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पाकिस्तान पर कर्ज का संकट गहराया: चीन ने 2 अरब डॉलर की अवधि बढ़ाई, IMF ने दिए 2.3 अरब डॉलर

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पाकिस्तान पर कर्ज का संकट गहराया: चीन ने 2 अरब डॉलर की अवधि बढ़ाई, IMF ने दिए 2.3 अरब डॉलर

सारांश

पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलें 2025 में और बढ़ गई हैं — चीन ने 2 अरब डॉलर के कर्ज की अवधि बढ़ाई और IMF को 2.3 अरब डॉलर की नई लाइफलाइन देनी पड़ी। यह तब हो रहा है जब दुनिया के सबसे कमज़ोर देशों पर कर्ज का बोझ रिकॉर्ड 9.4 लाख करोड़ डॉलर पर पहुँच चुका है।

मुख्य बातें

चीन ने 2025 में पाकिस्तान को दिए गए 2 अरब डॉलर के कर्ज की भुगतान अवधि बढ़ाई।
IMF ने EFF और RSF के तहत पाकिस्तान को 2.3 अरब डॉलर की नई वित्तीय सहायता प्रदान की।
निम्न और मध्यम आय वाले देशों का कुल बाहरी कर्ज 2025 में रिकॉर्ड 9.4 लाख करोड़ डॉलर तक पहुँचा।
इन देशों का बाहरी कर्ज 5.5 प्रतिशत बढ़ा — पिछले चार वर्षों की सबसे बड़ी सालाना वृद्धि।
निम्न आय वाले देशों का बाहरी कर्ज 8.9 प्रतिशत बढ़कर 262.4 अरब डॉलर — 2020 के बाद सबसे बड़ी छलाँग।
सबसे कमज़ोर देशों को ही सबसे ऊँची ब्याज दरों पर कर्ज मिल रहा है, जो दीर्घकालिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर कर्ज का बोझ वर्ष 2025 में और गहरा हो गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने पाकिस्तान को दिए गए 2 अरब डॉलर के कर्ज की भुगतान अवधि बढ़ा दी, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने देश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को मज़बूत करने के उद्देश्य से विस्तारित निधि सुविधा (EFF) और लचीलापन एवं स्थिरता सुविधा (RSF) के अंतर्गत 2.3 अरब डॉलर की नई वित्तीय सहायता प्रदान की। बैंकॉक स्थित पेज 3 न्यूज़ की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

वैश्विक कर्ज संकट की पृष्ठभूमि

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान पर बढ़ता कर्ज ऐसे समय में चिंता का विषय बना हुआ है, जब निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMIC) का बाहरी कर्ज भी तेज़ी से बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में इन देशों का कुल बाहरी कर्ज बढ़कर रिकॉर्ड 9.4 लाख करोड़ डॉलर तक पहुँच गया। गौरतलब है कि यह आँकड़ा वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर बढ़ते दबाव का स्पष्ट संकेत है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में निम्न और मध्यम आय वाले देशों का बाहरी कर्ज 5.5 प्रतिशत बढ़ा, जो पिछले चार वर्षों में सबसे बड़ी सालाना वृद्धि है। इसके पीछे बॉन्ड जारी करने में बढ़ोतरी, अमेरिकी डॉलर की कमज़ोरी और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में निवेशकों का दोबारा भरोसा बढ़ना प्रमुख कारण रहे।

सबसे गरीब देशों पर सबसे भारी बोझ

हालाँकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में निजी पूँजी की वापसी हुई है, लेकिन इन देशों को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। विशेष रूप से दुनिया के सबसे गरीब देशों के लिए कर्ज लेना पिछले कई दशकों में सबसे महंगा हो गया है। रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता यह जताई गई है कि जिन देशों की अतिरिक्त कर्ज उठाने की क्षमता सबसे कम है, उन्हें ही सबसे ऊँची ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (IDA) से वित्तीय सहायता पाने के पात्र देशों का बाहरी कर्ज 8.1 प्रतिशत बढ़कर 1.3 लाख करोड़ डॉलर हो गया। वहीं, निम्न आय वाले देशों का बाहरी कर्ज 8.9 प्रतिशत बढ़कर 262.4 अरब डॉलर तक पहुँच गया — यह 2020 के बाद की सबसे बड़ी वृद्धि है।

