हसन DC के.एस. लता कुमारी ने रहस्यमय पोस्ट से दिया जवाब, विधायक एच.डी. रेवन्ना की टिप्पणियों पर विवाद
सारांश
मुख्य बातें
हसन जिले की उपायुक्त के.एस. लता कुमारी और जनता दल (सेकुलर) के विधायक एच.डी. रेवन्ना के बीच तीखी नोकझोंक तब सामने आई, जब रेवन्ना ने हसन में मीडिया को संबोधित करते हुए जिले में अधिकारी की तैनाती और कामकाज पर खुलकर सवाल उठाए। इसके कुछ दिनों बाद उपायुक्त ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमय संदेश साझा किया, जिसे राजनीतिक हलकों में रेवन्ना की आलोचनाओं के प्रत्युत्तर के रूप में देखा जा रहा है।
विधायक की आलोचना और उपायुक्त का संदेश
जेडी(एस) के अन्य नेताओं की उपस्थिति में शुक्रवार को बोलते हुए विधायक रेवन्ना ने कहा, 'मैंने 30 साल तक विधायक के रूप में काम किया है और मैंने कभी ऐसी उपायुक्त नहीं देखी। मुझे नहीं पता कि वे उन्हें कहाँ से लाए हैं और यहाँ तैनात कर दिया है।' उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या उपायुक्त हसन जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में ईमानदारी से काम कर रही हैं।
इन टिप्पणियों के बाद उपायुक्त लता कुमारी ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'अगर वे आपको नियंत्रित नहीं कर पाएँगे, तो वे आपसे नफरत करने लगेंगे।' हालाँकि उन्होंने अपनी पोस्ट में रेवन्ना का नाम नहीं लिया और न ही सीधे उनकी टिप्पणियों का संदर्भ दिया, लेकिन इस पोस्ट को हाल की आलोचनाओं के परिप्रेक्ष्य में व्यापक रूप से पढ़ा जा रहा है।
विवाद की पृष्ठभूमि: ग्राम पंचायत चुनाव और आरक्षण विवाद
यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब आगामी ग्राम पंचायत चुनावों में आरक्षण प्रक्रिया को लेकर हसन जिले में पहले से विवाद चल रहा है। रेवन्ना ने इसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान उपायुक्त के कामकाज पर सवाल उठाए थे। गौरतलब है कि हसन पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा का पैतृक जिला है और उनके परिवार का यहाँ दशकों से गहरा राजनीतिक प्रभाव रहा है।
रेवन्ना, केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के भाई और देवेगौड़ा के पुत्र हैं — जो इस विवाद को महज़ एक स्थानीय प्रशासनिक मतभेद से कहीं अधिक राजनीतिक वज़न देता है।
पुराना इतिहास: रोहिणी सिंदूरी प्रकरण से तुलना
यह पहली बार नहीं है जब हसन जिले में किसी वरिष्ठ महिला अधिकारी और रेवन्ना के बीच सार्वजनिक टकराव हुआ हो। 2017 से 2019 के बीच वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रोहिणी सिंदूरी के हसन उपायुक्त रहते हुए दोनों के बीच हाई-प्रोफाइल विवाद चरम पर पहुँच गया था।
सिंदूरी ने जिले में अवैध रेत भंडारण और खनन नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी, जिसका कथित तौर पर जेडी(एस) से जुड़े स्थानीय राजनीतिक पदाधिकारियों ने विरोध किया। अनधिकृत गतिविधियों के लिए जेडी(एस) से संबद्ध स्थानीय पंचायत नेताओं को नोटिस जारी होने पर तनाव और गहरा गया था।
उस दौर में तत्कालीन जिला प्रभारी मंत्री रेवन्ना ने कई बार सिंदूरी के तबादले के लिए दबाव बनाया था। सिंदूरी ने अदालतों और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के ज़रिए कानूनी लड़ाई लड़कर अपने प्रशासनिक अधिकार बरकरार रखे थे। रेवन्ना ने खुले तौर पर सिंदूरी की प्रशासनिक शैली की आलोचना की थी और स्थानीय शैक्षिक सुधारों — जैसे एसएसएलसी (कक्षा 10) परीक्षा उत्तीर्ण प्रतिशत — का श्रेय जिला प्रशासन के बजाय अपनी पत्नी भवानी रेवन्ना को दिया था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और व्यापक असर
इस ताज़ा विवाद ने राजनीतिक गलियारों में फिर से बहस छेड़ दी है कि क्या जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिकारियों पर दबाव बनाने की परिपाटी प्रशासनिक स्वायत्तता को कमज़ोर करती है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियाँ अधिकारियों के मनोबल को प्रभावित करती हैं और निष्पक्ष प्रशासन की राह में बाधा बनती हैं।
फिलहाल उपायुक्त लता कुमारी ने मीडिया को कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। यह देखना बाकी है कि कर्नाटक सरकार इस विवाद पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं।