राम मंदिर चढ़ावा विवाद: केशव प्रसाद मौर्य बोले — सपा राज में रामभक्तों पर चली थीं गोलियां, अखिलेश बंद करें भ्रामक बयानबाजी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 5 जुलाई 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट — दोनों स्तरों पर निष्पक्ष रूप से जारी है और इसमें कुछ भी छिपाया नहीं जा रहा। उन्होंने अखिलेश पर तथ्यों की अनदेखी कर 'ओछी राजनीति' करने का आरोप लगाया।
मौर्य का एक्स पर सीधा हमला
उपमुख्यमंत्री मौर्य ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 'श्रीराम मंदिर पर भ्रामक और मनगढ़ंत बयानबाजी करने से बाज नहीं आ रहे।' उन्होंने स्पष्ट किया — 'प्रभु श्रीराम के नाम पर राजनीति नहीं, बल्कि सत्यनिष्ठा और जवाबदेही की जरूरत है।' मौर्य ने सपा के शासनकाल का हवाला देते हुए कहा कि उस दौर में 'निहत्थे रामभक्तों का खून बहा था' और सपा को यह इतिहास याद रखना चाहिए।
अखिलेश यादव ने क्या कहा था
इससे पहले अखिलेश यादव ने अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मंदिर प्रबंधन को घेरा था। उन्होंने कहा था कि यह मामला 'पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है' और इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है। अखिलेश ने एआई-निर्मित वीडियो साझा करते हुए 'क्या फिर से चले गए वनवास?' लिखकर सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाए थे।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर
अखिलेश के उस पोस्ट के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया। विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी इस विषय पर प्रतिक्रियाएं दी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर का मुद्दा राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है और कोई भी पक्ष इस पर कमजोर नहीं दिखना चाहता।
जांच की स्थिति
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि चढ़ावे से जुड़े मामले में जांच प्रक्रिया सक्रिय रूप से चल रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से भी इसमें सहयोग का आश्वासन दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के नतीजे सामने आने पर पारदर्शी तरीके से जानकारी साझा की जाएगी।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह विवाद उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों की पृष्ठभूमि में और अधिक तूल पकड़ सकता है। सपा और BJP दोनों के लिए राम मंदिर एक भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दा है, और दोनों पक्ष इस पर अपनी-अपनी कथा स्थापित करने की कोशिश में हैं। जांच के निष्कर्ष इस राजनीतिक बहस की दिशा तय करेंगे।