पीयूष गोयल: भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने को सरकार-उद्योग साझेदारी अनिवार्य, विकसित भारत 2047 पर जोर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीयूष गोयल: भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने को सरकार-उद्योग साझेदारी अनिवार्य, विकसित भारत 2047 पर जोर

सारांश

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एसोचैम समिट में स्पष्ट संदेश दिया — वैश्विक उथल-पुथल भारत के लिए खतरा नहीं, अवसर है। 1,800 GCC और 20 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के आँकड़ों के साथ उन्होंने सरकार-उद्योग साझेदारी को विकसित भारत 2047 की बुनियाद बताया।

मुख्य बातें

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 19 मई 2026 को एसोचैम इंडिया बिजनेस रिफॉर्म समिट में सरकार-उद्योग साझेदारी को विकसित भारत 2047 के लिए अनिवार्य बताया।
भारत में लगभग 1,800 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) कार्यरत हैं, जो 20 लाख प्रत्यक्ष और करीब 10 करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगार दे रहे हैं।
गोयल ने वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को भारत के लिए आपूर्ति श्रृंखला मज़बूती और त्वरित सुधार का अवसर बताया।
सरकार डेटा केंद्रों और क्लाउड सेवाओं में निवेश के लिए नवीकरणीय ऊर्जा व मजबूत विद्युत अवसंरचना के ज़रिये अनुकूल माहौल बना रही है।
AI और साइबर सुरक्षा को उन्होंने भारत के सेवा क्षेत्र के लिए अगली बड़ी विकास संभावना बताया।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार, 19 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एसोचैम इंडिया बिजनेस रिफॉर्म समिट 2026 में कहा कि भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सुदृढ़ करने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए सरकार एवं उद्योग जगत के बीच साझेदारी को और अधिक गहरा करना अपरिहार्य है। उन्होंने कारोबार में आसानी को बढ़ावा देने को भी इस साझेदारी का अभिन्न हिस्सा बताया।

वैश्विक अनिश्चितता को अवसर में बदलने का आह्वान

गोयल ने कहा कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और पश्चिम एशिया संकट को नकारात्मक दृष्टि से नहीं, बल्कि भारत के लिए व्यापारिक प्रक्रियाओं को मज़बूत करने, त्वरित सुधार लागू करने, अधिक लचीलापन विकसित करने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सशक्त बनाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने व्यवसायों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि घबराहट नहीं, बल्कि रणनीतिक सजगता ही सफलता की कुंजी है।

गोयल ने कहा, 'भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी किसी संकट को व्यर्थ नहीं जाने दिया' और विश्वास जताया कि देश मौजूदा वैश्विक जोखिमों को विकास एवं सुधार के अवसरों में परिवर्तित करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी टैरिफ नीतियों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन के बीच भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।

कोविड-19 के अनुभव से सीख और उत्पादकता पर बल

मंत्री ने कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने ऐसी अप्रत्याशित चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। उन्होंने कहा कि उस दौर में मिले अनुभवों ने डिजिटल सहभागिता और वर्क फ्रॉम होम मॉडल की प्रभावशीलता को सिद्ध किया। गोयल ने अपव्यय कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और ऊर्जा दक्षता उपायों को अपनाने सहित अधिक कुशल व्यावसायिक प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स: रोजगार और वैश्विक विश्वास का केंद्र

भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की तेज़ वृद्धि का उल्लेख करते हुए गोयल ने बताया कि देश में इस समय लगभग 1,800 GCC कार्यरत हैं, जो लगभग 20 लाख प्रत्यक्ष और करीब 10 करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में तेज़ी से पहचान रही हैं, जिसके पास युवा और प्रतिभाशाली मानव संसाधन हैं जो वैश्विक परिचालन में सक्षम योगदान दे सकते हैं।

उभरती प्रौद्योगिकी और डिजिटल अवसंरचना में निवेश

गोयल ने भारत के सेवा क्षेत्र में गहरा विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा जैसी उभरती प्रौद्योगिकियाँ नए अवसरों के द्वार खोलेंगी। उन्होंने कहा, 'भारत को उभरती टेक्नोलॉजी, व्यापार सुधारों और वैश्विक विकास को अवसरों के रूप में देखना चाहिए।'

सरकार की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि भरोसेमंद वैश्विक साझेदारियों, कम लागत पर डेटा की उपलब्धता, नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और मजबूत विद्युत अवसंरचना के ज़रिये डेटा केंद्रों और क्लाउड सेवाओं में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है। गौरतलब है कि भारत सरकार डेटा सेंटर नीति और राष्ट्रीय AI मिशन के तहत पहले से ही इस दिशा में कदम उठा रही है।

आगे की राह

एसोचैम समिट में गोयल का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब भारत कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश तेज़ हो रही है। उद्योग जगत की नज़रें अब इस बात पर होंगी कि सरकार-उद्योग साझेदारी की यह प्रतिबद्धता ठोस नीतिगत कदमों में कितनी तेज़ी से तब्दील होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे ठोस नीतिगत ढाँचे की कसौटी पर परखना ज़रूरी है — क्योंकि ऐसे समिट संबोधन अक्सर घोषणाओं तक सीमित रह जाते हैं। 1,800 GCC और 20 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के आँकड़े उत्साहजनक हैं, पर यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने रोजगार टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुँचे हैं। कारोबार में आसानी के मोर्चे पर भारत की वैश्विक रैंकिंग में सुधार हुआ है, फिर भी ज़मीनी स्तर पर अनुपालन बोझ और नियामकीय अनिश्चितता उद्योग की पुरानी शिकायत बनी हुई है। असली साझेदारी तभी सिद्ध होगी जब समिट की प्रतिबद्धताएँ मापने योग्य नीतिगत बदलावों में तब्दील हों।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल ने एसोचैम समिट 2026 में क्या कहा?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 19 मई 2026 को एसोचैम इंडिया बिजनेस रिफॉर्म समिट में कहा कि भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए सरकार और उद्योग के बीच साझेदारी को गहरा करना अनिवार्य है। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितताओं को अवसर में बदलने का आह्वान किया।
भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) से कितने रोजगार मिल रहे हैं?
गोयल के अनुसार भारत में इस समय लगभग 1,800 GCC कार्यरत हैं, जो करीब 20 लाख प्रत्यक्ष और लगभग 10 करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत के युवा और प्रतिभाशाली कार्यबल के कारण इसे भरोसेमंद वैश्विक साझेदार मान रही हैं।
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य क्या है और इसमें उद्योग की भूमिका क्यों अहम है?
विकसित भारत 2047 भारत सरकार का वह दीर्घकालिक लक्ष्य है जिसके तहत 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। गोयल का कहना है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी, कारोबार में आसानी और आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती अनिवार्य शर्तें हैं।
सरकार डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं में निवेश के लिए क्या कर रही है?
गोयल ने बताया कि सरकार भरोसेमंद वैश्विक साझेदारियों, कम लागत पर डेटा उपलब्धता, नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और मजबूत विद्युत अवसंरचना के ज़रिये डेटा केंद्रों और क्लाउड सेवाओं में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है।
भारत वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से कैसे निपट रहा है?
गोयल के अनुसार भारत इन अनिश्चितताओं को खतरे के बजाय अवसर के रूप में देख रहा है — व्यापारिक प्रक्रियाएँ मज़बूत करके, त्वरित सुधार लागू करके और आपूर्ति श्रृंखलाओं को लचीला बनाकर। उन्होंने कोविड-19 से मिली सीख का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत अप्रत्याशित चुनौतियों से उबरने में सक्षम है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले