10 अगस्त 2026
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आगरा में ₹3.63 करोड़ की नकली व एक्सपायर्ड दवाएं जब्त, FSDA ने 8 गोदाम सील कर 6 FIR दर्ज कीं

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आगरा में ₹3.63 करोड़ की नकली व एक्सपायर्ड दवाएं जब्त, FSDA ने 8 गोदाम सील कर 6 FIR दर्ज कीं

सारांश

आगरा में FSDA की अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी — ₹3.63 करोड़ की नकली, एक्सपायर्ड और सरकारी दवाएं जब्त, 8 गोदाम सील, 6 FIR दर्ज। 25 निरीक्षकों की टीम ने दो चरणों में 20 से अधिक फर्मों की तलाशी ली। आगरा को अवैध दवा नेटवर्क का प्रमुख ट्रांजिट हब बताया गया।

मुख्य बातें

FSDA ने आगरा में ₹3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की नकली, एक्सपायर्ड, फिजिशियन सैंपल और सरकारी आपूर्ति की दवाएं जब्त कीं।
8 अवैध गोदाम सील किए गए और 6 FIR दर्ज कर कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू।
25 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने 22–24 मई और 12–14 जून 2026 के बीच दो चरणों में अभियान चलाया।
20 से अधिक दवा फर्मों और 12 गोदामों की तलाशी; खत्री गली, संजय प्लेस, दयालबाग समेत प्रमुख बाज़ार केंद्रों में जाँच।
रोशन जैकब के अनुसार, नकली दवाओं का नेटवर्क कई राज्यों से जुड़ा है और आगरा इसका प्रमुख ट्रांजिट केंद्र है।
अभियान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जारी रहेगा।

उत्तर प्रदेश के आगरा में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने ₹3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की नकली, एक्सपायर्ड, फिजिशियन सैंपल और सरकारी आपूर्ति की दवाएं जब्त की हैं — जिसे विभाग की अब तक की सबसे बड़ी एकल कार्रवाई बताया जा रहा है। इस अभियान में 8 अवैध गोदाम सील किए गए और 6 प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कई आरोपियों के विरुद्ध विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अभियान का विस्तार और दायरा

FSDA मुख्यालय, लखनऊ द्वारा गठित 25 औषधि निरीक्षकों की विशेष टीमों ने 22 से 24 मई तथा 12 से 14 जून 2026 के बीच आगरा में दो चरणों में व्यापक प्रवर्तन अभियान चलाया। अभियान के दूसरे चरण का नेतृत्व स्वयं FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने किया।

जाँच के दायरे में खत्री गली, फव्वारा, संजय प्लेस, कमला नगर, झूलेलाल मार्केट और दयालबाग सहित प्रमुख दवा व्यापार केंद्र, गोदाम और आवासीय परिसर शामिल रहे। कुल 20 से अधिक दवा फर्मों और 12 गोदामों की तलाशी ली गई, जिनमें बड़े पैमाने पर फिजिशियन सैंपल, सरकारी अस्पतालों की दवाएं, डिफेंस सप्लाई की औषधियाँ, एक्सपायर्ड दवाएं तथा संदिग्ध नकली औषधियाँ बरामद हुईं।

आयुक्त की प्रतिक्रिया और चेतावनी

FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने कहा कि प्रदेशवासियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियाँ उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा माफिया, नकली दवा नेटवर्क और जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

डॉ. जैकब ने यह भी रेखांकित किया कि नकली दवाओं का यह नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है — इसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं, जहाँ से संदिग्ध औषधियाँ प्रदेश में प्रवेश करती हैं।

आगरा क्यों बना अवैध दवा कारोबार का केंद्र

आयुक्त के अनुसार, उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा औषधि बाज़ार है। यहाँ थोक और खुदरा दवा वितरण का सघन नेटवर्क, बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, दिल्ली से निकटता और विशाल उपभोक्ता आधार इसे अवैध कारोबारियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाते हैं।

आगरा इस नेटवर्क का एक प्रमुख ट्रांजिट और वितरण केंद्र बनकर उभरा है, जहाँ से दवाओं की खेप लखनऊ, कानपुर समेत प्रदेश के अन्य बड़े बाज़ारों तक पहुँचती है। यही कारण है कि FSDA पिछले कुछ समय से आगरा पर विशेष निगरानी रखते हुए सूचनाएं एकत्र कर रहा था और सुनियोजित रणनीति के तहत यह अभियान चलाया गया।

योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का संदर्भ

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के अंतर्गत की गई है, जिसके तहत नकली दवाओं, फिजिशियन सैंपल्स की अवैध बिक्री और सरकारी आपूर्ति की औषधियों की कालाबाज़ारी के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चल रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नकली दवाओं को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चिंता जता रहे हैं।

आगे क्या होगा

FSDA के अनुसार, दर्ज FIR के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है। जब्त दवाओं के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं और जाँच के नतीजों के आधार पर अन्य राज्यों में भी समन्वित कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विभाग ने संकेत दिया है कि आगरा के बाद प्रदेश के अन्य प्रमुख दवा बाज़ारों को भी इस अभियान के दायरे में लाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ये दवाएं सरकारी अस्पतालों और डिफेंस सप्लाई चेन से बाज़ार तक कैसे पहुँचीं — यह चूक आपूर्ति श्रृंखला में गहरी संरचनात्मक खामी की ओर इशारा करती है। FSDA का यह स्वीकारना कि आगरा 'ट्रांजिट हब' बन चुका है, दर्शाता है कि यह समस्या छिटपुट नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित है। जब तक सरकारी खरीद और वितरण प्रणाली में रियल-टाइम ट्रैकिंग और जवाबदेही तय नहीं होती, ऐसी छापेमारियाँ नेटवर्क की जड़ों को नहीं काट सकतीं — केवल उसकी शाखाएं छाँटती रहेंगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आगरा में FSDA की कार्रवाई में क्या जब्त किया गया?
FSDA ने आगरा में ₹3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की नकली, एक्सपायर्ड, फिजिशियन सैंपल और सरकारी आपूर्ति की दवाएं जब्त कीं। इसके साथ ही डिफेंस सप्लाई की औषधियाँ भी बरामद हुईं।
FSDA का यह अभियान कब और कहाँ चलाया गया?
यह अभियान दो चरणों में — 22 से 24 मई और 12 से 14 जून 2026 के बीच — आगरा के खत्री गली, संजय प्लेस, कमला नगर, दयालबाग सहित प्रमुख दवा बाज़ारों में चलाया गया। 25 औषधि निरीक्षकों की विशेष टीमों ने 20 से अधिक फर्मों और 12 गोदामों की जाँच की।
इस मामले में अब तक कितनी FIR दर्ज हुई हैं?
अब तक 6 FIR दर्ज की गई हैं और 8 अवैध गोदाम सील किए गए हैं। कई आरोपियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
आगरा को नकली दवाओं का ट्रांजिट हब क्यों माना जा रहा है?
FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के अनुसार, आगरा की दिल्ली से निकटता, बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी और मजबूत थोक वितरण नेटवर्क इसे अवैध कारोबारियों के लिए आकर्षक बनाते हैं। यहाँ से दवाओं की खेप लखनऊ, कानपुर और प्रदेश के अन्य बड़े बाज़ारों तक पहुँचाई जाती है।
क्या यह अभियान आगे भी जारी रहेगा?
हाँ, FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने स्पष्ट किया है कि दवा माफिया और नकली दवा नेटवर्क के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। जब्त दवाओं के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं और अन्य राज्यों में भी समन्वित कार्रवाई की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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