मणिपुर CM ने थौबल में कांग्रेस नेता के घर ग्रेनेड हमले की निंदा की, जांच के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शुक्रवार, 4 सितंबर को थौबल जिले में कांग्रेस लेजिस्लेचर पार्टी (CLP) के नेता के. मेघाचंद्र सिंह के आवास पर हुए ग्रेनेड हमले की कड़ी निंदा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में चुने हुए जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध हिंसा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हमले का घटनाक्रम
यह विस्फोट गुरुवार शाम थौबल जिले के वांगखेम निर्वाचन क्षेत्र में याइरीपोक विष्णु नहा स्थित कांग्रेस नेता के आवास के मुख्य द्वार के निकट हुआ। अधिकारियों के अनुसार, कथित तौर पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने विस्फोटक फेंका, हालांकि हमलावर की पहचान और हमले का मकसद अभी तक सामने नहीं आया है। पुलिस ने तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण किया और तलाशी अभियान शुरू किया।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा: 'मैं के. मेघाचंद्र सिंह (कांग्रेस लेजिस्लेचर पार्टी के नेता और वांगखेम विधानसभा क्षेत्र के विधायक) के घर पर हुए ग्रेनेड हमले की कड़ी निंदा करता हूं। यह हमला कल शाम याइरीपोक बिष्णु नाहा, थौबल में हुआ था।' उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पुलिस को मामले की गहन जांच करने और दोषियों को शीघ्र दंडित करने के निर्देश दिए हैं।
स्थानीय विरोध प्रदर्शन
इस हमले के विरोध में शुक्रवार को 'ऑल याइरीपोक अपुन्बा इमा लुप' (AYAIL) ने धरना आयोजित किया। प्रदर्शनकारियों ने रिहायशी इलाकों में विस्फोटकों के इस्तेमाल की कड़ी निंदा करते हुए आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई।
पिछली घटना से संबंध
गौरतलब है कि यह मणिपुर में जनप्रतिनिधियों के घरों पर हमले की हाल की दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले 28 अगस्त को इंफाल पश्चिम जिले के कोंथौजम मायाई लीकाई में पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मौजूदा विधायक सपम रंजन सिंह के आवास पर भी बम विस्फोट हुआ था। उस घटना में बम घर के पिछले हिस्से में फटा, जिससे जमीन पर एक गड्ढा बना और परिसर की दीवारों को मामूली नुकसान पहुंचा। विधायक उस समय घर पर ही मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने उस हमले को 'बेमतलब और बर्बर' करार देते हुए उसे 'लोकतंत्र पर हमला' बताया था।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मणिपुर में पिछले कुछ हफ्तों में जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाने की ये घटनाएं राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य पहले से ही जातीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है।