केपीएससी परीक्षा घोटाले की जांच सीआईडी को सौंपी, गृह मंत्री प्रियांक खड़गे का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) की परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े दो मामलों की जांच क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) को सौंप दी है। गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने मंगलवार, 28 जुलाई को बेंगलुरु में यह घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में 'कर्नाटक पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2023' की धारा 10 के तहत दर्ज ये दोनों मामले, केपीएससी द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं और नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोपों से संबंधित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर उम्मीदवारों और नागरिक समाज में गहरी चिंता व्याप्त है।
सरकार की प्रतिक्रिया
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय आरोपों की निष्पक्ष, बिना भेदभाव वाली और संपूर्ण जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'सरकार परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार, गड़बड़ी, अनुचित साधनों या किसी भी तरह के दुरुपयोग के आरोपों की निडर और निष्पक्ष जांच करने के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे इसमें शामिल लोगों का ओहदा या पद कुछ भी हो।'
खड़गे ने यह भी रेखांकित किया कि सार्वजनिक भर्ती प्रक्रियाओं की पवित्रता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनाए रखना राज्य सरकार की पक्की प्रतिबद्धता है।
उम्मीदवारों पर असर
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों का भरोसा बनाए रखना और योग्यता व पात्रता के आधार पर न्याय सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में गिना जा रहा है। गौरतलब है कि केपीएससी से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतें पिछले कुछ समय से सामने आ रही थीं, जिसने हज़ारों अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर सवालिया निशान लगा दिया था।
जांच का दायरा और आगे की राह
सीआईडी को मामले सौंपे जाने से जांच का दायरा और अधिकार क्षेत्र स्थानीय पुलिस की तुलना में व्यापक हो जाएगा। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ — चाहे उसका पद कितना भी ऊंचा हो — सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि वह योग्यता आधारित भर्ती प्रणाली को मजबूत करने में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी।