नेपाल बाढ़ के बाद बिहार अलर्ट पर, तेजस्वी यादव ने गंडक नदी पर असर की जताई चिंता
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल और तिब्बत सीमा पर 27 अगस्त को अचानक आई भीषण बाढ़ की तबाही के बाद बिहार सरकार ने राज्य में हाई अलर्ट जारी किया है। इस आपदा की गूँज पटना तक पहुँची, जहाँ सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं और राज्य की नदियों — विशेषकर गंडक नदी — पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई।
तेजस्वी यादव की चेतावनी
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा, 'यह बहुत दुखद घटना है। हमने बुधवार को वीडियो देखे, जिनमें बाढ़ का पानी तेज़ी से बढ़ रहा था और लोग सुरक्षित जगहों की ओर भाग रहे थे।' यादव ने बिहार सरकार से स्थिति पर अधिक सतर्कता बरतने की माँग की और कहा कि गंडक नदी पर इस बाढ़ का सीधा असर पड़ने की आशंका है।
सरकार की प्रतिक्रिया और निगरानी व्यवस्था
जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि तिब्बत से उत्पन्न इस प्राकृतिक आपदा को रोकना किसी के बस में नहीं था। उन्होंने कहा, 'सरकार इसे लेकर चिंतित है और स्थिति पर नज़र रख रही है। हम हर 24 घंटे में बांधों — जिनमें पुराने बांध भी शामिल हैं — और जलमार्गों की निगरानी कर रहे हैं।' कुशवाहा ने आम जनता से अनावश्यक घबराहट न फैलाने की अपील की।
बिहार सरकार में मंत्री रत्नेश सदा ने भी इस त्रासदी पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा, 'जहाँ भी आपदा आती है, मानवता के हित में सहानुभूति के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए।'
केंद्र सरकार और भारत-नेपाल संबंध
JDU के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने बताया कि प्रधानमंत्री ने नेपाल के प्रधानमंत्री से विस्तृत बातचीत की है और भरोसा दिलाया है कि भारत सरकार नेपाल के लोगों के साथ हर कदम पर खड़ी रहेगी। यह कथन भारत-नेपाल के ऐतिहासिक पड़ोसी संबंधों के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि नेपाल से निकलने वाली नदियाँ बिहार के बड़े हिस्से को सींचती और कभी-कभी तबाह भी करती हैं।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता आरपी सिंह ने नई दिल्ली में कहा कि भारत सरकार हर संभव मदद के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ईशा फाउंडेशन के सद्गुरु सहित अन्य प्रमुख हस्तियाँ भी राहत प्रयासों में सहयोग देने की तैयारी कर रही हैं।
बिहार के लिए खतरे का संदर्भ
गौरतलब है कि बिहार हर वर्ष नेपाल से आने वाली नदियों — गंडक, कोसी और बागमती — के कारण बाढ़ की मार झेलता है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून का मौसम अपने चरम पर है और राज्य के कई ज़िले पहले से जलजमाव की स्थिति में हैं। नेपाल में अचानक आई इस बाढ़ से नदियों का जलस्तर तेज़ी से बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन की सतर्कता स्वाभाविक है।
आगे की स्थिति
बिहार सरकार के अधिकारियों के अनुसार बांधों और जलमार्गों की चौबीसों घंटे निगरानी जारी है। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में गंडक और उससे जुड़ी नदियों के जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जिस पर बारीकी से नज़र रखना ज़रूरी होगा।