भाजपा की यूपी से विदाई तय, झूठ की एक्सपायरी डेट आई: सपा सांसद राजीव राय
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद राजीव राय ने 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार के झूठ की एक्सपायरी डेट आ चुकी है और आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की विदाई निश्चित है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार पर हमला बोला था।
सीएम योगी का मथुरा में बड़ा बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा में कहा कि सनातन को मिटाने की बात करने वाले खुद मिट्टी में मिल गए। उन्होंने अयोध्या और काशी की तर्ज पर मथुरा में भी भव्य धाम विकसित करने की बात कही और बताया कि इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक कर सरकार की प्राथमिकताएँ स्पष्ट की जा चुकी हैं।
योगी ने पिछली सरकारों पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें अपने वोट बैंक की चिंता में ब्रज क्षेत्र में आने से कतराती थीं। उन्होंने दावा किया कि पहले के कार्यकाल में जवाहरबाग जैसी घटनाएँ हुईं, जबकि अब ब्रज में रंगोत्सव और ब्रजराज उत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजन हो रहे हैं।
सपा सांसद की तीखी प्रतिक्रिया
सीएम योगी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा सांसद राजीव राय ने कहा कि भाजपा दहशत में है और उसे सपने में भी अखिलेश यादव दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'चिराग बुझने से पहले फड़फड़ाता है और भाजपा की स्थिति भी ऐसी ही हो गई है।'
शुद्धिकरण विवाद और दलित आत्मसम्मान
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुए कथित शुद्धिकरण विवाद के नैनीताल उच्च न्यायालय पहुँचने पर राजीव राय ने इसे दलित समाज के आत्मसम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद किसी राष्ट्रीय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के किसी स्थान पर जाने के बाद शुद्धिकरण कराया जाना एक विशेष मानसिकता और अहंकार को दर्शाता है।
राय ने दलित समाज से आह्वान किया कि वे इस मामले का संज्ञान लें और अपने आत्मसम्मान के लिए इसका राजनीतिक जवाब दें।
रोज़गार पर सरकार पर निशाना
सपा सांसद ने केंद्र सरकार पर युवाओं के साथ छल का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने युवाओं को रोज़गार के सपने दिखाए, लेकिन जब उन्होंने संसद में रोज़गार से संबंधित सवाल उठाए तो सरकार की ओर से कथित तौर पर फर्जी आँकड़े पेश किए गए। राय ने दावा किया कि विपक्षी दल देश के छात्रों और युवाओं के साथ मज़बूती से खड़े हैं।
आगे क्या
उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। गौरतलब है कि राजनीतिक तापमान पहले से ही बढ़ा हुआ है — सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी सपा दोनों ही जनता के बीच अपनी-अपनी कथा स्थापित करने में जुटी हैं। शुद्धिकरण विवाद और रोज़गार के आँकड़ों का मुद्दा आने वाले महीनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बने रहने की संभावना है।