केरल PSC भर्ती घोटाला: क्राइम ब्रांच SIT जांच में KPSC का सहयोग का आश्वासन, 25 जुलाई तक रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) ने 13 जुलाई को स्पष्ट किया कि वह भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं की जाँच कर रही क्राइम ब्रांच की विशेष जाँच टीम (SIT) के साथ पूरा सहयोग करेगा। आयोग ने कहा कि कानूनी प्रावधानों के तहत जो भी दस्तावेज़ माँगे जाएंगे, वे जाँच एजेंसी को सौंप दिए जाएंगे।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की अध्यक्षता वाले राज्य मंत्रिमंडल द्वारा गठित इस SIT ने KPSC की संवैधानिक स्थिति और वैधानिक सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखते हुए सतर्क रुख अपनाया है। तुरंत आपराधिक मामले दर्ज करने की बजाय टीम ने शिकायतों का सत्यापन, बयान दर्ज करना, भर्ती रिकॉर्ड की जाँच और चयन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ शुरू की है।
किन भर्तियों पर है आरोप
जाँच के पहले ही दिन SIT को एक दर्जन से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें केरल प्रशासनिक सेवा (KAS), योजना बोर्ड प्रमुख की नियुक्ति, पुलिस उपाधीक्षक विशेष भर्ती परीक्षा, अर्थशास्त्र और सांख्यिकी अनुसंधान अधिकारी परीक्षा और होटल प्रबंधन में सहायक प्रोफेसर पद की भर्ती में अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं।
SIT का विस्तार और नेतृत्व
सरकार ने SIT को विस्तारित कर आठ सदस्यीय बना दिया है। इसकी अध्यक्षता आईजी अजिता बेगम कर रही हैं, जबकि एडीजीपी एच. वेंकटेश समग्र देखरेख कर रहे हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट 25 जुलाई तक राज्य पुलिस प्रमुख को सौंपे जाने की उम्मीद है।
आंतरिक सतर्कता तंत्र पर सवाल
जाँच ने KPSC के अपने सतर्कता तंत्र पर भी ध्यान केंद्रित किया है, जिसका नेतृत्व एक पुलिस अधीक्षक करते हैं। यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या कथित अनियमितताओं को समय रहते पकड़ने के लिए आंतरिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त थे। गौरतलब है कि KPSC में अध्यक्ष सहित 16 सदस्य हैं, जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की सरकार के दौरान नियुक्त किया गया था।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह
फिलहाल आयोग में पाँच पद रिक्त हैं और मुख्यमंत्री सतीशन के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ने अभी तक नई नियुक्तियाँ नहीं की हैं। यह ऐसे समय में आया है जब KPSC की विश्वसनीयता पर सार्वजनिक बहस तेज़ हो रही है। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद ही यह तय होगा कि आगे आपराधिक मामले दर्ज होंगे या नहीं।