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क्या कर्नाटक में ईडी ने पीएसआई भर्ती घोटाले में बड़ी कार्रवाई की, 1.53 करोड़ की संपत्ति जब्त?

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क्या कर्नाटक में ईडी ने पीएसआई भर्ती घोटाले में बड़ी कार्रवाई की, 1.53 करोड़ की संपत्ति जब्त?

सारांश

कर्नाटक में पीएसआई भर्ती घोटाले में ईडी ने 1.53 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई है। जानिए इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे के आरोपों के बारे में।

मुख्य बातें

ईडी ने 1.53 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की हैं।
आवश्यक कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई।
आरोपियों ने रिश्वत के जरिए घोटाले को अंजाम दिया।
जांच अभी भी जारी है और ईडी आगे की कार्रवाई करेगा।
सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

बेंगलुरु, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने कर्नाटक के पीएसआई (पुलिस सब इंस्पेक्टर) भर्ती घोटाले में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए 1.53 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई 23 जनवरी 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत की गई।

जब्त की गई संपत्तियों में पूर्व एडीजीपी (भर्ती) अमृत पॉल और हेड कांस्टेबल श्रीधर एच की आवासीय संपत्तियां शामिल हैं।

ईडी ने यह जांच हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन, सीआईडी बेंगलुरु में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह मामला वर्ष 2021–22 में कर्नाटक पुलिस में पीएसआई की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। उस समय कर्नाटक पुलिस भर्ती सेल ने 545 पीएसआई पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के बाद जारी की गई चयन सूची को लेकर धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे।

ईडी की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उस समय भर्ती के जिम्मेदार अधिकारी अमृत पॉल ने इस साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने ओएमआर शीट्स रखे गए स्ट्रॉन्ग रूम तक अवैध पहुंच दिलाई। अमृत पॉल ने स्ट्रॉन्ग रूम की चाबियों वाली अलमारी की चाबी डिप्टी एसपी शांत कुमार को सौंपी, जिसके बाद उनके सहयोगियों समेत श्रीधर एच ने भी ओएमआर शीट्स में छेड़छाड़ की। इसका मकसद अयोग्य उम्मीदवारों को पास कराना था।

जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने प्रत्येक उम्मीदवार से 30 लाख से 70 लाख रुपए तक की रिश्वत ली। इस अवैध धन को हैंड लोन (निजी उधार) के रूप में दिखाकर छिपाया गया और बाद में इसी पैसे से घर बनाए गए।

इससे पहले ईडी इस मामले में प्रोसिक्यूशन चार्जशीट दाखिल कर चुका है और अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का संज्ञान भी ले लिया है।

ईडी ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच अभी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में भी एक बड़ा चुनौती है। ईडी की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल कानून के पालन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें जनता के प्रति भी जवाबदेह होना चाहिए।
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