28 अगस्त 2026
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केपीएससी घोटाले पर कुमारस्वामी का हमला: कर्नाटक कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार और भर्ती में पारदर्शिता के सवाल

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केपीएससी घोटाले पर कुमारस्वामी का हमला: कर्नाटक कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार और भर्ती में पारदर्शिता के सवाल

सारांश

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने बेंगलुरु प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक कांग्रेस सरकार को घेरा — केपीएससी में कथित ₹80 लाख रिश्वत, आईएएस अधिकारी की संदिग्ध गतिविधियाँ और 75,000 पदों की भर्ती में तीन साल की देरी — ये तीन मुद्दे अब राज्य की राजनीति में नई जंग की भूमि बन गए हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 28 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में कर्नाटक कांग्रेस सरकार पर केपीएससी घोटाले और भर्ती में अनियमितताओं के आरोप लगाए।
केपीएससी के कंट्रोलिंग ऑफिसर आईएएस ज्ञानेंद्र कुमार पर पशु चिकित्सा अधिकारी नियुक्ति के लिए कथित तौर पर ₹80 लाख मांगने का आरोप।
कुमारस्वामी ने सत्ता मिलने पर केपीएससी और केएटी को संवैधानिक प्रक्रिया से समाप्त करने का दावा किया।
सरकार पर 75,000 सरकारी पदों की भर्ती की घोषणा में तीन साल की देरी का आरोप।
असिस्टेंट इंजीनियर ग्रेड-1 भर्ती नोटिफिकेशन ( 3 सितंबर 2022 ) से अंतिम सूची ( 31 जनवरी 2024 ) तक की धीमी प्रक्रिया पर सवाल।

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 28 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य में विकास कार्यों की गति, केपीएससी (कर्नाटक लोक सेवा आयोग) घोटाले और सरकारी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। कुमारस्वामी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि उनकी पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शायद सरकार के नेताओं को चैन की नींद आ गई होगी।

केपीएससी विवाद और संस्थागत भरोसे पर सवाल

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि केपीएससी का पिछले कई वर्षों से राजनीतिक रूप से दुरुपयोग किया जा रहा है। उनके अनुसार, कभी अपनी प्रतिष्ठा के लिए जानी जाने वाली यह संस्था अब जाति और धन के आधार पर नियुक्तियों के आरोपों से घिर गई है, जिससे जनता का भरोसा कमज़ोर हुआ है। उन्होंने दावा किया कि यदि उन्हें सत्ता मिली तो केपीएससी और केएटी (कर्नाटक प्रशासनिक न्यायाधिकरण) को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

केपीएससी के कंट्रोलिंग ऑफिसर आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार पर भी कुमारस्वामी ने निशाना साधा। उन्होंने आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि पशु चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति के लिए कथित तौर पर ₹80 लाख मांगने की चर्चा सामने आई है। उन्होंने बताया कि ज्ञानेंद्र कुमार ने 23 अगस्त को फोन कर दो दिन में लौटने की बात कही थी, लेकिन बाद में उनके 25 अगस्त को खरगे में होने की जानकारी सामने आई।

विधानसभा सत्र और मंत्रियों के इस्तीफे पर आपत्ति

कुमारस्वामी ने विधानसभा सत्र के अंतिम चरण में हुए हंगामे और मंत्रियों के इस्तीफे के मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि यदि 5 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण, पार्क, टनल रोड, बिजनेस कॉरिडोर और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे विधेयकों पर विस्तार से चर्चा होती, तो बड़ा विवाद खड़ा हो सकता था। उन्होंने राज्य के गृह मंत्री पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके बयान ऐसे होते हैं जैसे 'बकरी पत्ते कुतर रही हो।'

