क्या महाकाल मंदिर में मंगलवार को भक्तों का सैलाब उमड़ा? भांग श्रृंगार ने मोहा मन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या महाकाल मंदिर में मंगलवार को भक्तों का सैलाब उमड़ा? भांग श्रृंगार ने मोहा मन

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान भक्तों का सैलाब उमड़ा। इस अद्भुत अवसर पर भांग श्रृंगार ने भक्तों का मन मोह लिया। सुबह 4 बजे से शुरू हुई आरती में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। जानिए इस दिव्य अवसर के बारे में और क्या खास था इस दिन।

मुख्य बातें

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
इस अवसर पर भांग का दिव्य श्रृंगार किया गया।
भक्तों के जयघोष ने मंदिर परिसर को गूंजाया।
पुजारियों ने पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया।

उज्जैन, 21 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार की सुबह भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर विशेष भस्म आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आरती सुबह 4 बजे संपन्न हुई, जिसमें श्रद्धालु बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन के लिए देर रात से ही कतारों में खड़े रहे।

जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान भगवान महाकाल का पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस) से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई।

इस बार बाबा महाकाल का भांग से दिव्य श्रृंगार किया गया, जो इस अवसर की विशेषता रही। साथ ही, उनके मस्तक पर आकर्षक चंद्र और त्रिपुंड लगाया गया। बाबा को नया मुकुट, रुद्राक्ष की माला और मुंडमाला धारण कराई गई। जब भक्तों ने सजे बाबा महाकाल के दर्शन किए, तो पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोषों से गूंज उठा।

मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, सुबह 4 बजे भस्म आरती हुई। वीरभद्र से आज्ञा प्राप्त कर मंदिर के पट खोले गए, जिसके बाद पंडितों ने भगवान महाकाल का पंचामृत से जलाभिषेक और पूजन किया।

मंगलवार के श्रृंगार का मुख्य आकर्षण भांग का दिव्य श्रृंगार था, जिसमें बाबा महाकाल के मस्तक पर आकर्षक चंद्र और त्रिपुंड लगाया गया। पूजन के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई, और बाबा महाकाल ने निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए।

भक्तों के 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। इस विशेष अमावस्या पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया।

उन्होंने बताया कि रोजाना बाबा को नए स्वरूप में तैयार किया जाता है। हर स्वरूप का अपना महत्व होता है। श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही देखने को मिलती है। एक-एक करके श्रद्धालु बाबा का दर्शन करते हैं, किसी को कोई परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई को भी दर्शाता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाल मंदिर में भस्म आरती कब होती है?
महाकाल मंदिर में भस्म आरती आमतौर पर सुबह 4 बजे होती है।
भांग श्रृंगार का क्या महत्व है?
भांग श्रृंगार बाबा महाकाल के लिए विशेष महत्व रखता है और यह उनके दिव्य स्वरूप को और भी आकर्षक बनाता है।
क्या सभी श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल हो सकते हैं?
हाँ, सभी श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल हो सकते हैं, लेकिन उन्हें समय से पहुँचने की सलाह दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले