बेलगावी में ईडी की छापेमारी दूसरे दिन भी जारी: शिवम एसोसिएट्स पर ₹2,400 करोड़ के घोटाले की जांच
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 8 अगस्त को बेलगावी (कर्नाटक) में शिवम एसोसिएट्स के मालिक शिवानंद नीलन्नावर से जुड़े कथित ₹2,400 करोड़ के वित्तीय घोटाले की जांच के सिलसिले में लगातार दूसरे दिन भी तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई उत्तर कर्नाटक के शिवबसवनगर स्थित एमएस टावर परिसर में केंद्रित रही, जहाँ सीआरपीएफ की सुरक्षा के बीच अधिकारी दस्तावेजों और संपत्ति की बारीकी से जांच करते रहे।
मुख्य घटनाक्रम
शुक्रवार को शुरू हुई तलाशी शनिवार को भी अनवरत जारी रही। इस संयुक्त अभियान में गोवा और मंगलुरु की ईडी टीमें भी शामिल रहीं। जब अधिकारी नीलन्नावर के आवास पर पहुँचे, तब वह वहाँ मौजूद नहीं थे — इसके बाद उनकी पत्नी और भाई को बुलाया गया और संपत्ति तथा दस्तावेजों का विस्तृत निरीक्षण किया गया।
इससे पहले ईडी ने बेलगावी जिले में एक साथ तीन स्थानों पर छापेमारी की थी — शिवबसवनगर का एमएस टावर अपार्टमेंट, बडाकुंद्री गांव में नीलन्नावर का आवास, और चिक्कोडी में उनके कारोबारी साझेदार सुभाष नंदरागी का घर।
घोटाले की पृष्ठभूमि
सीआईडी जांच के अनुसार, शिवम एसोसिएट्स ने कथित तौर पर 40,700 से अधिक निवेशकों से करीब ₹2,400 करोड़ जुटाए। इनमें से लगभग ₹540 करोड़ शेयर बाजार में निवेश किए गए, जिससे करीब ₹170 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। कंपनी पर आरोप है कि उसने निवेशकों को अधिक मुनाफे का प्रलोभन देकर अवैध रूप से जमा राशि एकत्र की।
गौरतलब है कि 15 मई को जिला प्रशासन और पुलिस ने कंपनी पर पहली बार छापा मारा था। इसके बाद मामला दर्ज हुआ और नीलन्नावर को गिरफ्तार किया गया। फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं।
जांच एजेंसियों की भूमिका
प्रारंभिक जांच के बाद यह मामला सीआईडी को सौंपा गया। अब ईडी ने कथित अवैध धन हस्तांतरण को लेकर एफआईआर दर्ज कर स्वतंत्र जांच शुरू की है। एजेंसी विशेष रूप से निवेशकों से जुटाए गए धन के स्रोत, मनी ट्रेल और संबंधित लेन-देन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पोंजी-शैली की योजनाओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता बढ़ी है।
आम निवेशकों पर असर
कथित तौर पर 40 हजार से अधिक निवेशकों की गाढ़ी कमाई इस मामले में फँसी हुई है। इनमें से अधिकांश उत्तर कर्नाटक के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के आम नागरिक बताए जा रहे हैं जिन्होंने अधिक रिटर्न के वादे पर भरोसा किया। मामले की जांच का दायरा बढ़ने के साथ इन निवेशकों की उम्मीदें भी ईडी की कार्रवाई से जुड़ी हैं।
आगे क्या होगा
ईडी की जांच अभी जारी है और मनी ट्रेल की पड़ताल पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की संभावना है। सीआईडी और ईडी की समानांतर जांच से यह मामला कर्नाटक के बड़े वित्तीय घोटालों में शुमार हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति कुर्की और अतिरिक्त गिरफ्तारियाँ भी संभव हैं।