तक पहुँचेगी और अंतर-राज्यीय मामलों में संबंधित राज्य के औषधि निरीक्षकों से भौतिक सत्यापन कराया जाएगा।
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