नेपाल बाढ़ पर पप्पू यादव: 'यह सिर्फ आपदा नहीं, भारत को दीर्घकालिक रणनीति चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 27 अगस्त को नई दिल्ली में नेपाल की भीषण बाढ़ को लेकर कहा कि इसे केवल प्राकृतिक आपदा मानकर नहीं छोड़ा जा सकता — भारत और सीमावर्ती देशों को मिलकर एक ठोस दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन एवं पर्यावरणीय रणनीति तैयार करनी होगी। उन्होंने महंगाई, पेपर लीक, युवा रोज़गार और वंदे मातरम विवाद सहित कई राष्ट्रीय मुद्दों पर भी केंद्र सरकार को घेरा।
नेपाल बाढ़ और हिमालयी संकट
पप्पू यादव ने कहा कि तिब्बत और नेपाल से लगे इलाकों में बार-बार आ रही ऐसी घटनाएँ गंभीर चेतावनी हैं। उनके अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने और प्राकृतिक संतुलन में बदलाव का असर आने वाले वर्षों में बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों पर पड़ सकता है, क्योंकि ये राज्य नेपाल से निकलने वाली नदियों पर निर्भर हैं और बाढ़ के लिए सबसे अधिक संवेदनशील हैं।
उन्होंने कहा कि नेपाल और तिब्बत में होने वाली घटनाओं को सीमावर्ती देशों को मिलकर देखना होगा और एक साझा दीर्घकालिक योजना बनानी होगी। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं और दक्षिण एशिया में बाढ़ की आवृत्ति बढ़ रही है।
बिहार में आपदा प्रबंधन पर सवाल
सांसद ने बिहार में बाढ़ प्रबंधन और कटाव रोधी कार्यों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा प्रबंधन के नाम पर मिलने वाली राशि का दुरुपयोग होता है और सरकार को राहत कार्यों के साथ-साथ स्थायी समाधान पर भी ध्यान देना चाहिए। साथ ही, उन्होंने नेपाल में फँसे भारतीय नागरिकों के परिवारों को सत्यापित जानकारी उपलब्ध कराने की माँग की।
महंगाई और युवाओं के मुद्दे
चीनी की बढ़ती कीमतों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पप्पू यादव ने कहा कि जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों का लाभ बड़े उद्योगपतियों को मिल रहा है, जबकि आम लोगों की आर्थिक परेशानियाँ बढ़ रही हैं।
वंदे मातरम विवाद पर उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को इस तरह के विवादों में उलझने के बजाय युवाओं की शिक्षा, रोज़गार और पेपर लीक जैसे असली मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। गौरतलब है कि पेपर लीक की घटनाएँ हाल के महीनों में लगातार चर्चा में रही हैं।
राजनीतिक मतभेद और सार्वजनिक जवाबदेही
नेशनल कॉन्फ्रेंस में आंतरिक मतभेदों के सवाल पर पप्पू यादव ने कहा कि यदि किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को पार्टी नेतृत्व से शिकायत है तो उसे पार्टी के आंतरिक मंच पर उठाना चाहिए। उनके अनुसार, जो नेता सार्वजनिक रूप से पार्टी के खिलाफ जाना चाहते हैं, उन्हें इस्तीफा देकर दोबारा जनता के बीच जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मुस्लिम महिलाओं के विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है, लेकिन राहुल गांधी संविधान, लोकतंत्र और सभी वर्गों के अधिकारों की पैरवी करते हैं। अभिनेत्री एवं सांसद कंगना रनौत की महिलाओं और कपड़ों से जुड़ी टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को महिलाओं के सम्मान को लेकर जिम्मेदारी से बयान देने चाहिए।
खेल और युवा नीति पर माँग
प्रधानमंत्री के खिलाड़ियों और छात्रों से जुड़ने के कार्यक्रम पर पप्पू यादव ने कहा कि केवल आयोजनों से बदलाव नहीं आएगा — खेल बजट बढ़ाना, क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों के खिलाड़ियों को उचित संसाधन और सम्मान देना तथा युवाओं के लिए रोज़गार एवं शिक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उनकी यह माँग ऐसे समय में आई है जब देश में युवा बेरोज़गारी दर पर बहस तेज़ है।