रेवंत रेड्डी पर 'सुवेंदु वाला कदम' की अटकलें: तेलंगाना कांग्रेस ने भाजपा सांसद अरविंद को दिया करारा जवाब

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रेवंत रेड्डी पर 'सुवेंदु वाला कदम' की अटकलें: तेलंगाना कांग्रेस ने भाजपा सांसद अरविंद को दिया करारा जवाब

सारांश

भाजपा सांसद धरम पुरी अरविंद ने दावा किया कि CM रेवंत रेड्डी 'सुवेंदु अधिकारी जैसा' कदम उठा सकते हैं — और तेलंगाना कांग्रेस ने तत्काल जवाब दिया। कांग्रेस एमएलसी दयाकर ने अरविंद को 'किराए का नेता' बताते हुए भाजपा के अपने दलबदलुओं की याद दिलाई।

मुख्य बातें

भाजपा सांसद धरम पुरी अरविंद ने दावा किया कि CM रेवंत रेड्डी सुवेंदु अधिकारी की तरह पार्टी बदल सकते हैं।
अरविंद ने हैदराबाद में PM मोदी और रेवंत रेड्डी के बीच हुए आदान-प्रदान को आधार बनाया, जिसमें मोदी ने कहा था 'मेरे से ही जुड़ो'।
कांग्रेस एमएलसी अडांकी दयाकर ने अरविंद को 'किराए का नेता' बताते हुए बयान को 'राजनीतिक अज्ञानता' कहा।
दयाकर ने याद दिलाया कि सुवेंदु अधिकारी और हिमंता बिस्वा सरमा खुद भाजपा में कांग्रेस से आए हैं।
रेवंत रेड्डी की ओर से इस विवाद पर अभी तक कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को लेकर निजामाबाद से भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद धरम पुरी अरविंद की विवादित टिप्पणी के बाद तेलंगाना कांग्रेस ने मंगलवार, 19 मई को तीखा पलटवार किया। अरविंद ने दावा किया था कि रेवंत रेड्डी भी पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी की तरह पार्टी बदल सकते हैं — एक ऐसा बयान जिसे कांग्रेस ने 'राजनीतिक अज्ञानता' करार दिया।

भाजपा सांसद का विवादित बयान

सोमवार को दिए एक बयान में अरविंद ने कहा था कि जिस प्रकार सुवेंदु अधिकारी ने 2020 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर भाजपा का दामन थामा था, उसी तरह रेवंत रेड्डी भी राजनीतिक पाला बदल सकते हैं। अरविंद ने यह भी संकेत दिया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच किसी प्रकार की नज़दीकी या समझ हो सकती है।

अरविंद ने कहा, 'मैं भाजपा का एक छोटा कार्यकर्ता हूँ, इसलिए मेरे पास पूरी जानकारी नहीं है। लेकिन जैसे पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी भाजपा के साथ आए थे, वैसे ही रेवंत रेड्डी भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ वैसा ही रिश्ता बनाने की कोशिश कर सकते हैं।'

मूल संदर्भ: हैदराबाद कार्यक्रम और मोदी की टिप्पणी

यह विवाद हैदराबाद में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसमें मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया था कि वे तेलंगाना को वैसा ही सहयोग दें जैसा तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते मोदी को दिया था।

इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने मजाकिया लहजे में कहा था, 'आप जहाँ पहुँचना चाहते हैं, वहाँ नहीं पहुँच पाएंगे... अच्छा है कि मेरे से ही जुड़ो।' उन्होंने यह भी कहा था कि यदि वे रेड्डी की माँग मान लें तो तेलंगाना को केंद्र से मिलने वाली सहायता आधी हो जाएगी। भाजपा सांसद अरविंद ने इसी आदान-प्रदान को अपने बयान का आधार बनाया।

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस नेता और एमएलसी अडांकी दयाकर ने अरविंद के बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भाजपा सांसद में बुनियादी राजनीतिक समझ का अभाव है। दयाकर ने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकास के लिए रेवंत रेड्डी से हाथ मिलाने की बात कही थी — न कि दलबदल का कोई संकेत।

दयाकर ने व्यंग्यात्मक सवाल उठाया, 'मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं। क्या प्रधानमंत्री मोदी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए रेवंत रेड्डी के साथ आएंगे?'

