19 अगस्त 2026
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केरल हाईकोर्ट का निर्देश: वक्फ बोर्ड की 3 रिक्तियां छह सप्ताह में भरे सरकार, गठन विवाद पर फैसला टला

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केरल हाईकोर्ट का निर्देश: वक्फ बोर्ड की 3 रिक्तियां छह सप्ताह में भरे सरकार, गठन विवाद पर फैसला टला

सारांश

केरल हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड की तीन रिक्तियां छह सप्ताह में भरने का आदेश दिया, लेकिन संशोधित वक्फ कानून के तहत बोर्ड के गठन पर जारी कानूनी लड़ाई अभी बाकी है। गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनुपस्थिति और मुनंबम भूमि विवाद इस मामले को और पेचीदा बनाते हैं।

मुख्य बातें

केरल हाईकोर्ट ने 19 अगस्त को राज्य सरकार को केरल वक्फ बोर्ड की 3 रिक्तियां छह सप्ताह में भरने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति वी.एम.
श्याम कुमार की पीठ ने बोर्ड के गठन विवाद पर इस चरण में कोई फैसला नहीं सुनाया।
याचिकाओं में संशोधित वक्फ कानून की धारा 14(1) के तहत गैर-मुस्लिम सदस्यों और शिया, बोहरा, आगा खानी समुदायों के प्रतिनिधियों को न शामिल करने का आरोप है।
ACTS ने विवादित मुनंबम भूमि का विवरण उम्मीद पोर्टल पर अपलोड किए जाने को भी चुनौती दी है।
भाजपा नेता शोन जॉर्ज ने दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की तत्काल नियुक्ति की मांग की है।
अगली सुनवाई में सरकार को रिक्त पदों पर की गई कार्रवाई का ब्यौरा देना होगा।

केरल हाईकोर्ट ने बुधवार, 19 अगस्त को राज्य सरकार को केरल राज्य वक्फ बोर्ड में लंबित तीन रिक्त पदों को छह सप्ताह के भीतर भरने का स्पष्ट निर्देश दिया। हालांकि, संशोधित वक्फ कानून के अंतर्गत बोर्ड के मौजूदा गठन को चुनौती देने वाली व्यापक कानूनी याचिकाओं पर अदालत ने इस चरण में कोई निर्णय नहीं सुनाया।

अदालत की मुख्य टिप्पणियां

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति वी.एम. श्याम कुमार की खंडपीठ ने महाधिवक्ता के. जाजू बाबू की उस दलील को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें उन्होंने बताया कि सरकार ने संशोधित कानून के अनुरूप रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पहले ही आरंभ कर दी है। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिक चिंता वक्फ बोर्ड के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करना है, न कि इस स्तर पर कथित वैधानिक उल्लंघन की जांच करना।

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि उसके अंतरिम आदेश ने मौजूदा बोर्ड के कामकाज पर कोई रोक नहीं लगाई है और बोर्ड के पुनर्गठन की आवश्यकता पर इस चरण में विचार नहीं किया जाएगा।

याचिकाओं में उठाए गए मुद्दे

यह मामला कई जनहित याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का मुख्य आरोप है कि संशोधित वक्फ कानून के तहत अनिवार्य गैर-मुस्लिम सदस्यों तथा शिया, बोहरा और आगा खानी समुदायों के प्रतिनिधियों को बोर्ड में शामिल नहीं किया गया है।

ईसाई धर्मार्थ संगठन असेंबली ऑफ क्रिश्चियन ट्रस्ट सर्विसेज (ACTS) ने एक अलग याचिका दायर कर बोर्ड के गठन के साथ-साथ विवादित मुनंबम भूमि का विवरण केंद्र के उम्मीद पोर्टल पर अपलोड किए जाने को भी चुनौती दी है। संगठन का तर्क है कि वक्फ कानून के अनुसार यह प्रक्रिया मुतवल्ली के माध्यम से होनी चाहिए और इस कदम से क्षेत्र के हिंदू व ईसाई परिवार प्रभावित होते हैं।

भाजपा नेता शोन जॉर्ज ने एक अन्य जनहित याचिका में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की तत्काल नियुक्ति की मांग की है और यह घोषित करने का आग्रह किया है कि बोर्ड संशोधित वक्फ कानून की धारा 14(1) का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रहा है। याचिकाओं में माकपा नेता और पूर्व विधायक कुन्हम्मद कुट्टी मास्टर को बोर्ड में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

पिछली सुनवाई का संदर्भ

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि राज्य सरकार को बोर्ड के पुनर्गठन से रोकने वाला कोई आदेश नहीं है और वह कानून के तहत अनिवार्य गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति कर सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब संशोधित वक्फ कानून देशभर में कई राज्यों में कानूनी और राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है।

आगे क्या होगा

अब केरल सरकार के पास छह सप्ताह का समय है, जिसमें उसे तीनों रिक्त पदों को भरना होगा और अगली सुनवाई में उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। अगली सुनवाई बोर्ड के गठन से जुड़ी कानूनी चुनौतियों की दिशा तय करने के लिहाज से निर्णायक हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल — संशोधित वक्फ कानून के अनुपालन और बोर्ड के वैध गठन का — अभी अनुत्तरित है। गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनुपस्थिति और मुनंबम भूमि विवाद जैसे मुद्दे इस मामले को महज प्रशासनिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और सामुदायिक स्तर पर संवेदनशील बनाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब संशोधित वक्फ कानून कई राज्यों में अदालती चुनौतियों का सामना कर रहा है। अगली सुनवाई तय करेगी कि केरल सरकार की 'प्रक्रिया शुरू करने' की दलील कागज़ी है या ज़मीनी।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड को लेकर क्या आदेश दिया?
केरल हाईकोर्ट ने 19 अगस्त को राज्य सरकार को केरल वक्फ बोर्ड की तीन रिक्तियां छह सप्ताह के भीतर भरने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा बोर्ड के कामकाज पर कोई रोक नहीं है।
केरल वक्फ बोर्ड के गठन पर विवाद क्यों है?
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि संशोधित वक्फ कानून की धारा 14(1) के तहत अनिवार्य गैर-मुस्लिम सदस्यों और शिया, बोहरा व आगा खानी समुदायों के प्रतिनिधियों को बोर्ड में शामिल नहीं किया गया। भाजपा नेता शोन जॉर्ज सहित कई याचिकाकर्ताओं ने इसे वैधानिक उल्लंघन करार दिया है।
मुनंबम भूमि विवाद इस मामले से कैसे जुड़ा है?
ACTS ने याचिका में आरोप लगाया है कि विवादित मुनंबम भूमि का विवरण केंद्र के उम्मीद पोर्टल पर अपलोड किया गया, जिससे क्षेत्र के हिंदू और ईसाई परिवार प्रभावित होते हैं। संगठन का तर्क है कि यह प्रक्रिया वक्फ कानून के अनुसार मुतवल्ली के माध्यम से होनी चाहिए थी।
अगली सुनवाई में क्या होगा?
अगली सुनवाई में केरल सरकार को तीन रिक्त पदों को भरने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। उसके बाद अदालत बोर्ड के गठन से जुड़ी व्यापक कानूनी चुनौतियों के गुण-दोष पर विचार कर सकती है।
क्या केरल सरकार ने वक्फ बोर्ड रिक्तियां भरने की प्रक्रिया शुरू की है?
महाधिवक्ता के. जाजू बाबू ने अदालत को बताया कि सरकार ने संशोधित कानून के अनुरूप रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। हालांकि, अदालत ने इस दावे की पुष्टि के लिए छह सप्ताह का समय निर्धारित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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