30 जुलाई 2026
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केरल हाई कोर्ट का सख्त सवाल: ₹600 करोड़ घोटाले के आरोपी अधिकारी को 3 सरकारी संस्थानों की कमान कैसे?

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केरल हाई कोर्ट का सख्त सवाल: ₹600 करोड़ घोटाले के आरोपी अधिकारी को 3 सरकारी संस्थानों की कमान कैसे?

सारांश

केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सीधा सवाल पूछा — ₹600 करोड़ के कथित काजू घोटाले में सीबीआई के मुख्य आरोपी डॉ. के.ए. रतीश को एक साथ तीन सरकारी संस्थानों की कमान कैसे? अदालत ने चार हफ्ते में जवाब माँगा है।

मुख्य बातें

केरल हाई कोर्ट ने 30 जुलाई 2026 को राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
सीबीआई के मुख्य आरोपी डॉ.
रतीश फिलहाल 3 सरकारी संस्थानों — केरल खादी बोर्ड, केरल स्टेट रुड्रोनिक्स और केरल खादी वर्कर्स वेलफेयर फंड बोर्ड — के प्रमुख पद पर हैं।
मामला केरल राज्य काजू विकास निगम के कथित ₹600 करोड़ के आयात घोटाले से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, रतीश ने 11 वर्षों से अधिक समय तक अनिवार्य सतर्कता मंजूरी के बिना सार्वजनिक कंपनियों में MD पद संभाला।
बदहर की पीठ ने सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

केरल हाई कोर्ट ने 30 जुलाई 2026 को राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई, यह सवाल उठाते हुए कि केरल राज्य काजू विकास निगम के कथित ₹600 करोड़ के घोटाले में सीबीआई के मुख्य आरोपी वरिष्ठ नौकरशाह डॉ. के.ए. रतीश को एक साथ तीन महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थानों का प्रमुख कैसे बनाए रखा जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मुकदमा लंबित रहते हुए ऐसी नियुक्तियाँ गंभीर चिंता का विषय हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

सामाजिक कार्यकर्ता के.एम. शाहजहाँ की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस ए. बदहर की पीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। यह मामला काजू विकास निगम के प्रबंध निदेशक रहते डॉ. रतीश के कार्यकाल में काजू आयात में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसकी जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है।

अदालत की तीखी टिप्पणियाँ

पीठ ने मौखिक रूप से कहा, 'क्या सरकार ने भ्रष्टाचार के इतने बड़े आरोपी को तीन महत्वपूर्ण संस्थानों का प्रमुख नियुक्त किया है?' अदालत ने यह भी जोड़ा कि इन पदों पर भ्रष्टाचार की 'काफी गुंजाइश' है। डॉ. रतीश फिलहाल केरल खादी बोर्ड के सचिव, केरल स्टेट रुड्रोनिक्स के प्रबंध निदेशक और केरल खादी वर्कर्स वेलफेयर फंड बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर एक साथ कार्यरत हैं।

याचिका में उठाए गए आरोप

याचिका के अनुसार, सरकार से मुकदमा चलाने की अनुमति मिलने के बाद भी डॉ. रतीश को इन पदों से नहीं हटाया गया। इसके अलावा, यह भी आरोप है कि उन्होंने कंपनीज एक्ट के प्रावधानों के विरुद्ध, अनिवार्य सतर्कता मंजूरी प्राप्त किए बिना, 11 वर्षों से अधिक समय तक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य किया। सरकारी कंपनियों में उनके कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के अन्य आरोप भी लगे हैं।

सरकार पर बढ़ता दबाव

गौरतलब है कि यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब अलग-अलग सरकारों द्वारा बार-बार अदालती हस्तक्षेप के बावजूद डॉ. रतीश को सार्वजनिक क्षेत्र के अहम पदों पर बनाए रखने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह प्रकरण केरल में जवाबदेही तंत्र की कमज़ोरी को उजागर करता है।

आगे क्या होगा

हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब सरकार को चार सप्ताह में यह स्पष्ट करना होगा कि केरल के सबसे बड़े कथित भ्रष्टाचार मामलों में से एक के आरोपी अधिकारी को सार्वजनिक धन से जुड़े संवेदनशील पदों पर बनाए रखना किस आधार पर उचित था। डॉ. रतीश की नियुक्तियों पर अब न्यायिक समीक्षा और भी गहरी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केरल में सार्वजनिक जवाबदेही की व्यापक विफलता का प्रतीक है। सीबीआई मुकदमे की अनुमति मिलने के बाद भी किसी आरोपी को एक साथ तीन संवेदनशील पदों पर बनाए रखना यह संकेत देता है कि प्रशासनिक नियुक्तियाँ कानूनी जोखिम से परे राजनीतिक संरक्षण पर टिकी हैं। अदालत का हस्तक्षेप ज़रूरी था, लेकिन असली सवाल यह है कि यह नौबत आई क्यों — और क्या सरकार का चार हफ्ते का जवाब महज औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाई कोर्ट ने किस मामले में सरकार को फटकार लगाई?
केरल हाई कोर्ट ने उस मामले में सरकार को फटकार लगाई जिसमें केरल राज्य काजू विकास निगम के कथित ₹600 करोड़ के घोटाले में सीबीआई के मुख्य आरोपी डॉ. के.ए. रतीश को तीन महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर बनाए रखा गया था। अदालत ने सरकार से चार सप्ताह में जवाब माँगा है।
डॉ. के.ए. रतीश फिलहाल किन पदों पर हैं?
डॉ. के.ए. रतीश अभी केरल खादी बोर्ड के सचिव, केरल स्टेट रुड्रोनिक्स के प्रबंध निदेशक और केरल खादी वर्कर्स वेलफेयर फंड बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी — तीनों पदों पर एक साथ कार्यरत हैं। यह सभी पद सार्वजनिक धन और सरकारी संस्थाओं से जुड़े हैं।
काजू विकास निगम घोटाला क्या है?
यह मामला केरल राज्य काजू विकास निगम में काजू आयात में कथित ₹600 करोड़ की अनियमितताओं से जुड़ा है, जो डॉ. रतीश के निगम के प्रबंध निदेशक रहते हुए हुई बताई जाती हैं। इस मामले की जाँच सीबीआई कर रही है और सरकार से मुकदमा चलाने की अनुमति भी मिल चुकी है।
याचिकाकर्ता ने रतीश पर क्या अतिरिक्त आरोप लगाए हैं?
याचिका के अनुसार, डॉ. रतीश ने कंपनीज एक्ट के प्रावधानों के विरुद्ध, अनिवार्य सतर्कता मंजूरी के बिना 11 वर्षों से अधिक समय तक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य किया। उन पर सरकारी कंपनियों में कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के अन्य आरोप भी लगे हैं।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
जस्टिस ए. बदहर की पीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद अदालत डॉ. रतीश की नियुक्तियों की वैधता पर न्यायिक समीक्षा करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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