भारत की GDP 7.7% वृद्धि पर BJP के अमित मालवीय का राहुल गांधी पर पलटवार, 'सुनामी' वाले बयान को बताया खोखला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता अमित मालवीय ने 5 जून 2026 को ताज़ा जीडीपी आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया। मालवीय ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सर्वोच्च है — और इसने राहुल गांधी की उस 'आर्थिक सुनामी' की चेतावनी को निराधार साबित कर दिया है जो उन्होंने हाल ही में दी थी।
तिमाही वृद्धि दर का ब्यौरा
आंकड़ों के अनुसार, भारत की तिमाही वार वृद्धि दर स्थिर और मज़बूत रही। पहली तिमाही में 6.7 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 8.4 प्रतिशत, और तीसरी व चौथी तिमाही में 7.8-7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मालवीय ने इसे 'नीतिगत निरंतरता का प्रमाण' बताया।
तुलनात्मक रूप से, जर्मनी की वृद्धि दर मात्र 0.4 प्रतिशत, जापान की 0.8 प्रतिशत, यूरो क्षेत्र की 1.3 प्रतिशत और जी-7 देशों की औसत 1.6 प्रतिशत रही।
उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भी भारत आगे
मालवीय ने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह में भी भारत ने इंडोनेशिया, मलेशिया, मैक्सिको और थाईलैंड को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने ऑटो बिक्री के सर्वकालिक उच्च स्तर, विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार, मज़बूत जीएसटी संग्रह, ऋण वृद्धि और सुदृढ़ विदेशी मुद्रा भंडार को आर्थिक मज़बूती के प्रमाण के रूप में गिनाया।
राहुल गांधी के 'सुनामी' बयान पर BJP का पलटवार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इससे पहले आरोप लगाया था कि सरकार ने सभी आर्थिक सुरक्षा उपाय हटा दिए हैं और भारत एक 'आर्थिक सुनामी' की ओर बढ़ रहा है। मालवीय ने इस पर तंज कसते हुए कहा, "आज जो एकमात्र 'सुनामी' दिखाई दे रही है, वह कांग्रेस पार्टी की दुर्भावनापूर्ण सोच को डुबो रही है।" उन्होंने इसे विपक्षी नेता का भारत को बदनाम करने का नया प्रयास भी करार दिया।
'फ्रैजाइल फाइव' से विश्व के विकास इंजन तक
मालवीय ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 2013 में भारत को दोहरे घाटे, उच्च मुद्रास्फीति और नीतिगत गतिरोध के चलते 'फ्रैजाइल फाइव' अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था। उनके अनुसार, रिकॉर्ड बुनियादी ढाँचे के निर्माण, नियंत्रित मुद्रास्फीति और निर्णायक नीति-निर्माण ने इस रूपांतरण को संभव बनाया।
उन्होंने कहा, "'फ्रैजाइल फाइव' से लेकर विश्व के विकास के इंजन तक — यह परिवर्तन स्वयं ही सब कुछ बयां करता है। गिरावट की भविष्यवाणी करने वाले बार-बार गलत साबित हुए हैं।" यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की विकास दर की स्थिरता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रेखांकित की जा रही है।