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भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पर पहुँची, BJP ने राहुल गांधी से माँगी माफी; कांग्रेस ने उठाए आम आदमी के सवाल

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भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पर पहुँची, BJP ने राहुल गांधी से माँगी माफी; कांग्रेस ने उठाए आम आदमी के सवाल

सारांश

भारत की GDP ने Q1 FY2026-27 में 7.8% की रफ्तार पकड़ी — और इसके साथ ही सियासी तापमान भी चढ़ गया। BJP ने राहुल गांधी से 'डेड इकोनॉमी' बयान पर माफी माँगी, तो कांग्रेस ने पूछा: आँकड़े चमकते हैं, पर महंगाई और बेरोजगारी से जूझते आम आदमी तक यह रोशनी कब पहुँचेगी?

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी दर्ज की गई।
BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी से 'डेड इकोनॉमी' बयान पर सार्वजनिक माफी की माँग की।
कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने ग्रोथ का स्वागत करते हुए महंगाई और बेरोजगारी पर ठोस जवाब माँगा।
ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में 11.9 फीसदी की बढ़ोतरी, निजी पूँजीगत व्यय में सुधार का संकेत।
WTC चेयरमैन विजय कलंत्री के अनुसार भारत 2030 से पहले $5 ट्रिलियन और 2047 तक $40 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बन सकता है।
विशेषज्ञों ने भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को प्रमुख जोखिम बताया।

वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी रहने की पुष्टि होते ही नई दिल्ली में सियासी बहस तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस आँकड़े को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक बुनियाद का प्रमाण बताते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनके 'डेड इकोनॉमी' वाले बयान पर सार्वजनिक माफी की माँग की। वहीं कांग्रेस ने ग्रोथ के आँकड़े का स्वागत करते हुए पूछा कि यह रफ्तार महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रहे आम नागरिक तक कब पहुँचेगी।

BJP का पलटवार: 'डेड इकोनॉमी' बयान पर माफी माँगें राहुल

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, 'राहुल गांधी ने भारत की अर्थव्यवस्था को डेड इकोनॉमी कहा था। आज देश की अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ रही है। इससे साबित होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स न केवल मजबूत हैं, बल्कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक चमकता हुआ स्पॉट है। आज राहुल गांधी को देश से माफी माँगनी चाहिए।' शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने भी इस आँकड़े का स्वागत करते हुए कहा कि ईरान-रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य-पूर्व की अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर भारी दबाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती बनाए रखी है।

कांग्रेस का सवाल: ग्रोथ का फायदा आम आदमी तक कब?

कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने ग्रोथ के आँकड़े का स्वागत करते हुए सरकार से जवाब माँगा। उन्होंने कहा, 'सरकार को यह बताना चाहिए कि इस ग्रोथ रेट से समाज के सबसे निचले पायदान पर बैठे व्यक्ति और मिडिल क्लास को क्या फायदा होगा। क्या इससे बेरोजगारी कम होगी? क्या महंगाई पर कोई असर पड़ेगा, जो अपने पीक पर है? आम आदमी महंगाई के बोझ तले परेशान है, बेरोजगारों को नौकरी नहीं मिल रही।' यह ऐसे समय में आया है जब खुदरा महंगाई दर और शहरी बेरोजगारी के आँकड़े नीति-निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

उद्योग जगत का नजरिया: 2030 से पहले $5 ट्रिलियन का लक्ष्य संभव

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (WTC) के चेयरमैन विजय कलंत्री ने कहा कि भारत 2030 से पहले 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा और 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य भी पार होकर 40 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और GST कलेक्शन में 7-10 फीसदी की लगातार बढ़ोतरी इस अनुमान को बल देती है। उनके अनुसार GST के दायरे के विस्तार से अब हर नागरिक किसी न किसी रूप में टैक्स प्रणाली में योगदान दे रहा है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं: ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में उछाल अहम संकेत