निजी वित्तपोषण पर बढ़ती निर्भरता

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि निम्न और मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में सकल राष्ट्रीय आय (GNI) के अनुपात में निजी क्षेत्र के कर्ज में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अर्थव्यवस्थाओं के बेहतर प्रदर्शन से कर्ज़दाताओं का इन बाज़ारों में भरोसा बढ़ा और उन्होंने दोबारा निवेश शुरू किया। इसके बावजूद कई सरकारें अपेक्षाकृत ऊँची ब्याज दरों पर कर्ज लेती रहीं।

यह ऐसे समय में आया है जब कर्ज चुकाने की देनदारियाँ लगातार पाँचवें वर्ष बढ़ी हैं। निजी वित्तपोषण पर बढ़ती निर्भरता ने IDA की सहायता के पात्र देशों के लिए कर्ज लेना और महंगा कर दिया है, जो पहले से ही वित्तीय दबाव में हैं।

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता पर खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ऋण बाज़ार में कर्ज देने की गतिविधियाँ दोबारा शुरू होने से विकासशील देशों को कुछ राहत ज़रूर मिली है। लेकिन बढ़ता कर्ज, महंगा निजी वित्तपोषण और भुगतान की बढ़ती देनदारियाँ पाकिस्तान सहित अन्य कमज़ोर अर्थव्यवस्थाओं की दीर्घकालिक स्थिरता के सामने गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान इस कर्ज के जाल से बाहर निकलने के लिए कौन-सी नीतिगत राह अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

निर्भरता का विस्तार अधिक लगता है — यह पाकिस्तान को CPEC के ढाँचे में और गहरे बाँधता है, बिना मूल देनदारी कम किए। IMF की बार-बार की जाने वाली बेलआउट श्रृंखला यह सवाल उठाती है कि संरचनात्मक सुधार कब होंगे, क्योंकि हर किस्त के साथ शर्तें आती हैं लेकिन दीर्घकालिक राजकोषीय अनुशासन नहीं। सबसे चिंताजनक वैश्विक प्रवृत्ति यह है कि जिन देशों की कर्ज उठाने की क्षमता सबसे कम है, उन्हें सबसे महंगा कर्ज मिल रहा है — यह अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था की एक बुनियादी विफलता है जिस पर मुख्यधारा की कवरेज पर्याप्त ध्यान नहीं देती।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2025 में चीन ने पाकिस्तान के कर्ज की अवधि क्यों बढ़ाई?
रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने 2025 में पाकिस्तान को दिए गए 2 अरब डॉलर के कर्ज की भुगतान अवधि बढ़ाई, क्योंकि पाकिस्तान तत्काल पुनर्भुगतान की स्थिति में नहीं था। यह कदम पाकिस्तान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़ी वित्तीय जटिलताओं को दर्शाता है।
IMF ने पाकिस्तान को 2025 में कितनी और किस आधार पर सहायता दी?
IMF ने 2025 में विस्तारित निधि सुविधा (EFF) और लचीलापन एवं स्थिरता सुविधा (RSF) के तहत पाकिस्तान को 2.3 अरब डॉलर की नई वित्तीय सहायता प्रदान की। यह सहायता देश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को मज़बूत करने के उद्देश्य से दी गई।
2025 में निम्न और मध्यम आय वाले देशों का कुल बाहरी कर्ज कितना हो गया?
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMIC) का कुल बाहरी कर्ज बढ़कर रिकॉर्ड 9.4 लाख करोड़ डॉलर तक पहुँच गया। यह वृद्धि 5.5 प्रतिशत रही, जो पिछले चार वर्षों में सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी है।
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ता कर्ज, महंगा निजी वित्तपोषण और लगातार पाँचवें वर्ष बढ़ रही भुगतान देनदारियाँ पाकिस्तान की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए सबसे गंभीर चुनौती हैं। सबसे कमज़ोर अर्थव्यवस्थाओं को ही सबसे ऊँची ब्याज दरों पर कर्ज मिलना इस संकट को और गहरा कर रहा है।
निम्न आय वाले देशों का बाहरी कर्ज 2025 में कितना बढ़ा?
रिपोर्ट के अनुसार, निम्न आय वाले देशों का बाहरी कर्ज 2025 में 8.9 प्रतिशत बढ़कर 262.4 अरब डॉलर तक पहुँच गया। यह 2020 के बाद की सबसे बड़ी वृद्धि है और वैश्विक कर्ज संकट की गंभीरता को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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