केरल पीएससी भर्ती घोटाला: एसआईटी ने जांच शुरू की, 25 जुलाई तक डीजीपी को प्रारंभिक रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) में कथित भर्ती अनियमितताओं की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने 11 जुलाई 2026 को तिरुवनंतपुरम में अपना काम व्यवस्थित ढंग से शुरू कर दिया है। टीम पीएससी के संवैधानिक दर्जे और अपनी कानूनी जांच-शक्तियों के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ रही है। 25 जुलाई तक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने की उम्मीद है।
एसआईटी गठन का पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बुधवार को एसआईटी बनाने का निर्णय लिया गया। गठन के पहले ही दिन टीम को 10 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें कई हाई-प्रोफाइल भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ी के गंभीर आरोप शामिल थे।
इन शिकायतों में केरल एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (केएएस), प्लानिंग बोर्ड प्रमुख की नियुक्ति, पुलिस उपाधीक्षक स्पेशल रिक्रूटमेंट परीक्षा, इकोनॉमिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स रिसर्च ऑफिसर परीक्षा और होटल मैनेजमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर पद की भर्तियों में अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं।
जांच का तरीका और कानूनी दायरा
एसआईटी ने तत्काल आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की बजाय चरणबद्ध जांच का रास्ता चुना है। टीम पहले शिकायतों की पुष्टि करेगी, शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज करेगी, भर्ती रिकॉर्ड की जाँच करेगी और चयन प्रक्रियाओं से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ करेगी।
यह दृष्टिकोण इसलिए अपनाया गया है क्योंकि पीएससी एक संवैधानिक संस्था है और उस पर सीधी आपराधिक कार्यवाही शुरू करने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य है। जांचकर्ता पिछले वर्षों में इसी तरह के पदों के लिए आयोजित इंटरव्यू और भर्ती प्रक्रियाओं में संभावित गड़बड़ियों की भी जाँच करेंगे।
एसआईटी की संरचना
जांच का दायरा व्यापक होने के कारण राज्य सरकार ने एसआईटी के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर आठ कर दी है। टीम की अगुवाई आईजी अजिता बेगम कर रही हैं, जो एडीजीपी एच. वेंकटेश की देखरेख में काम करेंगी। इसके अलावा टीम में एक एसपी, एक डिप्टी एसपी, एक इंस्पेक्टर और अन्य अधिकारी शामिल हैं।
पीएससी की आंतरिक जांच व्यवस्था पर सवाल
गौरतलब है कि पीएससी के पास पहले से ही एक सक्रिय आंतरिक जांच विंग है, जिसके प्रमुख एक सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस होते हैं और उन्हें पुलिसकर्मियों की एक टीम का सहयोग मिलता है। इस व्यवस्था के बावजूद अनियमितताओं के आरोप सामने आने से सरकारी हलकों में यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या आंतरिक निगरानी तंत्र पर्याप्त था और क्या चेतावनी के संकेतों पर समय रहते ध्यान दिया गया।
यह भी उल्लेखनीय है कि पीएससी में अध्यक्ष समेत 16 सदस्य हैं, जिनकी नियुक्ति पिछली सरकार के कार्यकाल में हुई थी। फिलहाल 5 पद रिक्त हैं और मुख्यमंत्री सतीशन के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ने अभी तक इन पदों पर नई नियुक्तियाँ नहीं की हैं।
आगे क्या होगा
25 जुलाई तक डीजीपी को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद यह तय किया जाएगा कि क्या औपचारिक आपराधिक मामले दर्ज करने और व्यापक जांच शुरू करने की आवश्यकता है। इस रिपोर्ट के आधार पर केरल पीएससी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा तय होगी।