वित्तीय विशेषज्ञ अजय रोटी ने इस ग्रोथ के टिकाऊ रहने पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) में 11.9 फीसदी की बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि निजी क्षेत्र का पूँजीगत व्यय शायद पटरी पर आ रहा है, जो इस रफ्तार को बनाए रखने की संभावना को मजबूत करता है। हालाँकि उन्होंने आगाह किया कि भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक मंदी की आशंका और कच्चे तेल की कीमतें ऐसे जोखिम हैं जिन पर लगातार नजर रखनी होगी। गौरतलब है कि हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतकों — टैक्स कलेक्शन और GST संग्रह — में लगातार रिकॉर्ड बनना इस आशावाद को आधार देता है।

आगे क्या: राजनीतिक बहस और आर्थिक चुनौतियाँ साथ-साथ

GDP के 7.8 फीसदी के आँकड़े ने एक साथ दो मोर्चे खोल दिए हैं — सत्ता पक्ष के लिए यह राजनीतिक हथियार है, जबकि विपक्ष इसे 'आँकड़ों बनाम जमीनी हकीकत' की बहस में बदल रहा है। आलोचकों का कहना है कि जब तक ग्रोथ का लाभ रोजगार सृजन और महंगाई नियंत्रण में नहीं दिखता, तब तक ये आँकड़े आम नागरिक के लिए अर्थहीन हैं। अगली तिमाही के GDP आँकड़े और आगामी बजट सत्र यह तय करेंगे कि यह रफ्तार महज एक तिमाही की उपलब्धि है या दीर्घकालिक प्रवृत्ति।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह बहस उतनी ही पुरानी है जितनी भारत की आर्थिक नीति — आँकड़े ऊपर जाते हैं, पर जमीनी असर की बहस वहीं रुकी रहती है। GFCF में 11.9 फीसदी की बढ़ोतरी एक ठोस संकेत है, मगर निजी निवेश का यह 'शायद शुरू होना' अभी भी अनिश्चितता में है। असली कसौटी यह है कि क्या यह ग्रोथ रोजगार-सघन क्षेत्रों में उतरती है या केवल कॉर्पोरेट बैलेंसशीट को चमकाती है। 'डेड इकोनॉमी' बनाम 'माफी माँगो' की राजनीतिक लड़ाई उस असली सवाल को दबा देती है जो कांग्रेस ने उठाया — और जिसका जवाब सरकार ने अभी तक आँकड़ों में नहीं दिया।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ कितनी रही?
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही। यह आँकड़ा 1 सितंबर 2026 को सामने आया और इसने देश में राजनीतिक व आर्थिक बहस को तेज कर दिया।
BJP ने राहुल गांधी से माफी क्यों माँगी?
BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी के अनुसार राहुल गांधी ने पहले भारत की अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनॉमी' कहा था। 7.8 फीसदी की GDP ग्रोथ को BJP ने उस बयान का खंडन बताते हुए राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की माँग की।
कांग्रेस ने GDP आँकड़े पर क्या सवाल उठाए?
कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने ग्रोथ का स्वागत करते हुए पूछा कि इस रफ्तार का फायदा महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे आम नागरिक और मध्यम वर्ग तक कब पहुँचेगा। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि क्या इससे बेरोजगारी घटेगी और महंगाई पर लगाम लगेगी।
ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में बढ़ोतरी का क्या मतलब है?
वित्तीय विशेषज्ञ अजय रोटी के अनुसार GFCF में 11.9 फीसदी की बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि निजी क्षेत्र का पूँजीगत व्यय शायद पुनः शुरू हो रहा है। यह GDP ग्रोथ के टिकाऊ रहने की संभावना को मजबूत करता है।
भारत कब तक $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बन सकता है?
WTC चेयरमैन विजय कलंत्री के अनुसार भारत 2030 से पहले $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बन जाएगा और 2047 तक यह आँकड़ा $30-40 ट्रिलियन तक पहुँच सकता है। हालाँकि ये अनुमान हैं और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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