पीयूष गोयल का टोक्यो में आह्वान: भारत में '1,580 सुजुकी' बनाएं जापानी कंपनियाँ
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 24 अगस्त 2026 को टोक्यो में जापानी कंपनियों से भारत में अपना कारोबार विस्तार करने का आग्रह किया और कहा कि वे सुजुकी की तर्ज़ पर सफलता की नई इबारत लिखें। जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (JCCI) की जापान-भारत बिज़नेस कंसल्टेटिव कमिटी (JIBCC) और भारतीय दूतावास के साथ आयोजित एक गोलमेज सम्मेलन में गोयल ने कहा, "हम चाहते हैं कि भारत में काम कर रही 1,580 जापानी कंपनियों में से हर एक 'सुजुकी' बने।"
सुजुकी की सफलता — एक प्रेरणा
गोयल ने भारत में सुजुकी के चार दशकों के सफर को एक मिसाल के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा, "आज हम भारत से कुछ सबसे बड़े और सबसे ज़्यादा मुनाफा कमाने वाले ऑपरेशन होते हुए देख रहे हैं।" केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यही मॉडल अन्य जापानी कंपनियों के लिए भी अनुकरणीय हो सकता है।
गोयल ने कहा, "हम उन 1,580 कंपनियों के लिए ऐसा ही सफर देखना चाहते हैं जिनका आप प्रतिनिधित्व करते हैं।" यह संदेश उस समय आया है जब भारत और जापान के बीच निवेश संबंधों को नई ऊँचाई देने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।
भारत की युवा शक्ति और बाज़ार की संभावनाएँ
केंद्रीय मंत्री ने जापानी कारोबारियों को भारत की जनसांख्यिकीय ताकत से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि भारत की कामकाजी उम्र की आबादी की औसत आयु 30 वर्ष से कम है और यह कई दशकों तक युवा बनी रहेगी। गोयल के अनुसार, इससे जापानी कंपनियों को बड़ी संख्या में कुशल कार्यबल और एक विशाल उपभोक्ता बाज़ार तक पहुँच मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इस दशक में भारत में काम कर रही जापानी कंपनियों की संख्या मौजूदा स्तर से दोगुनी होनी चाहिए — यह एक महत्वाकांक्षी, लेकिन स्पष्ट लक्ष्य है।
विकसित भारत 2047 — ₹30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
गोयल ने भारत के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्य को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने पर, यानी 2047 तक, मौजूदा 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से बढ़कर 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का संकल्प रखता है। उन्होंने कहा, "यह एक बड़ा लक्ष्य है, लेकिन 1.4 अरब भारतीय इसे हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
गौरतलब है कि यह लक्ष्य सात गुना से अधिक आर्थिक विस्तार की माँग करता है — एक ऐसी छलाँग जो जापानी निवेश जैसे दीर्घकालिक साझेदारों के बिना संभव नहीं होगी।
75 वर्षों की कूटनीतिक साझेदारी — नई दिशा
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत और जापान को अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगाँठ का उपयोग व्यापारिक सहयोग को और सुदृढ़ करने में करना चाहिए। यह यात्रा इस संदर्भ में विशेष महत्व रखती है क्योंकि गोयल 200 से अधिक प्रतिनिधियों वाले एक बड़े भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, जो 24 अगस्त से 27 अगस्त तक जापान की चार दिवसीय यात्रा पर है।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की होड़ में भारत एक प्रमुख विकल्प के रूप में उभर रहा है, और जापानी कंपनियाँ चीन-केंद्रित निर्भरता कम करने की रणनीति पर विचार कर रही हैं।