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केपीएससी घोटाला: प्रियांक खड़गे का कुमारस्वामी को खुला चैलेंज — 'संलिप्तता साबित करें, वरना चुप रहें'

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केपीएससी घोटाला: प्रियांक खड़गे का कुमारस्वामी को खुला चैलेंज — 'संलिप्तता साबित करें, वरना चुप रहें'

सारांश

केपीएससी भर्ती घोटाले पर कुमारस्वामी के हमले का जवाब देते हुए कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने खुली चुनौती दी — संलिप्तता साबित करें, वरना राजनीति छोड़ने को तैयार हैं। बालकृष्ण ने कहा, 'कांच के घर में बैठकर पत्थर मत फेंको।'

मुख्य बातें

कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे और एचसी बालकृष्ण ने 1 सितंबर को केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के KPSC घोटाले संबंधी आरोपों को खारिज किया।
खड़गे ने चुनौती दी — 'मेरी संलिप्तता का एक भी मामला साबित करें, वरना मैं राजनीति से संन्यास लेने को तैयार हूँ।' खड़गे ने बताया कि KPSC अध्यक्ष भाजपा द्वारा मनोनीत हैं और ओएमआर शीट की जिम्मेदारी आयोग की है, सरकार की नहीं।
बालकृष्ण ने कुमारस्वामी को सलाह दी कि भारी उद्योग मंत्री के रूप में अपने क्षेत्र में रोजगार सृजन पर ध्यान दें।
कुमारस्वामी ने रविवार को गिरफ्तार IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार की गतिविधियों का हवाला देते हुए कांग्रेस सरकार पर हमला बोला था।

कर्नाटक के गृह एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खड़गे और नगर प्रशासन मंत्री एचसी बालकृष्ण ने मंगलवार, 1 सितंबर को केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के लिए राज्य की कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। दोनों मंत्रियों ने पलटवार करते हुए कुमारस्वामी से साक्ष्य सामने रखने की माँग की और उन पर 'हिट-एंड-रन' राजनीति का आरोप लगाया।

खड़गे का सीधा चैलेंज

खड़गे ने कुमारस्वामी को खुली चुनौती देते हुए कहा, 'उन्हें रिसॉर्ट में कौन ले गया और केपीएससी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था किसने की? पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें जिम्मेदारी से बोलना चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी सरकारी विभाग की नहीं, बल्कि KPSC की है।

खड़गे ने यह भी रेखांकित किया कि KPSC अध्यक्ष भाजपा द्वारा मनोनीत हैं और ओएमआर शीट सहित समस्त परीक्षा सामग्री आयोग के पास सुरक्षित रहती है। उन्होंने कहा, 'क्या मैं किसी रिसॉर्ट में जाकर परीक्षा लिखवाने गया था? उन्हें मेरी संलिप्तता का एक भी मामला साबित करने दीजिए — अगर वे ऐसा कर पाते हैं तो मैं राजनीति से संन्यास लेने को तैयार हूँ। क्या वे भी यही करने को तैयार हैं?'

बालकृष्ण की नसीहत — शासन पर ध्यान दें

नगर प्रशासन मंत्री एचसी बालकृष्ण ने कुमारस्वामी को सलाह दी कि केंद्रीय मंत्री होने के नाते उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में उद्योग स्थापित कर युवाओं के लिए रोजगार सृजित करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'भारी उद्योग और इस्पात मंत्रालय के प्रभारी होने के नाते आपको अपने क्षेत्र में उद्योग लाने चाहिए। झूठे आरोप लगाने से न आपको लाभ होगा, न आपकी पार्टी को।'

बालकृष्ण ने एक सतर्क टिप्पणी करते हुए कहा, 'मौजूदा हालात में हर कोई कांच के घर में बैठा है। अगर जाँच होती है तो हर कोई जाँच के दायरे में आ सकता है।' उन्होंने आग्रह किया कि जनता ने जिन्हें चुना है, उन्हें व्यक्तिगत हमलों की बजाय जनसेवा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

कुमारस्वामी ने क्या आरोप लगाए थे

इससे पहले रविवार को केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने KPSC में कथित अनियमितताओं को लेकर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने गिरफ्तार IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार की गतिविधियों पर सवाल उठाए और गृह मंत्री खड़गे से जवाबदेही की माँग की थी। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब KPSC भर्ती घोटाले की जाँच जारी है और एक वरिष्ठ IAS अधिकारी की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह

गौरतलब है कि KPSC कर्नाटक में सिविल सेवा भर्ती का सर्वोच्च निकाय है और इसके कामकाज पर उठे सवाल राज्य के हजारों युवा उम्मीदवारों को सीधे प्रभावित करते हैं। भाजपा-जेडीएस गठबंधन और सत्तारूढ़ कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर विधानसभा सत्र से पहले तेज हो गया है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों को राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठकर पारदर्शी जाँच सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि प्रभावित उम्मीदवारों को न्याय मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस और कांग्रेस के बीच उस व्यापक राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे की जवाबदेही तय करने से बचते हुए दिखते हैं। खड़गे का यह तर्क कि KPSC अध्यक्ष भाजपा-मनोनीत हैं, तकनीकी रूप से सही हो सकता है, लेकिन यह इस प्रश्न का उत्तर नहीं देता कि सत्तारूढ़ सरकार की निगरानी-जिम्मेदारी क्या थी। बालकृष्ण की 'कांच के घर' वाली टिप्पणी अनजाने में यही स्वीकार करती है कि यह मसला किसी एक दल तक सीमित नहीं है। हजारों युवा उम्मीदवारों के भविष्य को दाँव पर रखकर चल रही यह राजनीतिक बयानबाजी तब तक बेनतीजा रहेगी, जब तक कोई स्वतंत्र और समयबद्ध जाँच सामने नहीं आती।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केपीएससी भर्ती घोटाला क्या है?
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का यह मामला है, जिसमें एक IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में हेराफेरी की गई, जिससे हजारों उम्मीदवारों की भर्ती प्रभावित हुई।
प्रियांक खड़गे ने कुमारस्वामी को क्या चुनौती दी?
खड़गे ने कुमारस्वामी से माँग की कि वे KPSC अनियमितताओं में उनकी व्यक्तिगत संलिप्तता का एक भी मामला साबित करें। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हो सका तो वे राजनीति से संन्यास लेने को तैयार हैं, और पूछा कि क्या कुमारस्वामी भी यही दाँव लगाने को तैयार हैं।
KPSC की जिम्मेदारी किस पर है — सरकार पर या आयोग पर?
खड़गे के अनुसार परीक्षा आयोजन, ओएमआर शीट और समस्त प्रक्रिया की जिम्मेदारी KPSC की है, न कि सरकारी विभाग की। उन्होंने यह भी बताया कि KPSC के वर्तमान अध्यक्ष भाजपा द्वारा मनोनीत हैं।
एचडी कुमारस्वामी ने कांग्रेस सरकार पर क्या आरोप लगाए थे?
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने रविवार को गिरफ्तार IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार की गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को KPSC अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार ठहराया और गृह मंत्री खड़गे से जवाबदेही की माँग की थी।
इस विवाद का कर्नाटक के युवा उम्मीदवारों पर क्या असर है?
KPSC कर्नाटक में सिविल सेवा भर्ती का सर्वोच्च निकाय है और इसकी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताएँ हजारों युवा उम्मीदवारों के भविष्य को सीधे प्रभावित करती हैं। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच पारदर्शी जाँच की माँग तेज हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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