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केपीएससी घोटाला: आईएएस ज्ञानेंद्र कुमार के बेंगलुरु आवास पर ईडी की 9 घंटे की तलाशी, अहम दस्तावेज़ गायब

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केपीएससी घोटाला: आईएएस ज्ञानेंद्र कुमार के बेंगलुरु आवास पर ईडी की 9 घंटे की तलाशी, अहम दस्तावेज़ गायब

सारांश

केपीएससी भर्ती घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई — आईएएस ज्ञानेंद्र कुमार के बेंगलुरु आवास पर 9 घंटे की तलाशी, लेकिन अधिकारी तीन दिन पहले ही लैपटॉप और ज़रूरी दस्तावेज़ लेकर उत्तर प्रदेश रवाना हो गए थे। ईडी ने नोटिस चिपकाया, पूछताछ के लिए पेश होने का निर्देश।

मुख्य बातें

ईडी ने 24 अगस्त को बेंगलुरु में आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार के आवास पर 9 घंटे तलाशी ली।
सूत्रों के अनुसार, ज्ञानेंद्र कुमार तलाशी से तीन दिन पहले ही लैपटॉप, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर उत्तर प्रदेश रवाना हो गए थे।
आरोप है कि केपीएससी भर्ती में उम्मीदवारों से ₹70–80 लाख तक की रिश्वत माँगी गई।
तलाशी में एक डायरी , कुछ रिकॉर्ड और बैंक दस्तावेज़ बरामद; अधिकांश महत्वपूर्ण सामग्री गायब।
ईडी ने आवास पर नोटिस चिपकाया — अधिकारी को पूछताछ के लिए पेश होने का निर्देश।
ज्ञानेंद्र कुमार 2016 बैच के आईएएस हैं और मार्च 2026 तक केपीएससी में परीक्षा नियंत्रक रह चुके हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार, 24 अगस्त को बेंगलुरु में 2016 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार के आवास पर लगभग 9 घंटे तक छापेमारी की। यह कार्रवाई कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जाँच के तहत की गई। सूत्रों के अनुसार, तलाशी के दौरान अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ आवास पर मौजूद नहीं मिले।

मुख्य घटनाक्रम

ईडी की टीम सीआरपीएफ जवानों के साथ तीन वाहनों में अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स पहुँची। प्रवेश द्वार प्रारंभ में बंद था और सुरक्षाकर्मियों ने कथित तौर पर अंदर जाने से रोका। जाँच एजेंसी द्वारा ज्ञानेंद्र कुमार से संपर्क करने के बाद गेट खोला गया, लेकिन आवास बंद मिला — जिसके बाद ताला खोलने के लिए एक लॉकस्मिथ को बुलाना पड़ा। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई।

सूत्रों का दावा है कि ज्ञानेंद्र कुमार तलाशी से तीन दिन पहले ही दो बड़े बैग लेकर बेंगलुरु से उत्तर प्रदेश रवाना हो गए थे और अपने साथ लैपटॉप, मोबाइल फोन तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले गए। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बताया कि अधिकारी अपने बीमार पिता से मिलने उत्तर प्रदेश गए थे।

तलाशी में क्या मिला

जाँच दल ने स्कैनर की मदद से अलमारियों, दीवारों और फर्श के नीचे की जगहों की गहन जाँच की। तलाशी में एक डायरी और कुछ रिकॉर्ड बरामद हुए। ईडी ने बैंक स्टेटमेंट और उन निजी कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की, जिन्हें कथित तौर पर सरकारी भर्ती से संबंधित जिम्मेदारियाँ सौंपी गई थीं।

हालाँकि, सूत्रों के अनुसार कुछ पुराने कपड़ों और फर्नीचर के अलावा अधिकारियों को जाँच के लिहाज़ से बेहद कम सामग्री मिली। तलाशी समाप्त होने के बाद ईडी ने आवास पर एक नोटिस चिपकाया, जिसमें ज्ञानेंद्र कुमार को पूछताछ के लिए एजेंसी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है।

केपीएससी घोटाले की पृष्ठभूमि

आरोप है कि केपीएससी के अंतर्गत पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों से नौकरी दिलाने के बदले कथित तौर पर ₹70 से 80 लाख तक की रिश्वत माँगी गई। ज्ञानेंद्र कुमार ने मार्च 2026 तक केपीएससी में परीक्षा नियंत्रक के रूप में कार्य किया था और कर्नाटक प्रशासनिक सेवा (केएएस) परीक्षा तथा पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया के संचालन से सीधे जुड़े थे।

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि केपीएससी से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप राज्य में नए नहीं हैं — पिछले एक दशक में कई बार भर्ती अनियमितताओं की जाँच हो चुकी है।

आगे क्या होगा

फिलहाल ज्ञानेंद्र कुमार से संपर्क नहीं हो पा रहा है। ईडी ने उन्हें नोटिस जारी कर पेश होने का निर्देश दिया है। जाँच एजेंसी की आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि अधिकारी कब और कैसे एजेंसी के सामने प्रस्तुत होते हैं। मामले में और गिरफ्तारियों या समन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सवाल उठता है कि एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी बिना किसी रोक-टोक के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज़ लेकर राज्य छोड़ने में कैसे सफल रहे। केपीएससी जैसी संस्था में भर्ती घोटाले का आरोप केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं में जनता के भरोसे पर सीधा प्रहार है — और जवाबदेही तय होना ज़रूरी है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केपीएससी घोटाला क्या है और इसमें ज्ञानेंद्र कुमार की क्या भूमिका है?
केपीएससी घोटाले में आरोप है कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों से नौकरी के बदले ₹70 से 80 लाख तक की रिश्वत ली गई। आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार मार्च 2026 तक केपीएससी में परीक्षा नियंत्रक थे और केएएस परीक्षा व पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े थे।
ईडी की तलाशी में क्या मिला?
तलाशी में एक डायरी, कुछ रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट बरामद हुए। हालाँकि, सूत्रों के अनुसार अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ आवास पर नहीं मिले, क्योंकि अधिकारी तलाशी से पहले ही इन्हें साथ ले जा चुके थे।
ज्ञानेंद्र कुमार तलाशी के समय कहाँ थे?
सूत्रों के अनुसार, ज्ञानेंद्र कुमार ईडी की तलाशी से तीन दिन पहले ही बेंगलुरु से उत्तर प्रदेश चले गए थे। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बताया कि वे अपने बीमार पिता से मिलने गए थे। फिलहाल अधिकारी से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
ईडी ने आगे क्या कदम उठाया है?
तलाशी के बाद ईडी ने ज्ञानेंद्र कुमार के आवास पर एक नोटिस चिपकाया है, जिसमें उन्हें पूछताछ के लिए एजेंसी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई अधिकारी की उपस्थिति पर निर्भर करेगी।
क्या केपीएससी से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले पहले भी सामने आए हैं?
हाँ, कर्नाटक में केपीएससी से जुड़ी भर्ती अनियमितताओं की जाँच पहले भी हो चुकी है। पिछले एक दशक में कई बार भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, जिससे राज्य की सार्वजनिक सेवा भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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