6 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

केरल पीएससी भर्ती घोटाला: जांच अब इंटरनल विजिलेंस एसपी को, चेयरमैन बैजू का फैसला पलटा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
केरल पीएससी भर्ती घोटाला: जांच अब इंटरनल विजिलेंस एसपी को, चेयरमैन बैजू का फैसला पलटा

सारांश

केरल पीएससी में भर्ती घोटाले की जांच को लेकर आंतरिक टकराव सामने आया है — चेयरमैन बैजू का फैसला पलटते हुए जांच अब इंटरनल विजिलेंस एसपी को सौंपी गई है। प्लानिंग बोर्ड परीक्षा में 10 सवालों की अनदेखी और वामपंथी उम्मीदवार की विवादित नियुक्ति के बाद VACB जांच का दबाव बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

केरल पीएससी ने 6 जुलाई को भर्ती घोटाले की जांच परीक्षा नियंत्रक से हटाकर इंटरनल विजिलेंस एसपी को सौंपी।
बैजू का विवादित फैसला आयोग सदस्यों के दबाव के बाद पलटा।
विवाद की जड़: प्लानिंग बोर्ड परीक्षा में 10 सवालों की अनदेखी , फिर भी रैंक लिस्ट जारी और नियुक्तियाँ हुईं।
पीएससी ने मूल्यांकन में गलती मानी, एक रैंक लिस्ट रद्द की, लेकिन दोबारा मूल्यांकन अब तक नहीं।
मौजूदा आयोग पिछली LDF सरकार द्वारा नियुक्त; आयोग में 5 पद रिक्त , सतीशन सरकार नई नियुक्तियों पर विचार कर रही है।
VACB से पूर्ण जांच कराने का दबाव बढ़ रहा है; बुधवार की कैबिनेट बैठक अहम।

केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) ने सोमवार, 6 जुलाई को राज्य योजना बोर्ड में नियुक्तियों से जुड़े कथित भर्ती घोटाले की जांच को लेकर अपना विवादित निर्णय वापस ले लिया। पहले यह जांच परीक्षा नियंत्रक को सौंपी गई थी, लेकिन आयोग के भीतर तीखे विरोध के बाद अब यह जिम्मेदारी आंतरिक सतर्कता (इंटरनल विजिलेंस) विंग के पुलिस अधीक्षक को दे दी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

यह बदलाव तब हुआ जब पीएससी के कई सदस्यों ने चेयरमैन डॉ. एम.आर. बैजू के फैसले पर खुलकर सवाल उठाए। सदस्यों का कहना था कि आयोग ने शुरू में जांच इंटरनल विजिलेंस विंग को सौंपने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बाद में इसे परीक्षा नियंत्रक को दे दिया गया — एक कदम जिसे आलोचकों ने जांच को कमजोर करने की कोशिश बताया। बोर्ड की बैठक में टकराव की स्थिति पैदा हो गई, जहाँ खबरों के अनुसार चेयरमैन पर सदस्यों के एक समूह की ओर से भारी दबाव डाला गया।

विवाद की जड़: परीक्षा में 10 सवालों की अनदेखी

प्लानिंग बोर्ड में भर्ती से जुड़ा यह विवाद तीन विभागों में चीफ-लेवल के पदों के लिए आयोजित एक सामान्य परीक्षा पर केंद्रित है। आरोप है कि मूल्यांकन के दौरान दस सवालों की जांच नहीं की गई। इसके बावजूद दो पदों के लिए रैंक लिस्ट जारी की गई और नियुक्तियाँ की गईं — जिनमें एक वामपंथी संगठन से जुड़े उस उम्मीदवार की नियुक्ति भी शामिल थी जिसने पहली रैंक हासिल की थी।

पीएससी ने बाद में स्वीकार किया कि मूल्यांकन में गलती हुई और विवाद सामने आने के बाद एक रैंक लिस्ट रद्द कर दी। हालाँकि आयोग ने अब तक उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन शुरू नहीं किया है और न ही रैंकिंग में कोई बदलाव किया है।

