27 अगस्त 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में राजा स्वरूप शृंगार, श्रावण चतुर्दशी पर भस्म आरती में उमड़े हज़ारों श्रद्धालु

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महाकालेश्वर मंदिर में राजा स्वरूप शृंगार, श्रावण चतुर्दशी पर भस्म आरती में उमड़े हज़ारों श्रद्धालु

सारांश

श्रावण शुक्ल चतुर्दशी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का राजा स्वरूप शृंगार किया गया। पंचामृत अभिषेक, कपूर आरती और महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरागत भस्म आरती के साथ मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूँज उठा।

मुख्य बातें

27 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष चतुर्दशी (सुबह 9:09 बजे तक) पर महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का राजा स्वरूप शृंगार किया गया; दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक हुआ।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म आरती अर्पित की गई, जो सदियों पुरानी परंपरा है।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध थे।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 27 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि (सुबह 9:09 बजे तक) के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक अनुष्ठान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे।

कपाट खुलने का दिव्य क्षण

गुरुवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के पट खोले गए। जैसे ही भस्म आरती और दिव्य शृंगार के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

पंचामृत अभिषेक और राजा स्वरूप शृंगार

मंदिर के पट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के उपरांत बाबा ने मुकुट धारण किया और उन्हें राजा स्वरूप में सुसज्जित किया गया। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की मनमोहक ध्वनि के साथ भस्म आरती का विधान पूर्ण हुआ।

महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा

परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यह परंपरा सदियों से अनवरत चली आ रही है और इसे महाकाल की उपासना का सर्वोच्च रूप माना जाता है।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति और नियम

भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त बीती रात से ही उज्जैन पहुँच गए थे। मंदिर प्रशासन के नियमानुसार, भस्म आरती में पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर के पुजारियों ने महाआरती विधिवत संपन्न कराई। श्रावण माह में महाकालेश्वर के दर्शन का विशेष महत्व होने के कारण इस अवधि में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की धार्मिक पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। महाकाल लोक परियोजना के बाद से मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो प्रशासन के लिए भीड़ प्रबंधन और परंपरा के संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती भी प्रस्तुत करती है। भस्म आरती की सदियों पुरानी परंपरा और महानिर्वाणी अखाड़े की भूमिका इस मंदिर की अनूठी धार्मिक विरासत को रेखांकित करती है, जिसे आधुनिक पर्यटन के दबाव में संजोए रखना एक सतत दायित्व है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन की सर्वाधिक पवित्र दैनिक पूजा है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती में पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। दर्शन के लिए पूर्व पंजीकरण की आवश्यकता होती है और श्रद्धालु प्रायः रात से ही कतार में लग जाते हैं।
महानिर्वाणी अखाड़े का भस्म आरती से क्या संबंध है?
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। यह सदियों पुरानी परंपरा है जो महाकालेश्वर मंदिर की धार्मिक विरासत का अभिन्न अंग है।
श्रावण माह में महाकाल दर्शन का क्या महत्व है?
श्रावण माह को भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वाधिक पवित्र माना जाता है। इस दौरान महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक हो जाती है और विशेष शृंगार एवं अनुष्ठान किए जाते हैं।
राजा स्वरूप शृंगार क्या होता है?
राजा स्वरूप शृंगार में भगवान महाकाल को राजसी वेशभूषा में सुसज्जित किया जाता है, जिसमें मुकुट धारण कराया जाता है। यह शृंगार पंचामृत अभिषेक और कपूर आरती के बाद किया जाता है तथा भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है।
राष्ट्र प्रेस
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