केपीएससी घोटाले पर शिवकुमार का पलटवार: 'कुमारस्वामी भाजपा को खत्म करने की लड़ाई लड़ रहे हैं'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 31 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि कुमारस्वामी कांग्रेस के विरुद्ध नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को ही कमज़ोर करने की कोशिश में लगे हैं। यह बयान उस समय आया जब कुमारस्वामी ने कथित केपीएससी भर्ती घोटाले में राज्य सरकार की संलिप्तता के आरोप लगाए थे।
मुख्यमंत्री की सीधी प्रतिक्रिया
नेहरू प्लैनेटेरियम, बेंगलुरु के पास पत्रकारों से मुखातिब होते हुए शिवकुमार ने कहा, 'कुमारस्वामी हमारे खिलाफ नहीं लड़ रहे हैं। वह भाजपा के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्हें अपना काम करने दीजिए। उन्हें जो आरोप लगाने हैं, लगाने दीजिए।' यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इसमें कुमारस्वामी को कांग्रेस-विरोधी नहीं, बल्कि BJP-विरोधी शक्ति के रूप में चित्रित किया गया है।
कुमारस्वामी के उस दावे पर कि वे जल्द ऐसे दस्तावेज़ सार्वजनिक करेंगे जो राजनीतिक भूचाल ला देंगे, शिवकुमार ने महज़ इतना कहा — 'बहुत खुशी की बात है।' इस संक्षिप्त जवाब को राजनीतिक विश्लेषक आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति के रूप में देख रहे हैं।
केपीएससी घोटाले पर सरकार का रुख
कथित केपीएससी भर्ती घोटाले में भाजपा नेताओं की संभावित गिरफ्तारी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने जाँच में किसी भी हस्तक्षेप से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा, 'मैं जाँच में दखल नहीं दूंगा। मैं केवल जानकारी प्राप्त करूंगा। भाजपा के भीतर आंतरिक संघर्ष चल रहा है। केपीएससी सदस्यों की नियुक्ति किसने की थी? पूरी रिपोर्ट आने तक मैं पूरी जानकारी नहीं बता सकता।' गौरतलब है कि इस घोटाले को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल दोनों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
भाजपा की पदयात्रा और कांग्रेस का जवाब
भाजपा की प्रस्तावित पदयात्रा पर शिवकुमार ने कहा कि पार्टी को ऐसा करने की पूरी स्वतंत्रता है और कांग्रेस भी उचित समय पर अपना कार्यक्रम घोषित करेगी। उन्होंने विधानसभा सत्र का हवाला देते हुए विपक्ष पर निशाना साधा — 'हमने उन्हें सम्मान देते हुए विधानसभा सत्र चलाया, लेकिन उन्होंने किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं की।' मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार अब पश्चिमी घाट से संबंधित के. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और किसानों के मुद्दों पर विधायकों की राय लेकर चर्चा आगे बढ़ाना चाहती है।
छठी गारंटी: 'लैंड गारंटी' योजना का विस्तार
शिवकुमार ने सरकार की प्रस्तावित छठी गारंटी योजना 'लैंड गारंटी' के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना केवल बेंगलुरु तक सीमित नहीं रहेगी। उनके अनुसार, 'यह उन सभी लोगों पर लागू होगी जिन्होंने सरकार के लिए अपनी जमीन या संपत्ति दी है। उनके नाम स्थायी रूप से दर्ज किए जाने चाहिए और उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए।'
मुख्यमंत्री ने बताया कि लाभार्थियों को फोटो और अन्य आवश्यक विवरणों वाले कानूनी रूप से वैध दस्तावेज़ उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'बी-खाता को ए-खाता में बदलने की प्रक्रिया कानूनी तरीके से होगी और फर्जी पंजीकरण की कोई गुंजाइश नहीं होगी।' ये दस्तावेज़ संपत्ति हस्तांतरण, बैंक ऋण और पारिवारिक बंटवारे जैसी प्रक्रियाओं में नागरिकों के काम आएंगे।
शिवकुमार ने बताया कि इस पहल की नींव सिद्दारमैया सरकार के पिछले कार्यकाल में तब रखी गई थी, जब कृष्णा बायरे गौड़ा राजस्व मंत्री थे। वर्तमान सरकार उसी पहल को आगे बढ़ा रही है, जो इसे एक निरंतर नीतिगत प्रयास के रूप में स्थापित करती है।
आगे क्या होगा
कुमारस्वामी के दस्तावेज़ जारी करने के दावे और केपीएससी जाँच की अंतिम रिपोर्ट — दोनों कर्नाटक की राजनीति में अगले कुछ हफ्तों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। 'लैंड गारंटी' योजना के क्रियान्वयन की समयसीमा और व्यापकता पर भी सरकार की नज़दीकी निगरानी होगी।