दयाकर ने अरविंद को यह भी याद दिलाया कि उनके दिवंगत पिता धरमपुरी श्रीनिवास वरिष्ठ कांग्रेसी नेता थे और उनकी विरासत के बिना अरविंद की कोई स्वतंत्र राजनीतिक पहचान नहीं होती।

भाजपा के 'बाहरी नेताओं' पर कांग्रेस का तंज

अरविंद ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने दशकों से पार्टी में काम कर रहे वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी कर तेलुगु देशम पार्टी (TDP) से आए रेवंत रेड्डी को मुख्यमंत्री की कुर्सी दे दी। इस पर दयाकर ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा ने भी अपने मूल नेताओं को मुख्यमंत्री नहीं बनाया है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सुवेंदु अधिकारी और हिमंता बिस्वा सरमा — दोनों पहले कांग्रेस में थे और बाद में भाजपा में शामिल हुए। दयाकर ने अरविंद को 'किराए का नेता' बताते हुए कहा कि भाजपा उन्हें कभी वास्तविक राजनीतिक पहचान नहीं देगी।

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब तेलंगाना में कांग्रेस सरकार और केंद्र के बीच संबंध कई मुद्दों पर तनावपूर्ण बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा की ऐसी टिप्पणियाँ राज्य में कांग्रेस की एकजुटता को कमज़ोर करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं। रेवंत रेड्डी की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन रणनीतिक रूप से सोचा-समझा — तेलंगाना कांग्रेस में असंतोष का बीज बोने की कोशिश। गौरतलब है कि रेवंत रेड्डी की TDP पृष्ठभूमि और मोदी के साथ उनके सार्वजनिक संवाद को भाजपा बार-बार अपने आख्यान में इस्तेमाल करती रही है। लेकिन कांग्रेस का पलटवार भी उतना ही चतुर है — भाजपा के अपने 'आयातित' नेताओं की सूची गिनाकर उसने दलबदल की बहस को उलट दिया। असली सवाल यह है कि क्या यह शाब्दिक लड़ाई तेलंगाना की जनता के लिए प्रासंगिक मुद्दों — जैसे केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध — से ध्यान हटाने का काम कर रही है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा सांसद धरम पुरी अरविंद ने रेवंत रेड्डी के बारे में क्या कहा?
अरविंद ने दावा किया कि CM रेवंत रेड्डी पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी की तरह पार्टी बदल सकते हैं, जिन्होंने 2020 में TMC छोड़कर भाजपा जॉइन की थी। उन्होंने यह भी कहा कि रेवंत रेड्डी और PM मोदी के बीच किसी प्रकार की नज़दीकी हो सकती है।
तेलंगाना कांग्रेस ने इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
कांग्रेस एमएलसी अडांकी दयाकर ने अरविंद के बयान को 'राजनीतिक अज्ञानता' बताते हुए खारिज किया। उन्होंने कहा कि रेवंत रेड्डी पहले ही राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की बात कह चुके हैं, और अरविंद को 'किराए का नेता' करार दिया।
हैदराबाद कार्यक्रम में PM मोदी ने रेवंत रेड्डी से क्या कहा था?
रेवंत रेड्डी ने मोदी से तेलंगाना को वैसा सहयोग देने का अनुरोध किया था जैसा मनमोहन सिंह ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते मोदी को दिया था। इस पर मोदी ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि यदि वे यह माँग मानें तो तेलंगाना की केंद्रीय सहायता आधी हो जाएगी, और 'अच्छा है कि मेरे से ही जुड़ो।'
दयाकर ने भाजपा के दलबदलुओं का उदाहरण क्यों दिया?
अरविंद ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने TDP से आए रेवंत रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाकर अपने पुराने नेताओं की अनदेखी की। दयाकर ने इसके जवाब में कहा कि भाजपा के सुवेंदु अधिकारी और हिमंता बिस्वा सरमा भी कांग्रेस से आए हैं, इसलिए भाजपा को यह आरोप लगाने का नैतिक अधिकार नहीं है।
क्या रेवंत रेड्डी ने इस विवाद पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की ओर से इस विवाद पर अभी तक कोई सीधी सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। कांग्रेस की ओर से एमएलसी दयाकर ने पार्टी का पक्ष रखा।
राष्ट्र प्रेस
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