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केरल पीएससी मूल्यांकन विवाद: विजिलेंस जांच पर विचार, 200+ अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर

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केरल पीएससी मूल्यांकन विवाद: विजिलेंस जांच पर विचार, 200+ अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर

सारांश

केरल पीएससी की एक भर्ती परीक्षा में 10 सवालों की जांच ही नहीं हुई — फिर भी नियुक्तियाँ हो गईं। अब राज्य सरकार वीएसीबी जांच पर विचार कर रही है, लेकिन पीएससी के संवैधानिक दर्जे की कानूनी अड़चन सामने है। 200 से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में है।

मुख्य बातें

केरल पीएससी की राज्य योजना बोर्ड के चीफ स्तर के 3 पदों की भर्ती परीक्षा में 10 प्रश्नों का मूल्यांकन ही नहीं हुआ।
गलती के बावजूद पीएससी ने 2 पदों की रैंक सूची जारी कर 2 उम्मीदवारों की नियुक्ति कर दी।
राज्य सरकार का गृह विभाग पहले कानूनी राय लेगा, फिर वीएसीबी जांच पर निर्णय होगा।
अंतिम फैसला राज्य मंत्रिमंडल की अगली बैठक में होने की उम्मीद है।
विवाद 6 अन्य भर्ती प्रक्रियाओं तक फैला — केएएस, फिशरीज, असिस्टेंट प्रोफेसर सहित।
200 से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित; दोबारा मूल्यांकन की घोषणा के बावजूद अमल नहीं हुआ।

केरल की राज्य सरकार ने 5 जुलाई 2026 को संकेत दिया कि वह केरल पब्लिक सर्विस कमीशन (पीएससी) की भर्ती परीक्षा के मूल्यांकन में हुई अनियमितताओं की जांच विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) को सौंप सकती है। तिरुवनंतपुरम से मिली जानकारी के अनुसार, यह कदम तब उठाया जा रहा है जब पीएससी की आंतरिक जांच की विश्वसनीयता पर चौतरफा सवाल खड़े हो गए हैं और 200 से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका है।

विवाद की जड़: क्या हुआ परीक्षा में

पूरा मामला राज्य योजना बोर्ड में चीफ स्तर के तीन पदों की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षकों ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान अभ्यर्थियों के 10 प्रश्नों के उत्तरों की जांच ही नहीं की। इतनी गंभीर चूक के बावजूद पीएससी ने तीन में से दो पदों की रैंक सूची जारी कर दी और दो उम्मीदवारों की नियुक्ति भी कर दी।

यह मामला तब सार्वजनिक हुआ जब एक अभ्यर्थी ने केरल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में शिकायत दर्ज कराई। ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान पीएससी ने स्वयं स्वीकार किया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में गलती हुई थी।

सरकार की प्रतिक्रिया और कानूनी पेच

राज्य सरकार के गृह विभाग ने तय किया है कि विजिलेंस जांच का आदेश देने से पहले कानूनी राय ली जाएगी। मुख्य सवाल यह है कि पीएससी एक संवैधानिक संस्था है — इसलिए उसके कामकाज की विजिलेंस जांच कराने में कोई संवैधानिक या कानूनी अड़चन तो नहीं है। कानूनी राय मिलने के बाद राज्य मंत्रिमंडल की अगली बैठक में अंतिम निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि पीएससी की आंतरिक जांच पर भी विपक्ष और अभ्यर्थी संगठनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि जांच ऐसे अधिकारी को सौंपी गई है जो सीधे पीएससी अध्यक्ष को रिपोर्ट करता है — जिससे जांच की निष्पक्षता संदिग्ध हो जाती है।

दोबारा मूल्यांकन का वादा, अमल नहीं

पीएससी ने सभी उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन करने और नई रैंक सूची जारी करने की घोषणा की थी। हालांकि, अभ्यर्थियों का आरोप है कि अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब पहले से नियुक्त दो उम्मीदवार अपने पदों पर बने हुए हैं, जबकि अन्य अभ्यर्थी न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

