केरल PSC को तीन सप्ताह में रिक्तियाँ भेजें — सतीशन सरकार का सख्त आदेश, उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार ने 3 जुलाई 2026 को राज्य के सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिया कि वे तीन सप्ताह के भीतर अपनी-अपनी रिक्तियों की पूरी जानकारी केरल लोक सेवा आयोग (PSC) को अनिवार्य रूप से भेजें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस निर्देश का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आदेश का दायरा और पृष्ठभूमि
प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से जारी यह निर्देश केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं है — यह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) पर भी समान रूप से लागू होगा। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सरकारी विभागों में रिक्त पदों की समय पर सूचना न देने के कारण अस्थायी नियुक्तियों में अनियमितताओं के आरोप लगातार बढ़ रहे थे और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे थे।
सरकार बदलने के बाद PSC पर बढ़ी निगरानी
मई 2026 में वी.डी. सतीशन के नेतृत्व में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार के सत्ता में आने के बाद केरल PSC की हालिया भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के मद्देनज़र सरकार ने आंतरिक सतर्कता जाँच के आदेश दिए हैं। हालाँकि, युवा मामलों के मंत्री ओ.जे. जेनेश की हालिया टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि सरकार जाँच की प्रगति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है और हाल की भर्ती प्रक्रियाओं की और व्यापक जाँच कराई जा सकती है।
PSC की संरचना और रिक्त पद
केरल PSC के मौजूदा अध्यक्ष और 15 सदस्यों की नियुक्ति पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार के कार्यकाल में हुई थी, जो 2016 से 2026 तक सत्ता में रही। फिलहाल आयोग में पाँच पद रिक्त हैं। संविधान के अनुसार, PSC अध्यक्ष या सदस्य छह वर्ष के लिए या 62 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक — जो भी पहले हो — पद पर बने रहते हैं।
रिसर्च ऑफिसर परीक्षा विवाद
अर्थशास्त्र और सांख्यिकी विभाग में रिसर्च ऑफिसर की भर्ती परीक्षा को लेकर नया विवाद भी सामने आया है। उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि प्रश्न पत्र न्यूनतम योग्यता के रूप में निर्धारित स्नातकोत्तर मानक को प्रतिबिंबित नहीं करता। साथ ही यह भी आरोप है कि उत्तर कुंजी इस तरह तैयार की गई कि असामान्य रूप से बड़ी संख्या में प्रश्नों के लिए विकल्प 'बी' ही सही उत्तर बन गया। परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजन की माँग को लेकर उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री से भी संपर्क किया है।
आगे क्या होगा
सरकार द्वारा चल रही सतर्कता जाँच के साथ-साथ रिसर्च ऑफिसर परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की भी जाँच किए जाने की उम्मीद है। इस प्रकार PSC का कामकाज नई UDF सरकार के सामने आने वाले पहले प्रमुख शासन संबंधी मुद्दों में से एक बन गया है। रिक्ति-रिपोर्टिंग का यह आदेश भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बहाल करने की दिशा में पहला ठोस प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।