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केरल पीएससी भर्ती घोटाला: एसआईटी ने जांच शुरू की, 25 जुलाई तक डीजीपी को प्रारंभिक रिपोर्ट

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केरल पीएससी भर्ती घोटाला: एसआईटी ने जांच शुरू की, 25 जुलाई तक डीजीपी को प्रारंभिक रिपोर्ट

सारांश

केरल पीएससी में कथित भर्ती अनियमितताओं की जांच के लिए गठित 8 सदस्यीय एसआईटी ने संवैधानिक दायरे में रहकर काम शुरू किया। पहले दिन 10 से अधिक शिकायतें मिलीं। 25 जुलाई तक डीजीपी को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी जाएगी, जिसके बाद आपराधिक मामले दर्ज करने पर फैसला होगा।

मुख्य बातें

केरल पीएससी में कथित भर्ती अनियमितताओं की जांच के लिए 8 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है।
एसआईटी का नेतृत्व आईजी अजिता बेगम कर रही हैं, एडीजीपी एच.
वेंकटेश की देखरेख में।
गठन के पहले ही दिन टीम को 10 से अधिक शिकायतें मिलीं, जिनमें केएएस , प्लानिंग बोर्ड और पुलिस उपाधीक्षक भर्ती शामिल हैं।
25 जुलाई तक डीजीपी को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी जाएगी; उसके बाद आपराधिक मामले दर्ज करने पर निर्णय होगा।
पीएससी में अध्यक्ष समेत 16 सदस्य हैं — सभी पिछली सरकार द्वारा नियुक्त — और 5 पद रिक्त हैं।
एसआईटी पीएससी के संवैधानिक दर्जे का सम्मान करते हुए चरणबद्ध जांच प्रक्रिया अपना रही है।

केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) में कथित भर्ती अनियमितताओं की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने 11 जुलाई 2026 को तिरुवनंतपुरम में अपना काम व्यवस्थित ढंग से शुरू कर दिया है। टीम पीएससी के संवैधानिक दर्जे और अपनी कानूनी जांच-शक्तियों के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ रही है। 25 जुलाई तक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने की उम्मीद है।

एसआईटी गठन का पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बुधवार को एसआईटी बनाने का निर्णय लिया गया। गठन के पहले ही दिन टीम को 10 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें कई हाई-प्रोफाइल भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ी के गंभीर आरोप शामिल थे।

इन शिकायतों में केरल एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (केएएस), प्लानिंग बोर्ड प्रमुख की नियुक्ति, पुलिस उपाधीक्षक स्पेशल रिक्रूटमेंट परीक्षा, इकोनॉमिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स रिसर्च ऑफिसर परीक्षा और होटल मैनेजमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर पद की भर्तियों में अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं।

जांच का तरीका और कानूनी दायरा

एसआईटी ने तत्काल आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की बजाय चरणबद्ध जांच का रास्ता चुना है। टीम पहले शिकायतों की पुष्टि करेगी, शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज करेगी, भर्ती रिकॉर्ड की जाँच करेगी और चयन प्रक्रियाओं से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ करेगी।

यह दृष्टिकोण इसलिए अपनाया गया है क्योंकि पीएससी एक संवैधानिक संस्था है और उस पर सीधी आपराधिक कार्यवाही शुरू करने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य है। जांचकर्ता पिछले वर्षों में इसी तरह के पदों के लिए आयोजित इंटरव्यू और भर्ती प्रक्रियाओं में संभावित गड़बड़ियों की भी जाँच करेंगे।

एसआईटी की संरचना

जांच का दायरा व्यापक होने के कारण राज्य सरकार ने एसआईटी के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर आठ कर दी है। टीम की अगुवाई आईजी अजिता बेगम कर रही हैं, जो एडीजीपी एच. वेंकटेश की देखरेख में काम करेंगी। इसके अलावा टीम में एक एसपी, एक डिप्टी एसपी, एक इंस्पेक्टर और अन्य अधिकारी शामिल हैं।

पीएससी की आंतरिक जांच व्यवस्था पर सवाल

गौरतलब है कि पीएससी के पास पहले से ही एक सक्रिय आंतरिक जांच विंग है, जिसके प्रमुख एक सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस होते हैं और उन्हें पुलिसकर्मियों की एक टीम का सहयोग मिलता है। इस व्यवस्था के बावजूद अनियमितताओं के आरोप सामने आने से सरकारी हलकों में यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या आंतरिक निगरानी तंत्र पर्याप्त था और क्या चेतावनी के संकेतों पर समय रहते ध्यान दिया गया।

यह भी उल्लेखनीय है कि पीएससी में अध्यक्ष समेत 16 सदस्य हैं, जिनकी नियुक्ति पिछली सरकार के कार्यकाल में हुई थी। फिलहाल 5 पद रिक्त हैं और मुख्यमंत्री सतीशन के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ने अभी तक इन पदों पर नई नियुक्तियाँ नहीं की हैं।

आगे क्या होगा

25 जुलाई तक डीजीपी को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद यह तय किया जाएगा कि क्या औपचारिक आपराधिक मामले दर्ज करने और व्यापक जांच शुरू करने की आवश्यकता है। इस रिपोर्ट के आधार पर केरल पीएससी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो ये कथित अनियमितताएँ इतने समय तक क्यों अनदेखी रहीं। 25 जुलाई की प्रारंभिक रिपोर्ट यह तय करेगी कि जांच प्रतीकात्मक रहती है या वास्तविक जवाबदेही की दिशा में बढ़ती है — और इसी से सतीशन सरकार की संस्थागत सुधार की प्रतिबद्धता भी परखी जाएगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल पीएससी भर्ती अनियमितता मामले में एसआईटी क्यों बनाई गई?
केरल लोक सेवा आयोग की कई हाई-प्रोफाइल भर्ती प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की कैबिनेट ने एसआईटी गठित करने का निर्णय लिया। इन आरोपों में केएएस, प्लानिंग बोर्ड प्रमुख और पुलिस उपाधीक्षक भर्ती जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अनियमितताएँ शामिल हैं।
एसआईटी की जांच प्रक्रिया क्या है?
एसआईटी तत्काल आपराधिक कार्यवाही की बजाय चरणबद्ध तरीके से काम कर रही है। टीम पहले शिकायतों की पुष्टि करेगी, बयान दर्ज करेगी, भर्ती रिकॉर्ड खंगालेगी और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय करेगी।
25 जुलाई की रिपोर्ट के बाद क्या होगा?
25 जुलाई तक डीजीपी को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी जाएगी। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि औपचारिक आपराधिक मामले दर्ज किए जाएँ या नहीं और व्यापक जांच की आवश्यकता है या नहीं।
केरल पीएससी का संवैधानिक दर्जा जांच को कैसे प्रभावित करता है?
पीएससी एक संवैधानिक संस्था है, इसलिए उस पर सीधी आपराधिक कार्यवाही शुरू करने से पहले विशेष कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। एसआईटी को जांच एजेंसी की शक्तियों और पीएससी की संवैधानिक सुरक्षा के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाना पड़ रहा है।
केरल पीएससी में अभी कितने सदस्य हैं और क्या कोई पद रिक्त है?
पीएससी में अध्यक्ष समेत 16 सदस्य हैं, जिनकी नियुक्ति पिछली सरकार के कार्यकाल में हुई थी। फिलहाल 5 पद रिक्त हैं और वर्तमान सतीशन सरकार ने अभी तक इन पदों पर नई नियुक्तियाँ नहीं की हैं।
राष्ट्र प्रेस
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