केपीएससी भर्ती घोटाला: पूर्व अध्यक्ष शिवशंकरप्पा के बेंगलुरु आवास पर ईडी की 26 घंटे से छापेमारी जारी
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार के बेंगलुरु स्थित डॉलर्स कॉलोनी आवास पर 19 अगस्त 2026 को भी छापेमारी जारी रखी। मंगलवार से शुरू हुई यह तलाशी बुधवार तक करीब 26 घंटे से अधिक समय तक चल चुकी थी, और दो ईडी अधिकारी रात भर परिसर में ही मौजूद रहे। यह कार्रवाई केपीएससी में 400 वेटरनरी ऑफिसर पदों की भर्ती में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच से जुड़ी है।
छापेमारी का दायरा और ठिकाने
मंगलवार को ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत कर्नाटक और गुजरात में कुल 21 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। कर्नाटक में बेंगलुरु, हसन, चित्रदुर्ग, दावणगेरे, रायचूर, कारवार, कलबुरगी और बेलगावी में तलाशी ली गई, जबकि गुजरात के अहमदाबाद में भी एक ठिकाने पर कार्रवाई हुई।
जिन परिसरों में छापे पड़े उनमें केपीएससी का मुख्य कार्यालय, केपीएससी सदस्य शांता होसमनी का आवास, कथित बिचौलियों के घर, वेटरनरी ऑफिसर पद पर चुने गए कुछ उम्मीदवार और परीक्षा के पेपरों का डिजिटल मूल्यांकन करने वाली कंपनी एड्यूटेस्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड का कार्यालय शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार बरामद दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों की जांच अभी जारी है; अब तक की बरामदगी का पूरा ब्यौरा सामने नहीं आया है।
घोटाले की पृष्ठभूमि
8 जनवरी को 400 वेटरनरी ऑफिसर पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। 17 जुलाई को जैसे ही अंतिम चयन सूची जारी हुई, विवाद तुरंत भड़क उठा। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कथित बिचौलियों ने उम्मीदवारों से संपर्क कर चयन सुनिश्चित कराने के एवज में ₹70 लाख से ₹1 करोड़ तक की रिश्वत मांगी। शिकायतकर्ता ने कथित बिचौलियों की ऑडियो रिकॉर्डिंग ईडी और अन्य जांच एजेंसियों को सौंपी है। शिकायत में पेपर लीक, ओएमआर आंसर शीट से छेड़छाड़ और केपीएससी अधिकारियों के रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप भी शामिल हैं।
विवाद उभरने के बाद राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके चलते केपीएससी ने चयन सूची रोक दी। कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंपी, जिसने बेंगलुरु के विधान सौधा थाने में कई एफआईआर दर्ज कीं और कुछ कथित बिचौलियों को गिरफ्तार भी किया।
हाईकोर्ट का अहम फैसला
इसी बीच कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण आदेश सुनाया। कोर्ट ने शिवशंकरप्पा एस. साहूकार के निलंबन आदेश को रद्द करते हुए अधिकारियों को 7 दिन के भीतर उन्हें पद पर बहाल करने का निर्देश दिया। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब ईडी उनके आवास पर लगातार तलाशी ले रही है, जो इस मामले को कानूनी दृष्टि से और जटिल बनाता है।
जांच का आगे का रास्ता
मामले की सुनवाई फिलहाल कर्नाटक उच्च न्यायालय में जारी है। कुछ याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि सीआईडी की जगह इस जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा जाए। ईडी की समानांतर जांच और हाईकोर्ट की सक्रिय निगरानी के बीच यह मामला कर्नाटक की सार्वजनिक भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।