केपीएससी को बंद करना चाहिए, भ्रष्ट तत्व घुस गए हैं — कर्नाटक सीएम डीके शिवकुमार
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 22 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी और साफ कहा कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) को बंद कर देना चाहिए, क्योंकि उसमें 'बड़े भ्रष्ट तत्व' घुस चुके हैं। उनका यह बयान कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा केपीएससी घोटाले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के आदेश के बाद आया है।
केपीएससी पर मुख्यमंत्री का तीखा रुख
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा, 'सच कहूं तो मैं विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर रहा हूं कि केपीएससी को कैसे बंद किया जाए। केपीएससी को बंद कर देना चाहिए क्योंकि इसमें कुछ बड़े भ्रष्ट तत्व घुस गए हैं। चेयरमैन और अन्य के खिलाफ पहले ही पर्याप्त सबूत मिल चुके हैं।' यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि केपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और उसे भंग करने का कोई भी निर्णय व्यापक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरेगा।
गौरतलब है कि यह पहली बार है जब स्वयं एक मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से संस्था को बंद करने की वकालत की है। उच्च न्यायालय के एसआईटी आदेश पर शिवकुमार ने कहा, 'कोई आपत्ति नहीं है। राज्य पुलिस ने पहले ही जांच की है और बहुत अच्छा काम कर रही है। इस बीच ईडी भी आ गई है और उन्हें भी जांच करने दीजिए।'
एसआईटी और अधिकारियों की नियुक्ति पर सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एसआईटी बन सकती है, लेकिन उसमें अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार सरकार के पास रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार कानूनी तौर पर यह तय करेगी कि किसे नियुक्त किया जाए और किसे नहीं। उनके अनुसार, 'हाईकोर्ट जारी जांच रिपोर्ट की निगरानी कर सकता है', लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार का हस्तक्षेप एक 'वैध अधिकार' है।
सौजन्या केस में सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक के धर्मस्थल (उजिरे) क्षेत्र में 17 वर्षीय कॉलेज छात्रा सौजन्या के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले की जांच के लिए नई एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है। यह मामला लंबे समय से अनसुलझा और बहुचर्चित रहा है।
मुख्यमंत्री ने इस फैसले पर कहा, 'मुझे कल शाम इस बारे में संदेश मिला। मैंने अभी तक फैसला नहीं पढ़ा है। विधानसभा के बाद मैं इसे देखूंगा। हम किसी भी चीज को लेकर चिंतित नहीं हैं। कानून अपना काम करेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी भी जांच या मामले में दखल नहीं देना चाहती।
राज्य की वित्तीय स्थिति पर सफाई
राज्य की वित्तीय सेहत को लेकर उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बचाव की मुद्रा अपनाई। उन्होंने कहा, 'मुझे पता है, वित्त मंत्री के तौर पर कौन से कार्यक्रमों में कटौती करनी है और कौन से जरूरी हैं। हमने पांच गारंटी योजनाएं इसलिए दीं क्योंकि कीमतें काफी बढ़ गई हैं और लोगों की आय कम हो गई है।' उन्होंने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और घरों को मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं को जनकल्याण की आवश्यकता बताया।
केईओएनआईसीएस की स्वर्ण जयंती समारोह में शिरकत
मुख्यमंत्री शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने केईओएनआईसीएस (कर्नाटक राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड) के स्वर्ण जयंती समारोह में हिस्सा लिया। 1976 में स्थापित इस संस्था ने सितंबर 2026 में अपने 50 वर्ष पूरे किए।
शिवकुमार ने कहा कि संस्था ने ग्रामीण छात्रों के भविष्य के लिए एक बड़ा एआई पीसी तैयार किया है जिसे हाल ही में लॉन्च किया गया। उन्होंने घोषणा की कि मैंगलोर और गुलबर्गा में भी इसी तरह के कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। उन्होंने इस संस्था की नींव रखने में देवराज अर्स, एस.एम. कृष्णा और वीरप्पा मोइली के योगदान को याद किया।
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार एक ओर बड़े भ्रष्टाचार विवादों से घिरी है और दूसरी ओर तकनीकी प्रगति का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है। केपीएससी पर मुख्यमंत्री के बयान से आने वाले दिनों में राजनीतिक और कानूनी बहस और तेज होने के संकेत हैं।