27 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़ पर युवराज सिंह ने जताई संवेदना, 177 की मौत; भोटेकोसी नदी से मची तबाही

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नेपाल बाढ़ पर युवराज सिंह ने जताई संवेदना, 177 की मौत; भोटेकोसी नदी से मची तबाही

सारांश

हिमस्खलन से उपजी अचानक बाढ़ ने नेपाल के तीन जिलों में 177 जानें ले लीं — और इलाके में बारिश तक नहीं थी। युवराज सिंह से लेकर नेपाली क्रिकेटरों तक, खेल जगत ने एकजुट होकर संवेदना और सुरक्षा की अपील की, जबकि भारत राहत सामग्री भेजने में जुटा है।

मुख्य बातें

26 अगस्त 2026 को भोटेकोसी नदी की सहायक नदी में हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई, जिसमें 177 लोगों की मौत की पुष्टि हुई।
बाढ़ सबसे पहले नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र के तिमुरे गांव में आई और तीन जिलों तक फैली।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह ने एक्स पर प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
नेपाली क्रिकेटर दीपेंद्र सिंह ऐरी और संदीप लामिछाने ने नागरिकों से नदी किनारों से दूर रहने की अपील की।
भारत समेत अन्य देश नेपाल को राहत सामग्री भेज रहे हैं।

नेपाल में भोटेकोसी नदी की सहायक नदी ल्हेन्डे में हिमस्खलन के कारण अचानक आई बाढ़ ने 26 अगस्त को भीषण तबाही मचाई, जिसमें अब तक 177 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह समेत नेपाली क्रिकेटरों ने प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

युवराज सिंह का संदेश

पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "नेपाल में बाढ़ ने बहुत ज्यादा तबाही मचाई है। मेरी दुआएं उन सभी लोगों के साथ हैं जो इससे प्रभावित हुए हैं, खासकर उन परिवारों के साथ जो अभी भी अपने प्रियजनों का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है, नेपाल के लोगों की हिम्मत उन्हें इस बहुत मुश्किल समय से निकाल लेगी।"

नेपाली क्रिकेटरों की अपील

नेपाल के क्रिकेटर दीपेंद्र सिंह ऐरी और संदीप लामिछाने ने देश के कई हिस्सों में आई बाढ़ और भूस्खलन पर गहरी चिंता जताई। ऐरी ने विशेष रूप से त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जल स्तर बढ़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की।

लामिछाने ने लिखा, "कृपया नदियों, झरनों, बाढ़ वाली सड़कों, पुलों और दूसरी ज्यादा खतरे वाली जगहों से बचें। पानी का स्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे जानी-पहचानी जगहें भी असुरक्षित हो सकती हैं। अगर आप किसी प्रभावित इलाके में हैं, तो सावधान रहें, जानकारी रखें और स्थानीय अधिकारियों के सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।"

आपदा का स्वरूप और कारण

रिपोर्टों के अनुसार, यह बाढ़ तब आई जब भोटेकोसी की सहायक नदी ल्हेन्डे का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया। इलाके में उस समय बारिश नहीं हो रही थी, इसलिए स्थानीय लोगों को इस आपदा का कोई पूर्वाभास नहीं था। बाढ़ आने के समय लोग अपनी दिनचर्या में लगे हुए थे। सबसे पहले नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र में स्थित तिमुरे गांव प्रभावित हुआ, और इसके बाद तबाही तीन जिलों तक फैल गई।

भारत और अन्य देशों का सहयोग

नेपाल के इस संकट की घड़ी में भारत लगातार राहत सामग्री भेज रहा है। अन्य देश भी नेपाल की मदद के लिए आगे आए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हर वर्ष हजारों लोगों को प्रभावित करती हैं, लेकिन इस बार हिमस्खलन-जनित अचानक बाढ़ ने तबाही की गंभीरता कई गुना बढ़ा दी।

आगे की स्थिति

अधिकारियों के अनुसार राहत और बचाव अभियान जारी है, और मृतक संख्या में और वृद्धि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे के इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ बिना किसी वर्षा के भी अचानक बाढ़ सैकड़ों जानें ले सकती है। गौरतलब है कि नेपाल में हर साल मानसून के दौरान बाढ़-भूस्खलन से भारी नुकसान होता है, लेकिन हिमस्खलन-जनित 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट' जैसी घटनाएं पूर्व चेतावनी प्रणाली की कमज़ोरी को उजागर करती हैं। खेल हस्तियों की संवेदनाएं जन-जागरूकता बढ़ाती हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि नेपाल और उसके पड़ोसी देश हिमालयी आपदाओं के लिए दीर्घकालिक अवसंरचना और पूर्व चेतावनी तंत्र कब तक खड़ा करेंगे।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल में बाढ़ कैसे आई और कितने लोगों की मौत हुई?
भोटेकोसी नदी की सहायक नदी ल्हेन्डे का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण रुक गया, जिससे 26 अगस्त को अचानक बाढ़ आई। अब तक 177 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
युवराज सिंह ने नेपाल बाढ़ पर क्या कहा?
युवराज सिंह ने एक्स पर लिखा कि नेपाल में बाढ़ ने बहुत ज्यादा तबाही मचाई है और उनकी दुआएं प्रभावित परिवारों के साथ हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि नेपाल के लोगों की हिम्मत उन्हें इस मुश्किल समय से निकाल लेगी।
नेपाली क्रिकेटरों ने बाढ़ पर क्या अपील की?
दीपेंद्र सिंह ऐरी ने त्रिशूली नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा। संदीप लामिछाने ने नदियों, पुलों और बाढ़-प्रभावित सड़कों से दूर रहने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की।
इस बाढ़ की सबसे पहले कौन सी जगह प्रभावित हुई?
नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र का तिमुरे गांव सबसे पहले प्रभावित हुआ। इसके बाद बाढ़ तीन जिलों तक फैल गई।
नेपाल बाढ़ में भारत किस तरह मदद कर रहा है?
भारत नेपाल को लगातार राहत सामग्री भेज रहा है। अन्य देश भी इस आपदा में नेपाल के साथ सहयोग कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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