बिहार बाढ़ पर सांसद पप्पू यादव का केंद्र पर हमला: 'राहत को प्राथमिकता दो, सियासत बाद में'
सारांश
मुख्य बातें
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 4 सितंबर को पटना में बिहार की बिगड़ती बाढ़ स्थिति और छात्र आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने माँग की कि सरकार राजनीतिक गतिविधियों से ऊपर उठकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
बाढ़ राहत पर केंद्र की 'उदासीनता' पर सवाल
सांसद पप्पू यादव ने कहा कि बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई दे रही। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब बिहार बाढ़ की चुनौती से जूझ रहा है, तब वे विदेश में कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप और पर्याप्त राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की।
राहुल गांधी और छात्र आंदोलन को समर्थन
पप्पू यादव ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार के छात्र आंदोलन का समर्थन किया है और छात्र नेता निशु आजाद से कहा है कि अब उनकी लड़ाई उनकी अपनी भी लड़ाई है। उन्होंने इसे देश के युवाओं की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच मिलने का संकेत बताया। सांसद के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में राहुल गांधी ही देश के छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर उनके साथ मुखरता से खड़े हैं।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री की प्रस्तावित यात्रा का भी उल्लेख किया और कहा कि करीब 12 वर्षों में पहली बार ऐसी यात्रा की बात सामने आई है — जिसे उन्होंने छात्रों में बढ़ती नाराज़गी से जोड़कर देखा।
आर्थिक दावों पर सवाल
सांसद ने जीडीपी और जीएसटी को लेकर भी केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कुछ BJP नेताओं को इन आर्थिक पदों की बुनियादी जानकारी तक नहीं है। पप्पू यादव ने यह भी आरोप लगाया कि देश में निवेश का माहौल चिंताजनक है और बड़े पैमाने पर पूँजी बाहर जा रही है — हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सरकार से आर्थिक आँकड़ों की वास्तविक स्थिति देश के सामने स्पष्ट रूप से रखने की माँग की।
सियासत से ऊपर राहत की माँग
पप्पू यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस समय बिहार के लिए सबसे बड़ी ज़रूरत बाढ़ प्रभावितों तक राहत पहुँचाना है — न कि राजनीतिक बयानबाज़ी। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को इस मुद्दे पर अपेक्षित गंभीरता दिखानी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में हर साल बाढ़ लाखों लोगों को प्रभावित करती है और राहत तंत्र की पर्याप्तता पर सवाल उठते रहे हैं।
आगे की स्थिति
बिहार में बाढ़ की स्थिति पर केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में वृद्धि के मद्देनज़र आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। राहत और पुनर्वास की माँग को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है।