सरकार पर बढ़ता दबाव

इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलचल को काफी बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन को कथित तौर पर पिछले दशक में पीएससी के कामकाज को लेकर कई शिकायतें मिली हैं — विशेष रूप से पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल के दौरान की। अब सतीशन सरकार पर विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) से पूरी जांच कराने का दबाव बढ़ रहा है। यह विवाद बुधवार की कैबिनेट बैठक को और भी महत्वपूर्ण बना देता है।

आयोग की संरचना पर सवाल

इस घटना ने पीएससी के गठन को लेकर जांच-पड़ताल को भी फिर से हवा दे दी है। मौजूदा नियमों के तहत चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति सरकार करती है और वे 62 वर्ष की आयु तक या छह वर्ष तक — जो भी पहले हो — पद पर बने रहते हैं। मौजूदा आयोग, जिसमें अध्यक्ष और 15 सदस्य शामिल हैं, पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार के दौरान नियुक्त किया गया था।

आगे क्या होगा

फिलहाल आयोग में पाँच पद रिक्त हैं और सतीशन सरकार नई नियुक्तियों के विकल्पों पर विचार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से इस संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता और भविष्य के कामकाज, दोनों पर गहरा असर पड़ेगा। स्वतंत्र जांच की माँग तेज होती जा रही है और यह मामला केरल की राजनीति में एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उसकी इंटरनल विजिलेंस विंग कितनी स्वतंत्र जांच कर सकती है? LDF-नियुक्त आयोग और UDF सरकार के बीच का राजनीतिक तनाव VACB जांच की माँग को और वजनदार बनाता है। जब तक उत्तर पुस्तिकाओं का स्वतंत्र पुनर्मूल्यांकन नहीं होता और रैंकिंग में पारदर्शी सुधार नहीं होता, तब तक यह मामला केरल की भर्ती प्रक्रियाओं पर से जनता का भरोसा उठाता रहेगा।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल पीएससी भर्ती घोटाला क्या है?
यह विवाद राज्य योजना बोर्ड (प्लानिंग बोर्ड) में चीफ-लेवल के तीन पदों के लिए आयोजित परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें मूल्यांकन के दौरान 10 सवालों की जांच नहीं की गई। इसके बावजूद रैंक लिस्ट जारी कर नियुक्तियाँ की गईं, जिनमें एक वामपंथी संगठन से जुड़े प्रथम रैंक धारक की नियुक्ति भी शामिल थी।
जांच अब किसे सौंपी गई है और पहले किसके पास थी?
पहले जांच परीक्षा नियंत्रक को सौंपी गई थी, लेकिन आयोग सदस्यों के विरोध के बाद 6 जुलाई को इसे इंटरनल विजिलेंस विंग के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को सौंप दिया गया। आयोग के सदस्यों का कहना था कि परीक्षा नियंत्रक को जांच सौंपना प्रक्रिया को कमजोर करता था।
क्या पीएससी ने गलती स्वीकार की है?
हाँ, पीएससी ने माना है कि मूल्यांकन में गलती हुई और एक रैंक लिस्ट रद्द कर दी। हालाँकि आयोग ने अब तक उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन शुरू नहीं किया है और न ही रैंकिंग में कोई संशोधन किया है।
सतीशन सरकार पर क्या दबाव है?
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन पर विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) से पूर्ण और स्वतंत्र जांच कराने का दबाव बढ़ रहा है। साथ ही, आयोग में 5 रिक्त पदों पर नई नियुक्तियों का फैसला भी उनके सामने है, जो इस संवैधानिक संस्था की दिशा तय करेगा।
मौजूदा पीएससी का गठन किसने किया था?
मौजूदा आयोग — जिसमें अध्यक्ष और 15 सदस्य शामिल हैं — पिछली LDF (वाम लोकतांत्रिक मोर्चा) सरकार के दौरान नियुक्त किया गया था। नियमों के अनुसार सदस्य 62 वर्ष की आयु तक या 6 वर्ष तक पद पर रहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 दिन पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 5 दिन पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले