28 अगस्त 2026
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केपीएससी विवाद: प्रियांक खड़गे का कुमारस्वामी पर पलटवार, बोले — आईएएस ज्ञानेंद्र कुमार का ठिकाना मुझे पता है

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केपीएससी विवाद: प्रियांक खड़गे का कुमारस्वामी पर पलटवार, बोले — आईएएस ज्ञानेंद्र कुमार का ठिकाना मुझे पता है

सारांश

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी के KPSC-जुड़े आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार के 'गायब' होने के आरोपों को सीधे खारिज किया — और पलटकर पूछा कि निलंबित KPSC अध्यक्ष को नियुक्त किसने किया था।

मुख्य बातें

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 28 अगस्त को बेंगलुरु में केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी के आरोपों का जवाब दिया।
खड़गे ने कहा कि आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार ने लिखित रूप में छुट्टी माँगी थी और उनके ठिकाने की जानकारी सरकार के पास है।
खड़गे ने KPSC घोटाले पर विपक्ष को घेरते हुए पूछा कि निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार को आयोग में किसने नियुक्त किया।
एक अपुष्ट दावे के अनुसार साहूकार ने KPSC अध्यक्ष पद के लिए कथित तौर पर ₹200 करोड़ दिए — इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
खड़गे ने BJP-JD(S) पर राजनीतिक प्रासंगिकता के लिए उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगाया।

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 28 अगस्त को बेंगलुरु में केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के उन आरोपों का कड़ा जवाब दिया, जिनमें आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार के कथित तौर पर गायब होने पर सवाल उठाए गए थे। खड़गे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें अधिकारी के ठिकाने की पूरी जानकारी है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) या जनता दल (एस) को यह जानकारी सौंपना उनकी कोई बाध्यता नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार कर्नाटक राज्य लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े बताए जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उनके ठिकाने को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए थे। केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार इस अधिकारी को बचा रही है।

पत्रकारों से बात करते हुए खड़गे ने पूछा, 'क्या आईएएस अधिकारी भाग गया है या वह हमारे साथ है? कुमारस्वामी को इसके बारे में क्या पता है?' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारी ने लिखित रूप में छुट्टी का अनुरोध किया था और संबंधित दस्तावेज़ उपलब्ध हैं।

सरकार का रुख

खड़गे ने तर्क दिया कि यदि कोई अधिकारी औपचारिक रूप से अनुमति माँगता है, तो सरकार उस पर अविश्वास नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, 'अगर कोई अधिकारी लिखित में छुट्टी माँगता है, तो क्या हमें उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए? जब वह वापस आएगा, तो हम पूछताछ करेंगे कि क्या वह झूठ बोल रहा था।' उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानेंद्र कुमार के लौटने पर तथ्यों की पूरी पड़ताल की जाएगी।

कुमारस्वामी और जेडी(एस) पर तीखा हमला

खड़गे ने कुमारस्वामी और जेडी(एस) पर राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'इतने दिनों तक भाजपा को मेरी जरूरत थी। अब जेडी(एस) को मेरी जरूरत है। अगर वे मुझ पर आरोप लगाकर प्रासंगिक बने रहना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करने दें।'

उन्होंने कुमारस्वामी के उस पुराने बयान का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने BJP-RSS को 'जहरीला सांप' बताया था और पूछा कि क्या वे अब यह बात भूल गए हैं। खड़गे ने बेंगलुरु स्थित आरएसएस दफ्तर 'केशव कृपा' का उल्लेख करते हुए कहा कि विरोधी नेता राजनीतिक तरक्की की उम्मीद में उन पर हमले कर रहे हैं।

केपीएससी घोटाले पर पलटवार

खड़गे ने KPSC घोटाले पर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने पूछा कि निलंबित KPSC अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार को आयोग का सदस्य और बाद में अध्यक्ष किसने नियुक्त किया। उन्होंने एक अपुष्ट दावे का भी उल्लेख किया — जिसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है — कि साहूकार ने KPSC अध्यक्ष पद पाने के लिए कथित तौर पर ₹200 करोड़ दिए। खड़गे ने यह भी पूछा कि साहूकार के घर पर पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा और बी.वाई. विजयेंद्र की तस्वीरें क्यों हैं। उन्होंने कहा, 'ये आरोप आपके अपने ही दोस्तों की तरफ से लगाए जा रहे हैं।'

केंद्र से कर्नाटक को क्या मिला

खड़गे ने कुमारस्वामी से यह भी पूछा कि केंद्रीय मंत्री के रूप में वे कर्नाटक के लिए क्या लेकर आए हैं। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब KPSC भर्ती प्रक्रिया को लेकर राज्य में राजनीतिक तनाव चरम पर है और सत्तारूढ़ कांग्रेस तथा विपक्षी BJP-JD(S) गठबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह KPSC भर्ती घोटाले की जाँच की दिशा और राजनीतिक जवाबदेही की लड़ाई है। खड़गे का 'छुट्टी के दस्तावेज़ हैं' वाला बचाव तब तक पर्याप्त नहीं लगता जब तक वे दस्तावेज़ सार्वजनिक न हों — पारदर्शिता का दावा पारदर्शिता नहीं है। दूसरी ओर, कुमारस्वामी का आक्रामक रुख इस तथ्य को नहीं छुपा सकता कि BJP-JD(S) के कार्यकाल में ही KPSC अध्यक्ष की नियुक्ति हुई थी — यह प्रश्न अभी अनुत्तरित है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार और KPSC विवाद क्या है?
आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार कर्नाटक राज्य लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े बताए जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार उनके ठिकाने को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए, जिस पर गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि अधिकारी ने लिखित में छुट्टी माँगी थी और उनकी जानकारी सरकार के पास है।
कुमारस्वामी ने प्रियांक खड़गे पर क्या आरोप लगाए?
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार को बचा रही है और खड़गे के पहले के बयानों पर सवाल उठाए। उन्होंने अधिकारी के कथित गायब होने को लेकर सरकार की जवाबदेही माँगी।
खड़गे ने KPSC अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार के बारे में क्या कहा?
खड़गे ने विपक्ष से पूछा कि निलंबित KPSC अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार को आयोग का सदस्य और बाद में अध्यक्ष किसने नियुक्त किया। उन्होंने एक अपुष्ट दावे का भी उल्लेख किया कि साहूकार ने कथित तौर पर ₹200 करोड़ देकर यह पद हासिल किया — हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
खड़गे ने BJP-JD(S) पर क्या आरोप लगाए?
खड़गे ने कहा कि BJP और JD(S) के नेता राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए उन्हें निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कुमारस्वामी के उस पुराने बयान का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने BJP-RSS को 'जहरीला सांप' कहा था और पूछा कि क्या वे अब इसे भूल गए हैं।
ज्ञानेंद्र कुमार की छुट्टी पर सरकार का क्या कहना है?
गृह मंत्री खड़गे ने बताया कि अधिकारी ने औपचारिक रूप से लिखित छुट्टी का अनुरोध किया था और उससे संबंधित दस्तावेज़ उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानेंद्र कुमार के वापस लौटने पर सरकार तथ्यों की पूरी पड़ताल करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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