30 जुलाई 2026
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केपीएससी भर्ती घोटाले के खिलाफ एबीवीपी का बेंगलुरु में प्रदर्शन, कई कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए

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केपीएससी भर्ती घोटाले के खिलाफ एबीवीपी का बेंगलुरु में प्रदर्शन, कई कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए

सारांश

बेंगलुरु में एबीवीपी का केपीएससी कार्यालय घेराव — ₹80 लाख प्रति सीट रिश्वत, ओएमआर छेड़छाड़ और प्रश्न पत्र लीक के आरोपों के बीच। पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, चयनित उम्मीदवार न्याय के लिए उपमुख्यमंत्री के दरवाज़े पर।

मुख्य बातें

एबीवीपी ने 30 जुलाई को बेंगलुरु में केपीएससी कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की; पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
केपीएससी पर 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में प्रति सीट ₹80 लाख रिश्वत, ओएमआर शीट छेड़छाड़ और प्रश्न पत्र लीक के आरोप हैं।
आरोपों के बाद केपीएससी चेयरमैन को निलंबित किया जा चुका है; जांच जारी है।
प्रदर्शन का नेतृत्व एबीवीपी बेंगलुरु संगठन सचिव मणिकंठा कलासा ने किया।
चयनित उम्मीदवारों ने उपमुख्यमंत्री जी.
परमेश्वर से मिलकर भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की अपील की।
विधान सौधा के निकट केपीएससी कार्यालय के आसपास व्यापक बैरिकेडिंग; आम नागरिकों का प्रवेश रोका गया।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार, 30 जुलाई को बेंगलुरु में कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में बड़ा प्रदर्शन किया। केपीएससी कार्यालय का घेराव करने की कोशिश के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और परिसर के आसपास व्यापक बैरिकेडिंग की गई।

घोटाले की पृष्ठभूमि

केपीएससी पर कथित तौर पर 'नौकरी के बदले पैसे' लेने, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और प्रश्न पत्र लीक करने के गंभीर आरोप हैं। यह विवाद 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से जुड़ा है, जिसमें आरोपों के अनुसार प्रति सीट ₹80 लाख तक की रिश्वत ली गई। इन आरोपों के मद्देनज़र केपीएससी के चेयरमैन को निलंबित किया जा चुका है। गौरतलब है कि यह मामला केवल पशु चिकित्सा अधिकारियों तक सीमित नहीं है — पंचायत विकास अधिकारियों (पीडीओ) की भर्ती में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिससे राज्यभर के उम्मीदवारों में गहरी चिंता व्याप्त है।

मुख्य घटनाक्रम

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व एबीवीपी बेंगलुरु के संगठन सचिव मणिकंठा कलासा ने किया। जैसे-जैसे प्रदर्शन तेज हुआ, पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया। विधान सौधा के निकट केपीएससी कार्यालय से सीआईडी कार्यालय की ओर जाने वाली सड़क तक व्यापक बैरिकेडिंग की गई, जिससे उस क्षेत्र में आम नागरिकों का प्रवेश रोक दिया गया।

जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर केपीएससी कार्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश की, तो एबीवीपी कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच हल्की झड़प और धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद पुलिस ने स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों ने केवल केपीएससी कर्मचारियों और आवश्यक कार्य वाले व्यक्तियों को ही परिसर में प्रवेश की अनुमति दी।

चुने गए उम्मीदवारों की पीड़ा

इस बीच, पशु चिकित्सा अधिकारी पदों के लिए चयनित उम्मीदवार बेंगलुरु में उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर से मिले और भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की अपील की। उम्मीदवारों ने कहा कि उन्होंने परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए और मेरिट के आधार पर चुने गए — और वे किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।

कई उम्मीदवार पत्रकारों से बात करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत कर्मचारी नियमित नियुक्ति से अपनी नौकरी जाने के डर से भर्ती प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि यदि जांच में किसी चयनित उम्मीदवार के विरुद्ध गड़बड़ी सिद्ध हो, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए — लेकिन निर्दोष उम्मीदवारों की नियुक्ति न रोकी जाए।

एबीवीपी की मांगें

एबीवीपी नेताओं ने आरोप लगाया कि केपीएससी भर्तियों में बार-बार हो रही अनियमितताओं ने राज्यभर के छात्रों और नौकरी के उम्मीदवारों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। उन्होंने इन कथित घोटालों की निष्पक्ष, पारदर्शी और तटस्थ जांच की मांग करते हुए राज्य सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने और भर्ती प्रक्रिया में जनता का भरोसा बहाल करने का आग्रह किया।

आगे की स्थिति

कर्नाटक में भर्ती अनियमितताओं का यह मामला सार्वजनिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है और फिलहाल जांच जारी है। पुलिस ने केपीएससी कार्यालय के घेराव की आगे की किसी भी कोशिश को देखते हुए परिसर के अंदर और बाहर कड़े सुरक्षा इंतजाम बनाए रखे हैं। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि उम्मीदवारों और प्रदर्शनकारियों का आक्रोश थमेगा या और बढ़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक गहरी जड़ें जमाई व्यवस्था हो सकती है। चेयरमैन का निलंबन प्रतीकात्मक कदम है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि जांच स्वतंत्र एजेंसी द्वारा हो और दोषियों पर ठोस कार्रवाई हो। जब तक पारदर्शी और समयबद्ध जांच नहीं होती, मेरिट से चुने गए उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटका रहेगा — और यह राज्य की भर्ती प्रणाली में जनता के भरोसे को और कमज़ोर करेगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केपीएससी भर्ती घोटाला क्या है?
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) पर कथित तौर पर 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों और पंचायत विकास अधिकारियों की भर्ती में 'नौकरी के बदले पैसे', ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और प्रश्न पत्र लीक जैसे गंभीर आरोप हैं। आरोपों के अनुसार प्रति सीट ₹80 लाख तक की रिश्वत ली गई, जिसके बाद केपीएससी चेयरमैन को निलंबित कर दिया गया है।
एबीवीपी ने 30 जुलाई को बेंगलुरु में प्रदर्शन क्यों किया?
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने केपीएससी भर्ती में कथित अनियमितताओं के विरोध में केपीएससी कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की। संगठन ने निष्पक्ष, पारदर्शी और तटस्थ जांच की मांग की तथा राज्य सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने केपीएससी कार्यालय के आसपास अतिरिक्त बल तैनात किया और व्यापक बैरिकेडिंग की। जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की तो हल्की झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने कई एबीवीपी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
चयनित उम्मीदवारों का क्या कहना है?
पशु चिकित्सा अधिकारी पदों के लिए चयनित उम्मीदवारों ने उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर से मिलकर भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे मेरिट के आधार पर चुने गए हैं और किसी भी जांच का सामना करने को तैयार हैं; साथ ही आरोप लगाया कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी नियुक्ति प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं।
केपीएससी घोटाले की जांच की अब तक क्या स्थिति है?
केपीएससी चेयरमैन को निलंबित किया जा चुका है और मामले की जांच जारी है। हालांकि, अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी की नियुक्ति या जांच की समयसीमा की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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