केशव मौर्य का अखिलेश पर हमला: बिहार-बंगाल में BJP की जीत से सपा का भविष्य धूमिल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 15 जून 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक जीत ने अखिलेश यादव की बेचैनी बढ़ा दी है। मौर्य के अनुसार, इस हार के बाद सपा प्रमुख को उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी का भविष्य धूमिल नज़र आने लगा है।
एक्स पर क्या लिखा केशव मौर्य ने
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि बिहार में राजद और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की करारी शिकस्त तथा BJP की ऐतिहासिक जीत ने अखिलेश यादव की परेशानी बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख इतने निराश और हताश हो चुके हैं कि उन्हें उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी का भविष्य अंधकारमय लगने लगा है, जिसके चलते वे गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी कर धमकी की राजनीति पर उतर आए हैं।
लोकतंत्र और संविधान का हवाला
मौर्य ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि भारत के मूल में लोकतंत्र है और यहाँ चुनाव किसी दल की इच्छा से नहीं, बल्कि संविधान के अनुसार हर पाँच साल में होते हैं। उन्होंने कहा कि जनता ही अंतिम निर्णायक है। उनके अनुसार, 2047 के विकसित भारत के संकल्प के साथ BJP का कमल लगातार खिलता रहेगा, जबकि नकारात्मकता और हताशा की राजनीति सपा को और कमज़ोर करती रहेगी।
राहुल गांधी पर भी निशाना
इससे पहले एक अन्य एक्स पोस्ट में मौर्य ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी 2029 के लिए काल्पनिक सपने देख रहे हैं, जबकि देश 2047 के विकसित भारत के संकल्प के साथ तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मौर्य ने कहा कि जनता परिवारवाद, तुष्टिकरण और खोखले वादों की राजनीति की असलियत पहचान चुकी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मज़बूत नेतृत्व पर अपना विश्वास बार-बार जताया है।
सपा और कांग्रेस की स्थिति पर तंज
मौर्य ने तंज कसते हुए कहा कि आज कांग्रेस अपनी खोई हुई राजनीतिक ज़मीन तलाश रही है और सपा उत्तर प्रदेश में अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। उनके अनुसार, जनता के बीच इन दोनों दलों की पकड़ इतनी कमज़ोर हो चुकी है कि इनका सत्ता की बात करना बिल्कुल वैसा है, जैसे कोई बिना पतवार की टूटी नाव पर बैठकर समंदर जीतने का भ्रम पाले। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं।