महाकाल दरबार में भक्तों की भारी भीड़, वैशाख कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर हुए दिव्य दर्शन

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महाकाल दरबार में भक्तों की भारी भीड़, वैशाख कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर हुए दिव्य दर्शन

सारांश

उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार को भस्म आरती के दौरान भक्तों का तांता देखने को मिला। हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन का लाभ उठाया।

मुख्य बातें

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का आयोजन विशेष महत्व रखता है।
दूर-दूर से श्रद्धालु बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन के लिए आते हैं।
महाकाल का शृंगार भांग, त्रिपुंड, चंद्र और बेलपत्र से किया जाता है।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए ऑनलाइन बुकिंग आवश्यक होती है।
यह आयोजन भक्तों की आस्था का प्रतीक है।

उज्जैन, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार की सुबह भस्म आरती के दौरान भक्तों की बड़ी भीड़ देखने को मिली। मंदिर में विशेष भस्म आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

देश-विदेश से आए श्रद्धालु देर रात से ही अपने आराध्य के दिव्य दर्शन पाने के लिए लंबी कतारों में खड़े थे। वे बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन के लिए उत्सुक थे। मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, सुबह 4 बजे भस्म आरती हुई, और इस दौरान पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।

नियमानुसार, सबसे पहले वीरभद्र से आज्ञा प्राप्त करने के बाद मंदिर के पट खोले गए, जिसके बाद पंडितों ने भगवान महाकाल का पंचामृत से जलाभिषेक और पूजन किया। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई, और बाबा महाकाल ने निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए।

वैशाख कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि के अवसर पर शनिवार सुबह बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। उन्हें भांग, त्रिपुंड, चंद्र और बेलपत्र से सजाया गया, जिससे उनका रूप बहुत ही सुंदर और दिव्य नजर आ रहा था। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने बाबा के दिव्य दर्शनों का लाभ उठाया। इस दौरान पूरे परिसर में 'जय श्री महाकाल' के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही थी, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।

शनिवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। महाकाल के शृंगार के बाद कपूर की आरती की गई और इसके बाद उन्हें भोग लगाया गया। इस रूप को साकार स्वरूप माना जाता है। महाकाल की भस्म आरती को विश्वभर में विशेष महत्व दिया जाता है और इसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

भस्म आरती के दौरान महिलाएं घूंघट करती हैं और पुरुषों को धोती पहननी होती है। वहीं, सुबह की भस्म आरती में शामिल होने के लिए महाकालेश्वर मंदिर की वेबसाइट से पहले से ऑनलाइन बुकिंग की जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भक्तों की आस्था और श्रद्धा का भी प्रतीक है। महाकालेश्वर मंदिर में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं, जो अपने आराध्य के दिव्य दर्शन के लिए दूर-दूर से यात्रा करते हैं।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भस्म आरती का महत्व क्या है?
भस्म आरती महाकालेश्वर के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, जिसे देश-विदेश से श्रद्धालु देखने आते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर कब खोला जाता है?
महाकालेश्वर मंदिर के पट वीरभद्र से आज्ञा प्राप्त करने के बाद खोले जाते हैं।
महाकाल का शृंगार कैसे किया जाता है?
महाकाल का शृंगार भांग, त्रिपुंड, चंद्र और बेलपत्र से किया जाता है, जिससे उनका रूप दिव्य नजर आता है।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या करना होता है?
भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को महाकालेश्वर मंदिर की वेबसाइट से ऑनलाइन बुकिंग करनी होती है।
भस्म आरती में महिलाएं क्या पहनती हैं?
भस्म आरती के दौरान महिलाएं घूंघट करती हैं और पुरुष धोती पहनते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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