भर्ती प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता पर सवाल

सरकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार 75,000 सरकारी कर्मचारियों की भर्ती की बात कर रही है, लेकिन युवाओं को रोज़गार देने की घोषणा करने में तीन साल लग गए। उन्होंने असिस्टेंट इंजीनियर ग्रेड-1 भर्ती का उदाहरण देते हुए बताया कि इसका नोटिफिकेशन 3 सितंबर 2022 को जारी हुआ, लिखित परीक्षा 16 जून 2023 को हुई, व्यक्तित्व परीक्षण 15 व 16 सितंबर 2023 को कराया गया और अंतिम चयन सूची 31 जनवरी 2024 को जारी की गई।

कुमारस्वामी ने भर्ती प्रक्रिया में शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि पारदर्शिता के दावों के बावजूद ज़मीनी हकीकत अलग है।

परप्पना अग्रहारा और विपक्ष की आवाज़ दबाने का आरोप

कुमारस्वामी ने परप्पना अग्रहारा मामले का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने ही इस मुद्दे को लगातार उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ बोलने पर विपक्ष की आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है।

आगे क्या होगा

कुमारस्वामी के इन आरोपों के बाद कर्नाटक की राजनीति में नई हलचल की संभावना है। केपीएससी विवाद और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर विपक्ष का दबाव बढ़ने के साथ, कांग्रेस सरकार को जल्द ही इन सवालों का जवाब देना होगा। राज्य में 75,000 सरकारी पदों की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता अब सियासी बहस का केंद्र बन गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनमें जनता दल (एस) का कार्यकाल भी शामिल है। असली सवाल यह है कि आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार की कथित अनुपस्थिति और रिश्वत के आरोपों की जाँच किस स्वतंत्र एजेंसी से होगी। 75,000 पदों की भर्ती में तीन साल की देरी युवाओं के लिए वास्तविक संकट है, लेकिन इसे राजनीतिक हथियार बनाने से समाधान नहीं मिलेगा — जब तक कि विपक्ष ठोस संस्थागत सुधार का खाका न पेश करे।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केपीएससी घोटाला क्या है और कुमारस्वामी ने क्या आरोप लगाए?
केपीएससी (कर्नाटक लोक सेवा आयोग) पर जाति और धन के आधार पर नियुक्तियों के आरोप लगे हैं। केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने दावा किया कि पशु चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति के लिए कथित तौर पर ₹80 लाख मांगे गए और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार की गतिविधियाँ संदिग्ध रहीं।
कुमारस्वामी ने केपीएससी और केएटी को खत्म करने की बात क्यों कही?
कुमारस्वामी का कहना है कि केपीएससी का लंबे समय से राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है और इसकी विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता में आने पर वे केपीएससी और केएटी को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत समाप्त करेंगे।
कर्नाटक में 75,000 सरकारी पदों की भर्ती में देरी क्यों हुई?
कुमारस्वामी के अनुसार, कांग्रेस सरकार को युवाओं के लिए 75,000 सरकारी पदों की भर्ती की घोषणा करने में तीन साल लग गए। उन्होंने असिस्टेंट इंजीनियर ग्रेड-1 भर्ती का उदाहरण दिया, जहाँ नोटिफिकेशन (सितंबर 2022) से अंतिम सूची (जनवरी 2024) तक डेढ़ साल से अधिक का समय लगा।
आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार का मामला क्या है?
केपीएससी के कंट्रोलिंग ऑफिसर आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार पर पशु चिकित्सा अधिकारी नियुक्ति के लिए कथित तौर पर ₹80 लाख मांगने का आरोप है। कुमारस्वामी के अनुसार, उन्होंने 23 अगस्त को दो दिन में लौटने की बात कही थी, लेकिन 25 अगस्त को वे खरगे में थे।
कर्नाटक कांग्रेस सरकार पर कुमारस्वामी के आरोपों का राजनीतिक असर क्या होगा?
केपीएससी विवाद और भर्ती में देरी के मुद्दे पर विपक्ष का दबाव बढ़ने से कांग्रेस सरकार को जवाब देना होगा। यह मामला राज्य में युवा मतदाताओं के बीच सरकार की छवि को प्रभावित कर सकता है, खासकर जब सरकारी नौकरियों की माँग अपने चरम पर है।
राष्ट्र प्रेस
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