सपा-कांग्रेस गठबंधन पर केशव मौर्य का पलटवार: '2027 और 2029 में भाजपा की जीत तय'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 14 जुलाई को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच चल रही आपसी खींचतान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों की आंतरिक कलह से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और 2027 के विधानसभा चुनाव तथा 2029 के लोकसभा चुनाव में BJP की जीत सुनिश्चित है।
गठबंधन की कलह पर BJP का रुख
मौर्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'कांग्रेस और सपा आपस में लड़ें या न लड़ें, भाजपा की सेहत पर इससे कोई असर नहीं पड़ता। हर हाल में भाजपा की विजय सुनिश्चित है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 2027 में उत्तर प्रदेश में तीसरी बार और 2029 में देश में चौथी बार BJP की सरकार बनना तय है। उनके अनुसार, विपक्षी एकता हो या न हो, BJP के लिए यह कोई निर्णायक कारक नहीं है।
राम जन्मभूमि विवाद और अखिलेश यादव पर निशाना
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयानों के विरोध में प्रदेशभर में पोस्टर लगाए जाने के सवाल पर मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव का पूरा परिवार राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का विरोधी रहा है। उन्होंने कहा, 'राम भक्तों की हत्या के मामले में न तो राम भक्त माफ कर सकते हैं, न कारसेवक माफ कर सकते हैं और न साधु-संत माफ कर सकते हैं।' मौर्य ने अखिलेश यादव को सलाह दी कि वे राम जन्मभूमि मामले में बयानबाजी बंद करें और अपनी पार्टी को बचाने पर ध्यान दें।
वन नेशन वन इलेक्शन पर समर्थन
मौर्य ने 'एक देश एक चुनाव' के विचार का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद शुरुआत में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे, लेकिन कांग्रेस की नीतियों के कारण चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे। उनके अनुसार, इससे विकास के लिए निर्धारित धनराशि चुनावी खर्चों में खप जाती है, जो देश की प्रगति को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वन नेशन वन इलेक्शन' के विजन का BJP पूर्ण स्वागत और समर्थन करती है।
राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की स्थिति को लेकर अटकलें तेज हैं। आलोचकों का कहना है कि BJP का यह आत्मविश्वास विपक्षी एकता की कमज़ोरियों को भुनाने की रणनीति का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी दलों की सियासी सरगर्मी बढ़ती जा रही है।