नेपाल में भोटेकोसी बाढ़: 157 की मौत, 391 पर्यटक और 44 सुरक्षाकर्मी लापता
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के तीन जिलों में भोटेकोसी नदी में 27 अगस्त को अचानक आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने कम से कम 157 लोगों की जान ले ली है। 391 पर्यटक और 44 सुरक्षाकर्मी समेत सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं, जबकि राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई है।
आपदा का कारण और प्रभावित क्षेत्र
रिपोर्टों के अनुसार, यह विनाशकारी बाढ़ तब आई जब भोटेकोसी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया। इससे जलराशि एकाएक निचले इलाकों में उमड़ पड़ी। सबसे पहले नेपाल-चीन सीमा के निकट रसुवागढ़ी क्षेत्र में स्थित तिमुरे गांव इसकी चपेट में आया।
गौरतलब है कि उस समय इलाके में बारिश नहीं हो रही थी, इसलिए स्थानीय लोगों को इस आपदा का कोई पूर्वाभास नहीं था। बाढ़ आने के वक्त अधिकांश लोग अपनी दैनिक दिनचर्या में व्यस्त थे, जिससे जनहानि और अधिक हुई।
लापता सुरक्षाकर्मी और पर्यटक
नेपाल सरकार ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में तैनात नेपाल सेना के 44 जवान, पुलिस के 28 कर्मी और सशस्त्र पुलिस बल (APF) के 13 जवानों से अब तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है। इसके अतिरिक्त 391 पर्यटक भी लापता हैं, जिनकी तलाश में बचाव दल जुटे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल का रसुवा जिला ट्रेकिंग और पर्यटन के लिहाज से सक्रिय मौसम में था। विदेशी पर्यटकों के भी इस क्षेत्र में होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि उनकी सटीक संख्या की पुष्टि अधिकारियों द्वारा अभी नहीं की गई है।
बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
बाढ़ ने इस क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंचाई है। 9 जलविद्युत परियोजनाएं, कई वाणिज्यिक बैंक, कम से कम 19 सड़क पुल और दर्जनों सरकारी एवं निजी संपत्तियां बाढ़ में बह गई हैं। रसुवा जिले में कई सरकारी कार्यालय, सुरक्षा चौकियां और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
प्रशासन अभी भी जान-माल के नुकसान का पूरा ब्योरा जुटाने में लगा हुआ है और कुल क्षति का आकलन होने में समय लग सकता है।
सरकार की प्रतिक्रिया और राहत कार्य
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने बताया कि बाढ़ आने के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित विभागों को खोज, बचाव और राहत कार्यों के लिए सक्रिय कर दिया गया। सुबह करीब 9 बजे IST अधिकारियों ने नदी किनारे के इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा नदी के पास न जाने की अपील की।
भारत की मदद और द्विपक्षीय सहयोग
इस आपदा के बाद भारत ने नेपाल को 10 टन मानवीय सहायता भेजी है। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने औपचारिक रूप से यह राहत सामग्री नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को सौंपी। इस सहायता में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए जरूरी राहत सामग्री शामिल है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस कठिन घड़ी में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। आगे भी राहत अभियान जारी रहने की उम्मीद है।