5 सितंबर 2026
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जन्माष्टमी 2025: मथुरा से दिल्ली-NCR तक 'जय कन्हैया लाल की' की गूंज, रात 12 बजे हुआ भव्य जन्मोत्सव

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जन्माष्टमी 2025: मथुरा से दिल्ली-NCR तक 'जय कन्हैया लाल की' की गूंज, रात 12 बजे हुआ भव्य जन्मोत्सव

सारांश

रात 12 बजे की वह बेला जब पूरा देश 'जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गूंज उठा — मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि से लेकर दिल्ली-NCR, नोएडा और बेंगलुरु तक, जन्माष्टमी 2025 ने एक बार फिर भारत की सामूहिक आस्था और उत्सव-प्रियता को जीवंत कर दिया।

मुख्य बातें

5 सितंबर की रात 12 बजे देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव अपने चरम पर पहुँचा।
मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में शुक्रवार सुबह से ही देशभर के श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
मंगला आरती के बाद ढोल-नगाड़ों की थाप पर भक्त झूमते-नाचते नजर आए।
प्रशासन की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था से दर्शनार्थियों को सुगम दर्शन का लाभ मिला।
दिल्ली-NCR , नोएडा , द्वारका और बेंगलुरु में भी भव्य जन्मोत्सव आयोजित हुए।
भक्त मोहन सिंह सहित अनेक श्रद्धालु 15-20 वर्षों से मथुरा में जन्माष्टमी मनाने आ रहे हैं।

रात ठीक 12 बजे जैसे ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन क्षण आया, मथुरा से लेकर दिल्ली-एनसीआर, द्वारका और बेंगलुरु तक पूरे देश में 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। 5 सितंबर की मध्यरात्रि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की इस बेला में देश-विदेश में विशेष आयोजन किए गए और मंदिरों में आरती व उत्सव की अभूतपूर्व छटा देखने को मिली।

मथुरा में जन्मभूमि पर उमड़ा आस्था का सैलाब

भगवान श्रीकृष्ण की पावन जन्मस्थली मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव अपने चरम पर रहा। शुक्रवार की सुबह से ही कृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर में देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं की अटूट कतारें लगी रहीं। मंगला आरती के उपरांत मंदिर प्रांगण उत्सव के रंग में पूरी तरह रंग गया — ढोल, ताशे और नगाड़ों की थाप पर भक्त झूमते-नाचते नजर आए। रात 12 बजते ही मंदिरों में जयकारों की ऐसी लहर उठी कि पूरा परिसर कन्हैया लाल की भक्ति में डूब गया।

प्रशासन की व्यापक तैयारी, भक्तों को राहत

भारी भीड़ को देखते हुए मथुरा प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए। अधिकारियों के अनुसार, इस बार दर्शन व्यवस्था पहले से बेहतर रही और श्रद्धालुओं को किसी विशेष असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। मंदिर परिसर में आवागमन सुचारु रखने के लिए विशेष मार्ग-व्यवस्था लागू की गई थी।

भक्तों की जुबानी — आस्था और अनुभव

मंदिर में दर्शन के लिए आई एक महिला भक्त ने कहा, 'सब कुछ कान्हा जी की कृपा से हो रहा है। यह उनकी लीला और उनकी माया है, वही जानते हैं। पूरी दुनिया उनकी धुन पर नाच रही है। जब से हमने कान्हा की शरण ली है, तब से जीवन में चमत्कार ही चमत्कार हो रहा है।'

एक अन्य भक्त मोहन सिंह ने उत्साह के साथ बताया, 'हम यहाँ लगभग 15 सालों से त्योहार मना रहे हैं। इससे हमें बहुत खुशी मिलती है। मैं खुद नहीं नाचता, बल्कि कान्हा खुद नचाते हैं।'

एक अन्य महिला भक्त — जिनका ससुराल मथुरा में है — ने बताया कि यह उनकी पहली जन्माष्टमी दर्शन थी और अनुभव बेहद सुखद रहा। वहीं, एक और श्रद्धालु महिला ने जानकारी दी कि वे पिछले 20 वर्षों से इस मंदिर में आ रही हैं और इस बार की व्यवस्था पहले से कहीं बेहतर पाई।

दिल्ली-NCR, द्वारका और बेंगलुरु में भी उत्सव की धूम

जन्माष्टमी का उल्लास केवल मथुरा तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, द्वारका और बेंगलुरु समेत देश के तमाम शहरों में मंदिरों और सामुदायिक केंद्रों पर भव्य आयोजन हुए। रात 12 बजे के बाद मटकी-फोड़ प्रतियोगिताएँ, झाँकियाँ और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम देर रात तक जारी रहे। यह उत्सव इस वर्ष भी भारत की सांस्कृतिक एकता और सामूहिक आस्था का जीवंत प्रमाण बना।

आगे का उत्सव

जन्माष्टमी के अगले दिन नंदोत्सव मनाया जाएगा, जिसमें मंदिरों में विशेष भोग और झाँकी के आयोजन होंगे। मथुरा-वृंदावन में यह उत्सव परंपरागत रूप से कई दिनों तक चलता है, और श्रद्धालुओं का आना-जाना अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर उन वर्षों में जब लाखों की संख्या में श्रद्धालु एक ही स्थान पर एकत्र होते हैं। मथुरा-वृंदावन के धार्मिक सर्किट को विश्वस्तरीय तीर्थस्थल बनाने की महत्वाकांक्षा और ज़मीनी हकीकत के बीच का अंतर अभी पाटा जाना बाकी है।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन्माष्टमी 2025 मथुरा में कब और कैसे मनाई गई?
जन्माष्टमी 2025 मथुरा में 5 सितंबर की रात 12 बजे श्रीकृष्ण के जन्म के साथ मनाई गई। कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में शुक्रवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और रात 12 बजे जयकारों व आरती के साथ जन्मोत्सव का भव्य आयोजन हुआ।
मथुरा कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दर्शन व्यवस्था कैसी रही?
प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए थे, जिसके चलते भक्तों को दर्शन में कोई खास परेशानी नहीं हुई। भक्तों के अनुसार इस बार की व्यवस्था पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर रही।
जन्माष्टमी 2025 में दिल्ली-NCR और नोएडा में क्या हुआ?
दिल्ली-NCR, नोएडा और द्वारका में भी मंदिरों व सामुदायिक केंद्रों पर भव्य जन्माष्टमी आयोजन हुए। रात 12 बजे के बाद मटकी-फोड़, झाँकियाँ और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम देर रात तक चले।
जन्माष्टमी के बाद मथुरा में कौन-सा उत्सव मनाया जाएगा?
जन्माष्टमी के अगले दिन नंदोत्सव मनाया जाएगा, जिसमें मंदिरों में विशेष भोग और झाँकियों का आयोजन होगा। मथुरा-वृंदावन में यह उत्सव परंपरागत रूप से कई दिनों तक चलता है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व क्यों है?
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मदिवस है, जो भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। मथुरा उनकी जन्मभूमि होने के कारण यहाँ यह पर्व विशेष आस्था और भव्यता के साथ मनाया जाता है, और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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