हसन DC के.एस. लता कुमारी बनाम विधायक एच.डी. रेवन्ना: रहस्यमय पोस्ट से भड़की जुबानी जंग
सारांश
मुख्य बातें
हसन जिले की उपायुक्त के.एस. लता कुमारी और जनता दल (सेकुलर) विधायक एच.डी. रेवन्ना के बीच तनातनी उस समय सार्वजनिक हो गई, जब रेवन्ना ने 24 अगस्त 2026 को हसन में मीडिया के सामने अधिकारी की तैनाती और कामकाज पर खुलकर सवाल उठाए। इसके कुछ दिनों बाद उपायुक्त ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमय संदेश साझा किया, जिसे राजनीतिक हलकों में रेवन्ना की टिप्पणियों का परोक्ष जवाब माना जा रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि
एच.डी. रेवन्ना पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पुत्र और केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के भाई हैं। हसन देवेगौड़ा परिवार का पैतृक जिला है और इस परिवार का यहाँ दशकों पुराना राजनीतिक प्रभाव है। आगामी ग्राम पंचायत चुनावों में आरक्षण प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच यह टकराव और भी संवेदनशील हो गया है।
रेवन्ना की टिप्पणियाँ
शुक्रवार को जेडी(एस) के अन्य नेताओं की उपस्थिति में रेवन्ना ने उपायुक्त की नियुक्ति और कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "मैंने 30 साल तक विधायक के रूप में काम किया है और मैंने कभी ऐसी उपायुक्त नहीं देखी। मुझे नहीं पता कि वे उसे कहाँ से लाए हैं और यहाँ तैनात कर दिया है।" उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या उपायुक्त हसन के सभी विधानसभा क्षेत्रों में समान रूप से और ईमानदारी से काम कर रही हैं।
उपायुक्त का परोक्ष जवाब
रेवन्ना की टिप्पणियों के कुछ दिनों बाद के.एस. लता कुमारी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया: "अगर वे आपको नियंत्रित नहीं कर पाएंगे, तो वे आपसे नफरत करने लगेंगे।" हालाँकि उन्होंने अपनी पोस्ट में रेवन्ना का नाम नहीं लिया और न ही उनकी टिप्पणियों का सीधा संदर्भ दिया, फिर भी इस पोस्ट को हाल की आलोचनाओं के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
2017-2019 का पुराना टकराव
यह पहली बार नहीं है जब रेवन्ना और किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के बीच हसन में टकराव हुआ हो। 2017 से 2019 के बीच तत्कालीन उपायुक्त रोहिणी सिंदूरी के कार्यकाल में यह टकराव चरम पर पहुँचा था। सिंदूरी ने जिले में अवैध रेत भंडारण और खनन नेटवर्क के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की थी, जिसका कथित तौर पर स्थानीय राजनीतिक पदाधिकारियों ने विरोध किया। जनता दल (सेकुलर) से जुड़े पंचायत नेताओं को नोटिस जारी होने पर तनाव और बढ़ा।
उस समय जिला प्रभारी मंत्री रहे एच.डी. रेवन्ना ने कई बार सिंदूरी के तबादले के लिए दबाव बनाया। सिंदूरी ने न्यायालयों और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के माध्यम से कानूनी लड़ाई लड़कर अपने प्रशासनिक अधिकार बरकरार रखे। रेवन्ना ने तब सिंदूरी की कार्यशैली और एसएसएलसी परीक्षा परिणाम जैसे विकास मापदंडों पर श्रेय के दावों की भी आलोचना की थी और इन उपलब्धियों का श्रेय अपनी पत्नी भवानी रेवन्ना को दिया था।
राजनीतिक निहितार्थ
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब ग्राम पंचायत चुनावों की आरक्षण प्रक्रिया पर पहले से ही विवाद चल रहा है। आलोचकों का कहना है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा जिला प्रशासन पर इस तरह का खुला दबाव प्रशासनिक स्वायत्तता के लिए चुनौती है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक स्वतंत्रता के बीच का तनाव हसन में नया नहीं है।