लखनऊ में ANTF-FSDA की छापेमारी: 9.60 लाख नशीली गोलियाँ बरामद, 6 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर में 4 सितंबर 2026 को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की लखनऊ यूनिट और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की संयुक्त टीम ने नशीली दवाओं के एक बड़े संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में 228 किलोग्राम से अधिक प्रतिबंधित दवाएं जब्त की गईं और छह आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21/22/29 के तहत गिरफ्तार किया गया।
बरामदगी का विवरण
टीम ने मकान संख्या S-363/364 पर छापा मारकर 9.60 लाख एल्जोमैक-0.5 (एल्प्राजोलाम) टैबलेट, 1.20 लाख स्पैसमोनाम प्लस (ट्रामाडोल HCL) कैप्सूल और कोडीन युक्त ओनेरेक्स 100 ML कफ सिरप की 720 बोतलें बरामद कीं। इसके अलावा सात मोबाइल फोन और ₹11,140 नकद भी जब्त किए गए। FSDA के औषधि निरीक्षकों ने तीनों दवाओं के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए लिए।
मुख्य घटनाक्रम
ANTF को सूचना मिली थी कि 3 सितंबर को ट्रांसपोर्ट नगर में नशीली दवाओं की बड़ी खेप की डिलीवरी होने वाली है। निगरानी के दौरान तीन व्यक्ति — किशन वासवानी, समीर अहमद और शाद इरशाद — कार्टूनों को बोरियों में छिपाते हुए पाए गए। तलाशी में उनके कब्जे से प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुईं। पूछताछ में किशन और समीर ने बताया कि दवाएं कन्हैया फार्मा के संचालक उमेश कुमार से ली गई थीं।
नेटवर्क की परतें
जांच के दौरान उमेश कुमार और सतेन्द्र सिंह को भी पकड़ा गया। अधिकारियों के अनुसार, उमेश कुमार कथित तौर पर सतेन्द्र सिंह की फर्म के दस्तावेजों का उपयोग नशीली दवाओं की बिलिंग के लिए करता था और बदले में सतेन्द्र को कमीशन दिया जाता था। FSDA की जांच में कन्हैया फार्मा के परिसर में प्रॉक्सीमेक-SPAS कैप्सूल के 1,116 डिब्बों सहित सात प्रकार की दवाओं का अवैध भंडारण मिला। फर्म क्रय-विक्रय के पूर्ण अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिसके बाद कन्हैया फार्मा को सील कर दिया गया।
शाद इरशाद की पूछताछ में विशाल चौरसिया का नाम सामने आया। विशाल ने शाद को नशीली दवाएं आपूर्ति करने की बात स्वीकार की। उसने यह भी बताया कि पूर्व में कोडीन से जुड़े एक मामले में अमीनाबाद थाने में FIR दर्ज होने के बाद उसका दवा लाइसेंस निरस्त हो चुका था, जिसके बाद वह अन्य फर्मों के माध्यम से यह कारोबार कर रहा था। विशाल ने बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप बृजेश वर्मा से खरीदने की बात भी बताई।
कानूनी कार्रवाई
ANTF के अनुसार सभी छह आरोपी — किशन वासवानी, समीर अहमद, शाद इरशाद, उमेश कुमार, सतेन्द्र सिंह और विशाल चौरसिया — एक संगठित नशीले पदार्थ तस्करी नेटवर्क का हिस्सा पाए गए हैं। बरामद दवाओं का नियमानुसार न्यायालय के समक्ष नमूनाकरण कराया जाएगा। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से की गई।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के विरुद्ध अभियान तेज कर रही है। गौरतलब है कि लाइसेंस रद्द होने के बाद भी विशाल चौरसिया जैसे तस्कर वैकल्पिक नेटवर्क के जरिए कारोबार जारी रखते हैं — यह नियामक ढाँचे की एक बड़ी खामी को उजागर करता है। बृजेश वर्मा की भूमिका की जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।