विवाद का विस्तार: अन्य भर्तियाँ भी दायरे में

यह विवाद अब सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में कई अन्य सरकारी भर्तियाँ भी जांच के दायरे में आ गई हैं, जिनमें शामिल हैं:

फिशरीज एक्सटेंशन ऑफिसर, असिस्टेंट इन्फॉर्मेशन ऑफिसर, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (स्पेशल रिक्रूटमेंट), लॉ कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, केरल एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (केएएस) और विश्वविद्यालयों में पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, संबंधित मंत्रियों ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन से इन सभी भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। सरकार इन शिकायतों को भी विजिलेंस विभाग को सौंपने पर विचार कर रही है।

आगे क्या होगा

सरकार की कानूनी राय और मंत्रिमंडल के फैसले पर अब सैकड़ों अभ्यर्थियों की नज़रें टिकी हैं। यदि वीएसीबी जांच का आदेश मिलता है, तो यह केरल में किसी संवैधानिक संस्था के विरुद्ध इस तरह की जांच का दुर्लभ उदाहरण होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मामले का अंतिम निपटारा न्यायिक निगरानी में ही संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और फिर भी नियुक्तियाँ जारी रहना — यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं, संस्थागत जवाबदेही का संकट है। असली सवाल यह नहीं कि जांच होगी या नहीं, बल्कि यह है कि एक संवैधानिक संस्था की आड़ में जिम्मेदारी से बचने की परंपरा कब तक चलती रहेगी। दोबारा मूल्यांकन का वादा महीनों बाद भी कागज़ पर है — यह उन सैकड़ों अभ्यर्थियों के साथ दोहरा अन्याय है जिन्होंने वर्षों की मेहनत लगाई। वीएसीबी जांच तभी अर्थपूर्ण होगी जब उसका दायरा सभी विवादित भर्तियों तक हो और परिणाम समयबद्ध हों।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल पीएससी मूल्यांकन विवाद क्या है?
राज्य योजना बोर्ड के चीफ स्तर के 3 पदों की भर्ती परीक्षा में परीक्षकों ने 200 से अधिक अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में 10 प्रश्नों की जांच ही नहीं की। इसके बावजूद पीएससी ने रैंक सूची जारी कर दो उम्मीदवारों की नियुक्ति कर दी, जिसे केरल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में चुनौती दी गई।
केरल सरकार इस मामले में क्या कदम उठा रही है?
राज्य सरकार का गृह विभाग पहले यह तय करने के लिए कानूनी राय लेगा कि पीएससी जैसी संवैधानिक संस्था की विजिलेंस जांच कराने में कोई कानूनी बाधा तो नहीं है। इसके बाद राज्य मंत्रिमंडल की अगली बैठक में वीएसीबी जांच पर अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है।
पीएससी की आंतरिक जांच पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
आलोचकों का कहना है कि जांच ऐसे अधिकारी को सौंपी गई है जो सीधे पीएससी अध्यक्ष को रिपोर्ट करता है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर संदेह है। विपक्ष का आरोप है कि इस व्यवस्था से जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश हो सकती है।
इस विवाद से कौन-कौन सी भर्तियाँ प्रभावित हैं?
राज्य योजना बोर्ड भर्ती के अलावा फिशरीज एक्सटेंशन ऑफिसर, असिस्टेंट इन्फॉर्मेशन ऑफिसर, डिप्टी एसपी (स्पेशल रिक्रूटमेंट), लॉ कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, केएएस और विश्वविद्यालयों में पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर की भर्तियों को लेकर भी शिकायतें दर्ज हैं। सरकार इन सभी मामलों को भी वीएसीबी को सौंपने पर विचार कर रही है।
प्रभावित अभ्यर्थियों को अब तक राहत क्यों नहीं मिली?
पीएससी ने सभी उत्तर पुस्तिकाओं के दोबारा मूल्यांकन और नई रैंक सूची जारी करने की घोषणा की थी, लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप है कि अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस बीच पहले से नियुक्त दो उम्मीदवार अपने पदों पर बने हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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